नौकरी छोड़ गांव लौटे, ‘मखाना बॉय’ बने प्रिंस राज शुक्ला: बिहार के कृषि स्टार्टअप AGRATE की सफलता कहानी

बेंगलुरु की अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर, कोरोना लॉकडाउन में गांव लौटे प्रिंस राज शुक्ला ने जो कर दिखाया, वह किसी प्रेरणा से कम नहीं है। बिहार के पूर्णिया के इस युवा ने न सिर्फ अपने लिए बल्कि हजारों किसानों के लिए सफलता के नए द्वार खोले हैं। आइए जानते हैं, कैसे प्रिंस राज शुक्ला ने अपने कृषि स्टार्टअप AGRATE के जरिए एक बड़ी क्रांति लाई है।

एक इंजीनियर का किसान बनने का सफर

प्रिंस राज शुक्ला का सपना विदेश जाकर मास्टर्स की डिग्री हासिल करना था। वे बेंगलुरु में एक अच्छी नौकरी कर रहे थे, लेकिन कोरोना महामारी और लॉकडाउन ने सब कुछ बदल दिया। उन्हें अपनी नौकरी छोड़कर वापस गांव आना पड़ा। यह वापसी उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। गांव आकर, उन्होंने अपने पिता से 1 लाख रुपये उधार लिए और एक कृषि स्टार्टअप, एग्रेट (AGRATE India Private Limited) की शुरुआत की।

शुरुआती मुश्किलें और गांव वालों के ताने

किसी भी नए काम की तरह, प्रिंस को भी शुरुआत में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। गांव वालों ने उन्हें ‘गंवार’ कहा और कई लोगों का मानना था कि वे गांव में रहकर अपना भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। इन तानों का सामना करते हुए भी प्रिंस विचलित नहीं हुए। उनका दृढ़ निश्चय था कि वे किसानों के लिए कुछ बेहतर करेंगे।

किसानों के लिए नई राह: बीज से बाजार तक

प्रिंस का शुरुआती लक्ष्य किसानों को अच्छी क्वालिटी के बीज, जैविक खाद और आधुनिक खेती के उपकरण उपलब्ध कराना था। लेकिन वे जानते थे कि सिर्फ सप्लाई से किसानों की समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी। इसलिए, उन्होंने एक कदम आगे बढ़कर छोटे किसानों को आधुनिक खेती की ट्रेनिंग देना शुरू किया।

  • उन्होंने गांव-गांव घूमकर 10 हजार से ज्यादा किसानों को जोड़ा।
  • टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया (जैसे वीडियो कॉल, वर्कशॉप और एक ऐप)।
  • किसानों को बीज बोने के सही तरीके, पानी बचाने की तकनीक और जैविक खेती सिखाई।

प्रिंस के सिखाए तरीकों से किसानों की फसल दोगुनी हो गई और उनका घाटा कम हुआ। धीरे-धीरे, एग्रेट ने न केवल सप्लाई चेन को मजबूत किया, बल्कि किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर मार्केट लिंक भी प्रदान किए, जिससे उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिल सके।

‘मखाना बॉय’ के रूप में पहचान और बड़ी सफलता

प्रिंस के अथक प्रयासों और सफलता ने उन्हें ‘मखाना बॉय’ के नाम से मशहूर कर दिया। आज उनकी कंपनी AGRATE का सालाना टर्नओवर 2.5 करोड़ रुपये है। उनकी इस सफलता को देखते हुए कई बड़ी कंपनियों ने भी उनके साथ पार्टनरशिप की है।

AGRATE और इसके संस्थापक प्रिंस राज शुक्ला को बिहार में उद्यमिता और कृषि नवाचार के लिए कई मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है, जिसमें ‘बेस्ट लीडिंग बिहार एंटरप्रेन्योर अवार्ड’ भी शामिल है।

प्रेरणादायक सीख

प्रिंस राज शुक्ला की कहानी हमें सिखाती है कि बाधाएं कितनी भी हों, अगर जुनून और कड़ी मेहनत हो, तो गांव में रहकर भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि पारंपरिक कृषि में आधुनिकता का समावेश करके न सिर्फ व्यक्तिगत सफलता पाई जा सकती है, बल्कि पूरे समुदाय के जीवन में सकारात्मक बदलाव भी लाया जा सकता है।

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