सामुदायिक पर्यटन से गाँवों का विकास: टोटो जनजाति की कहानी और ‘लोकल नैरेटिव्स’ का प्रभाव

पर्यटन अक्सर मनोरंजन और आराम तक सीमित रहता है, लेकिन एक अभिनव पहल, ‘लोकल नैरेटिव्स’, इसे सीखने और सामाजिक विकास के एक शक्तिशाली उपकरण में बदल रही है। यह कहानी है पश्चिम बंगाल के सुदूर टोटोपारा गाँव की, जहाँ दुनिया की सबसे छोटी जनजातियों में से एक, टोटो जनजाति के लगभग 1700 लोग अपनी पहचान और आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे थे। एक छोटे से गाँव से शुरू हुई यह पहल अब भारत के 50 गाँवों को वैश्विक शैक्षणिक संस्थानों से जोड़ रही है और सामुदायिक पर्यटन को एक नया आयाम दे रही है।

‘लोकल नैरेटिव्स’: पर्यटन से परे एक शैक्षिक यात्रा

2021 में वैष्णवी सोमानी द्वारा स्थापित ‘लोकल नैरेटिव्स’ का उद्देश्य पर्यटन को केवल मनोरंजन तक सीमित न रखकर उसे शिक्षा और गहन अनुभव से जोड़ना है। यह कम्युनिटी आधारित पर्यटन है जहाँ छात्र स्थानीय लोगों की तरह गाँव में रहकर उनके जनजीवन को समझते और सीखते हैं। इस अनूठी अवधारणा के पीछे विचार यह है कि जब छात्र गाँवों की यात्रा करते हैं, तो वे न केवल नई संस्कृतियों का अनुभव करते हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों की जरूरतों और चुनौतियों को भी समझते हैं, जिससे उन्हें वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने के लिए प्रेरित किया जाता है।

टोटोपारा की प्रेरणादायक कहानी: शिक्षा और आजीविका का संगम

टोटो जनजाति का गाँव, टोटोपारा, कई चुनौतियों का सामना कर रहा था। गाँव में इकलौते स्कूल को एक अतिरिक्त कमरे की सख्त जरूरत थी, और महिलाएँ अपनी पारंपरिक खानपान संस्कृति को बचाने के लिए एक कैफे खोलना चाहती थीं। ऐसे समय में, बेंगलुरु की प्रतिष्ठित क्राइस्ट यूनिवर्सिटी के 14 छात्रों का एक दल टोटोपारा पहुँचा। उन्होंने 10 दिनों तक गाँव में रहकर महिलाओं के साथ मिलकर कैफे के लिए एक मूल्य निर्धारण मॉडल और मेन्यू तैयार किया। इस यात्रा का परिणाम अविश्वसनीय रहा – गाँव को 6 लाख रुपये की कमाई हुई, जिससे स्कूल का अतिरिक्त कमरा बन सका और कैफे भी खुल गया। यह महज एक यात्रा नहीं थी, बल्कि यह ‘लोकल नैरेटिव्स’ के शिक्षा-आधारित पर्यटन मॉडल की सफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण था।

वैश्विक भागीदारी और भारत के गाँवों का सशक्तिकरण

‘लोकल नैरेटिव्स’ की इस अनूठी पहल ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूकासल और क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी, साथ ही जापान में टोक्यो और नागोया के 8 स्कूलों सहित कुल 10 अंतर्राष्ट्रीय संस्थान अपने छात्रों को भारत के गाँवों में इस ‘लर्निंग’ अनुभव के लिए भेज रहे हैं। भारत में, 50 गाँवों को इस कार्यक्रम के लिए मेजबानी हेतु तैयार किया गया है, जिससे उन्हें आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह से लाभ हो रहा है।

  • उत्तराखंड का सुनकिया: छात्रों की यात्रा के बाद, यहाँ देश की पहली कम्युनिटी टूरिज्म प्लेबुक तैयार की गई, जिसने स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद की।
  • गोवा का असनोरा: एक अन्य यात्रा में, ‘लोकल नैरेटिव्स’ ने बुनकर महिलाओं को सीधे खरीदारों से जोड़ा, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

IIM बेंगलुरु का समर्थन: सामाजिक उद्यमिता के लिए क्रेडिट प्रोग्राम

इस पहल को एक और महत्वपूर्ण मान्यता तब मिली जब IIM बेंगलुरु ने ‘लोकल नैरेटिव्स’ द्वारा डिज़ाइन किए गए इस 5 दिवसीय करिकुलम को एक क्रेडिट प्रोग्राम के रूप में अप्रूव किया। इसका मतलब यह है कि गाँवों में सामाजिक उद्यमिता सीखने वाले छात्रों को अब 3 क्रेडिट या अंक भी प्राप्त होंगे। वैष्णवी सोमानी बताती हैं, “हमने पर्यटन को सीखने के साथ जोड़ा है, और IIM बेंगलुरु के इस समर्थन से छात्रों को वास्तविक दुनिया के अनुभव के लिए अकादमिक मान्यता मिल रही है।” यह छात्रों को सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है, जहाँ वे समुदायों की भलाई के लिए व्यवसायिक समाधान विकसित कर सकते हैं।

निष्कर्ष

‘लोकल नैरेटिव्स’ सिर्फ एक पर्यटन कंपनी नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है जो शिक्षा, विकास और सामुदायिक सशक्तिकरण को एक साथ बुन रहा है। टोटो जनजाति के टोटोपारा गाँव से लेकर IIM बेंगलुरु के अकादमिक हॉल तक, यह पहल यह दर्शाती है कि कैसे सोच-समझकर डिजाइन किया गया पर्यटन न केवल यात्रा का अनुभव बदल सकता है, बल्कि उन समुदायों के जीवन को भी बदल सकता है जिनकी हम यात्रा करते हैं। यह भारत के गाँवों के लिए एक उज्जवल भविष्य की आशा जगाता है, जहाँ स्थानीय ज्ञान और वैश्विक शिक्षा का मिलन अनूठे विकास मॉडल को जन्म दे रहा है।

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