आजकल की नौकरी के इंटरव्यू: सिर्फ डिग्री नहीं, इन बातों पर भी दें ध्यान!
क्या आप जानते हैं कि आजकल नौकरी के इंटरव्यू पहले जैसे नहीं रहे? अगर आप सोचते हैं कि अच्छी नौकरी पाने के लिए सिर्फ बेहतरीन डिग्री और काम का अनुभव ही काफी है, तो शायद आप गलत हैं। बदलते समय के साथ, कंपनियां अब सिर्फ आपके रेज़्यूमे (CV) से आगे बढ़कर, आपके व्यक्तित्व, व्यवहार और सॉफ्ट स्किल्स को भी करीब से परख रही हैं। तो आइए जानते हैं कि नौकरी के इंटरव्यू में अब किन नई चीज़ों पर ध्यान दिया जा रहा है और आप कैसे खुद को इसके लिए तैयार कर सकते हैं।
रेस्तरां में आपका व्यवहार: एक नया इंटरव्यू रूम
हेल्थकेयर कंपनी बूपा के सीईओ, इनाकी एरेनियो, 45 मिनट के पारंपरिक इंटरव्यू को पर्याप्त नहीं मानते। वे बड़े पदों के लिए कुल छह घंटे का मूल्यांकन करते हैं, जिसे तीन मुलाकातों में बांटा जाता है। इसमें उम्मीदवार का आत्मविश्वास, पहल करने की क्षमता और दूसरों के प्रति सम्मान जैसे गुण परखे जाते हैं।
- पहला चरण: दफ्तर में दो घंटे तक उम्मीदवार के सीवी और अनुभव पर विस्तार से चर्चा होती है।
- दूसरा चरण: रेस्तरां में नाश्ता या लंच। यहां एरेनियो देखते हैं कि उम्मीदवार खुद पहल करता है या दूसरों का अनुसरण करता है। एक दिलचस्प बात यह है कि यदि वे केवल पानी मंगाते हैं और उम्मीदवार अपने लिए वाइन ऑर्डर करता है, तो इससे वे उसका आत्मविश्वास और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता आंकते हैं। वे ऐसे उम्मीदवारों को पसंद नहीं करते जो केवल दूसरों की नकल करते हैं।
बातचीत का तरीका और टीम स्पिरिट
ट्विलियो के सीईओ, खोजेमा शिपचैंडलर, भी वरिष्ठ उम्मीदवारों का 45 मिनट का डिनर इंटरव्यू लेते हैं। वे इस दौरान देखते हैं कि काम के बाद व्यक्ति कैसा व्यवहार करता है और उसकी बातचीत का तरीका कैसा है।
- ‘मैं’ शब्द का प्रयोग: बातचीत में बार-बार ‘मैं’ शब्द का इस्तेमाल करना टीम भावना की कमी का संकेत माना जाता है। कंपनियां ऐसे लोगों को पसंद करती हैं जो ‘हम’ की भावना के साथ काम करते हैं।
- सवाल पूछना है ज़रूरी: शिपचैंडलर उम्मीदवारों को सवाल पूछने के लिए 20 मिनट अलग से देते हैं। इस दौरान कोई सवाल न पूछना अयोग्यता माना जाता है, क्योंकि यह जिज्ञासा की कमी या स्थिति को समझने में असमर्थता को दर्शाता है।
अपेक्षित परिस्थितियों में आपकी प्रतिक्रिया
कुछ सीईओ आपके त्वरित निर्णयों और अप्रत्याशित स्थितियों में आपकी प्रतिक्रिया को भी परखते हैं:
- बिना चखे नमक डालना: कुछ सीईओ ऐसे उम्मीदवारों को तुरंत खारिज कर देते हैं, जो खाना चखे बिना ही उसमें नमक डाल देते हैं। उनके अनुसार, यह बिना सोचे-समझे और जल्दबाजी में फैसले करने की आदत को दर्शाता है।
- जानबूझकर की गई गलती: एक सीईओ ने तो इंटरव्यू में वेटर से जानबूझकर गलत खाना सर्व करवाकर उम्मीदवार के गुस्से और प्रतिक्रिया को परखा।
- स्टीव जॉब्स का ‘बियर टेस्ट’: एपल के स्टीव जॉब्स का मशहूर ‘बियर टेस्ट’ भी इसी सोच पर आधारित था। वे उम्मीदवार को दफ्तर से बाहर टहलाने ले जाते थे और देखते थे कि क्या उसके साथ सहज होकर समय बिताया जा सकता है। इससे वे समझते थे कि उम्मीदवार टीम में घुलने-मिलने और साथ काम करने के अनुकूल है या नहीं।
हर किसी के प्रति सम्मान: यह भी मायने रखता है!
आपके व्यवहार का हर पहलू मायने रखता है। ‘डायरी ऑफ अ सीईओ’ के फाउंडर स्टीवन बार्टलेट ने बिना अनुभव वाली एक महिला को सिर्फ इसलिए नौकरी दी क्योंकि उसने बिल्डिंग के गार्ड को नाम लेकर धन्यवाद कहा था। यह दर्शाता है कि आप न केवल अपने बराबर वालों या सीनियर्स के साथ, बल्कि हर किसी के साथ कैसा व्यवहार करते हैं।
निष्कर्ष
इन सभी उदाहरणों से यह साफ है कि अब कंपनियों को सिर्फ किताबी ज्ञान या तकनीकी कौशल वाले लोग नहीं चाहिए। उन्हें एक संपूर्ण व्यक्तित्व चाहिए जिसमें आत्मविश्वास, पहल, दूसरों के प्रति सम्मान, स्वतंत्र सोच, समस्याओं को हल करने की क्षमता और टीम में घुलने-मिलने का गुण हो। इसलिए, अगली बार जब आप किसी इंटरव्यू में जाएं, तो याद रखें: हर छोटी बात मायने रखती है!