बिहार में कोचिंग संस्थानों के नियम बदले: छात्रों के भविष्य के लिए बड़ा कदम

बिहार में कोचिंग संस्थानों के नियम बदले: छात्रों के भविष्य के लिए बड़ा कदम

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में अधिक अनुशासन लाने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को कोचिंग संस्थानों के संचालन के संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं।

स्कूल, कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर कोचिंग न जाएं: नए नियम

सरकार द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब राज्य का कोई भी कोचिंग संस्थान स्कूल और कॉलेज के निर्धारित समय (सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक) के दौरान अपनी कक्षाएं संचालित नहीं कर सकेगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र अपनी मुख्य स्कूली या कॉलेज की पढ़ाई को छोड़कर केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थानों का रुख न करें। छात्रों को उनकी प्राथमिक शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करना ही इस पहल का लक्ष्य है।

कोचिंग पर लगाम क्यों?

यह महत्वपूर्ण निर्णय पटना में दो बड़े कोचिंग संस्थानों (खान ग्लोबल स्टडीज के खान सर और ज्ञान बिंदु कोचिंग के रौशन आनंद) के बीच हाल ही में हुए एक विवाद के बाद आया है। बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा के परिणाम आने के बाद, दोनों संस्थानों ने बड़ी संख्या में अपने छात्रों की सफलता का दावा करते हुए व्यापक प्रचार अभियान चलाया। इसमें शहर भर में पोस्टर, होर्डिंग और बैनर लगाए गए। इसी दौरान आरोप लगे कि खान ग्लोबल स्टडीज के कुछ कर्मचारियों ने ज्ञान बिंदु कोचिंग के बोर्ड के ऊपर अपना प्रचार बैनर लगा दिया, जिससे तनाव बढ़ा। यह तनाव धीरे-धीरे हिंसा में बदल गया, जिसके परिणामस्वरूप तोड़फोड़, पथराव और गोलीबारी जैसी अप्रिय घटनाएं सामने आईं। छात्रों के हित में और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा।

शिक्षा विभाग के महत्वपूर्ण निर्देश:

  • सभी कोचिंग संस्थानों को अपने यहां अध्ययनरत विद्यार्थियों का पूरा विवरण संबंधित जिला प्रशासन को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
  • स्कूलों एवं कॉलेजों के निर्धारित समय (सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक) में कोई भी कोचिंग संस्थान अपनी कक्षाएं नहीं चला सकेगा।

क्या हैं ‘डमी स्कूल’ और इस फैसले का उन पर असर?

यह फैसला ‘डमी स्कूल’ नामक एक बढ़ती हुई समस्या पर भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रहार करता है। ‘डमी स्कूल’ ऐसे संस्थान होते हैं, जहां छात्रों को नियमित रूप से उपस्थिति दर्ज कराने की आवश्यकता नहीं होती। कोचिंग संस्थान अक्सर नियमित स्कूलों के साथ गठजोड़ कर छात्रों पर स्कूल का बोझ कम करते हैं, जिससे उन्हें अपनी प्रवेश परीक्षाओं (जैसे जेईई और नीट) की तैयारी पर अधिक समय देने का मौका मिलता है। डमी स्कूलों में प्रवेश मुख्यतः जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए होता है। सरकार का यह कदम छात्रों को वास्तविक स्कूली शिक्षा से दूर होने से रोकने में मदद करेगा और उन्हें एक संतुलित शैक्षणिक वातावरण प्रदान करेगा, जिससे वे अपनी प्राथमिक शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के बीच बेहतर संतुलन बना सकें।

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