NEET री-एग्जाम: पेपर लीक रोकने के लिए NTA के अभूतपूर्व सुरक्षा उपाय और नई रणनीतियाँ

भारत की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा, नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के री-एग्जाम को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पूरी तरह सतर्क है। 21 जून को होने वाली इस परीक्षा को पेपर लीक जैसी अनिश्चितताओं से बचाने के लिए NTA ने इस बार अभूतपूर्व और बेहद कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं, जो NEET के इतिहास में पहली बार देखने को मिल रहे हैं। आइए जानते हैं क्या हैं ये नए सुरक्षा मानक और रणनीतियाँ, जो परीक्षा की पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करेंगी।

NEET री-एग्जाम: 21 जून को पेन-पेपर मोड में

नीट री-एग्जाम का आयोजन 21 जून को दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक पेन और पेपर मोड में किया जाएगा। यह परीक्षा देशभर के उन छात्रों के लिए आयोजित की जा रही है, जिनकी पिछली परीक्षा 12 मई को पेपर लीक की आशंकाओं के कारण रद्द कर दी गई थी।

पेपर सेटर्स पर कड़े प्रतिबंध और ‘लॉकडाउन’

NTA ने इस बार प्रश्न पत्र बनाने वाले विशेषज्ञों (पेपर सेटर्स) के लिए एक सख्त प्रोटोकॉल लागू किया है। परीक्षा होने तक इन पेपर सेटर्स को एक अज्ञात स्थान पर ‘लॉकडाउन’ में रखा जाएगा, जहाँ उन्हें कड़े प्रतिबंधों का पालन करना होगा। यह कदम NEET के इतिहास में पहली बार उठाया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य पेपर लीक की किसी भी आशंका को जड़ से खत्म करना है।

प्रश्न पत्रों के परिवहन में भारतीय वायुसेना का सहयोग

परीक्षा से संबंधित सभी महत्वपूर्ण कार्यों, जैसे प्रश्न पत्रों की सेटिंग, अनुवाद, प्रिंटिंग, पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन व वितरण तक, पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, प्रश्न पत्र और संबंधित सामग्री को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के विमानों का उपयोग किया जाएगा, ताकि अधिकतम सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित की जा सके।

डिजिटल निगरानी: फर्जी खबरों पर 24×7 नजर

डिजिटल क्षेत्र में संभावित गड़बड़ियों को रोकने के लिए NTA के अधिकारी 24 घंटे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स पर कड़ी नजर रख रहे हैं। इसका उद्देश्य फर्जी प्रश्न पत्रों, गलत सूचनाओं और संदिग्ध गतिविधियों को परीक्षा से दूर रखना है, जिससे छात्रों में भ्रम की स्थिति पैदा न हो।

NTA की नई रणनीति: विशेषज्ञ भी नहीं जानेंगे किस परीक्षा का पेपर बना रहे हैं

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी एक ऐसे नए सिस्टम पर काम कर रही है, जिसमें प्रश्न तैयार करने वाले विशेषज्ञों को भी यह पता नहीं होगा कि वे किस परीक्षा के लिए प्रश्न पत्र बना रहे हैं। इस नई योजना के तहत, अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञ केवल प्रश्न तैयार करेंगे। इन प्रश्नों को एक बड़े डिजिटल बैंक में संग्रहीत किया जाएगा, जिसमें लगभग 10,000 प्रश्न हो सकते हैं। बाद में, आधुनिक तकनीक की सहायता से इन प्रश्नों का उपयोग करके अंतिम परीक्षा पत्र तैयार किया जाएगा, जिससे गोपनीयता का स्तर और भी बढ़ जाएगा।

भविष्य की परीक्षाओं के लिए आधुनिक सुरक्षा तकनीक

पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए, भविष्य में होने वाली NEET परीक्षाओं में (संभवतः NEET 2025 या 2026 से) एग्जाम सेंटर्स पर फेशियल रिकॉग्निशन, बॉयोमेट्रिक जांच और CCTV से लाइव निगरानी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके।

क्यों रद्द हुई थी 12 मई की NEET UG 2024 परीक्षा?

NEET UG 2024 की परीक्षा 12 मई को देश भर के 551 शहरों और विदेशों के 14 शहरों में आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 22 लाख छात्र शामिल हुए थे। हालांकि, परीक्षा में पेपर लीक की शिकायतों के चलते इसे रद्द कर दिया गया था, जिसके बाद देशभर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। NTA के अनुसार, 7 मई की शाम को ही परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिली थी, जिसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया और अंततः 12 मई को परीक्षा रद्द कर री-एग्जाम का फैसला लिया गया।

NEET: भारत में मेडिकल शिक्षा का प्रवेश द्वार

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) भारत में मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है। इसकी शुरुआत 2013 में हुई थी। इस परीक्षा के माध्यम से देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, आयुष (जैसे BAMS, BHMS) और नर्सिंग जैसे प्रतिष्ठित पाठ्यक्रमों में प्रवेश मिलता है, जिसमें AIIMS और JIPMER जैसे उच्च-स्तरीय संस्थान भी शामिल हैं। NEET लाखों छात्रों के लिए डॉक्टर बनने के सपने को साकार करने का मार्ग प्रशस्त करता है, और यही कारण है कि इसकी शुचिता और सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।

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