आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में करियर बदलना और अपने सपनों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती हो सकती है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने जुनून को पूरा करने के लिए बड़े जोखिम उठाते हैं और सफलता की नई मिसालें कायम करते हैं। इस ब्लॉग पोस्ट में हम दो ऐसे ही प्रेरणादायक व्यक्तित्वों की कहानियों पर गौर करेंगे – पूर्व ट्विटर सीईओ पराग अग्रवाल और गूगल के पूर्व कर्मचारी सलाहुद्दीन अब्दुल-काफी। एक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में अपनी वापसी की है, तो दूसरे ने अपने खाना पकाने के शौक को एक सफल रेस्टोरेंट में बदल दिया है।
पराग अग्रवाल: ट्विटर के बाद AI की दुनिया में धमाकेदार वापसी
पराग अग्रवाल, एक जाने-माने इंडियन-अमेरिकन सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जिन्होंने 29 नवंबर 2021 को ट्विटर के सीईओ का पद संभाला था। उन्हें ट्विटर के सह-संस्थापक जैक डॉर्सी ने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। हालांकि, अक्टूबर 2022 में एलन मस्क द्वारा ट्विटर के अधिग्रहण के बाद पराग को इस पद से हटना पड़ा।
अपनी AI कंपनी ‘Parallel Web Systems’ की शुरुआत
ट्विटर छोड़ने के बाद, पराग ने किसी दूसरी कंपनी में नौकरी करने के बजाय अपना खुद का वेंचर शुरू करने का फैसला किया। 2023 में, उन्होंने अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी Parallel Web Systems Inc के साथ टेक्नोलॉजी की दुनिया में वापसी की। यह कंपनी एक क्लाउड प्लेटफॉर्म तैयार कर रही है जो AI सिस्टम्स को इंटरनेट पर रियल-टाइम रिसर्च करने की अद्भुत क्षमता देता है।
Parallel Web Systems कैसे काम करती है?
पराग की कंपनी ‘AI एजेंट्स’ के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करती है। ये AI एजेंट्स ऐसे स्वतंत्र सॉफ्टवेयर सिस्टम होते हैं जो इंसानों की तरह ही कई तरह के जटिल काम खुद कर सकते हैं। जहां पारंपरिक AI सिस्टम अक्सर केवल पुराने, पहले से फीड किए गए डेटा पर काम करते हैं, वहीं Parallel Web Systems ऐसे टूल बना रही है जो AI को सीधे लाइव इंटरनेट से जुड़ने, वास्तविक समय की जानकारी निकालने और मुश्किल कार्यों को स्वचालित रूप से पूरा करने में सक्षम बनाते हैं। कंपनी विभिन्न प्रकार के API (एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस) भी प्रदान करती है, जिनकी मदद से AI आसानी से वेबसाइटों से डेटा इकट्ठा कर सकता है और ऑनलाइन कार्यों को स्वयं पूरा कर सकता है।
पराग ने अपनी उच्च शिक्षा IIT बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री लेकर पूरी की है। इसके बाद उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में एमएस और पीएचडी की डिग्री हासिल की।
सलाहुद्दीन अब्दुल-काफी: गूगल की नौकरी छोड़, BBQ रेस्टोरेंट से कमाए करोड़ों
दूसरी कहानी गूगल के पूर्व कर्मचारी सलाहुद्दीन अब्दुल-काफी की है, जिन्होंने टेक्नोलॉजी की चकाचौंध भरी दुनिया छोड़कर अपने जुनून को चुना। पिछले साल, सलाहुद्दीन ने गूगल में अपनी 4.2 करोड़ रुपये सालाना की आकर्षक नौकरी छोड़ दी। अब, अमेरिका के टेक्सास में उनका ‘Kafi BBQ’ नाम का रेस्टोरेंट हलाल बार्बेक्यू (BBQ) के लिए काफी मशहूर हो चुका है। उनकी यह अनोखी और सफल कहानी सोशल मीडिया पर भी खूब सुर्खियां बटोर रही है।
टेक इंडस्ट्री से मोहभंग और एक नए सफर की शुरुआत
35 वर्षीय सलाहुद्दीन ने गूगल से पहले माइक्रोसॉफ्ट, यूट्यूब और क्रूज़ जैसी बड़ी कंपनियों में भी कुल 14 साल तक काम किया था। उन्होंने बताया कि उन्हें टेक इंडस्ट्री से ‘मन भर गया’ था। उन्हें यह महसूस होने लगा था कि यहां काम केवल पैसा कमाने के लिए हो रहा है, न कि लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए। इसी सोच के चलते उन्होंने गूगल की नौकरी छोड़ी और कुछ समय के लिए एक नॉन-प्रॉफिट (NGO) संस्था से भी जुड़े रहे।
दोस्तों से मिला ‘BBQ रेस्टोरेंट’ का आइडिया
सलाहुद्दीन को खाना बनाने का बहुत शौक था। नौकरी करते हुए भी वह अक्सर अपने दोस्तों के लिए डिनर पार्टियां और बार्बेक्यू होस्ट किया करते थे। उनके दोस्त उनके बनाए खाने के इतने कायल थे कि उन्होंने कहा कि ऐसा स्वादिष्ट खाना उन्होंने पहले कभी नहीं चखा। दोस्तों से मिली इसी तारीफ ने उनके दिमाग में अपना रेस्टोरेंट खोलने का आइडिया भर दिया। उन्होंने सोचा कि क्यों न टेक्सास बार्बेक्यू में कुछ नया और हलाल ट्राई किया जाए।
इस विचार के साथ, उन्होंने दिसंबर 2023 में Kafi BBQ नाम से अपना रेस्टोरेंट खोला। शुरुआत इतनी जबरदस्त रही कि तीन दिन के लिए तैयार किया गया सारा खाना पहले ही दिन खत्म हो गया, और उन्हें उसी रात दोबारा खाना बनाना पड़ा!
मेहनत और समर्पण: कमाई, लेकिन नहीं ली सैलरी
Kafi BBQ रेस्टोरेंट को खोलने में सलाहुद्दीन को करीब 8.4 करोड़ रुपये का खर्च आया था। इतनी अच्छी कमाई के बावजूद, सलाहुद्दीन ने अभी तक अपने रेस्टोरेंट से खुद के लिए एक भी रुपया सैलरी नहीं ली है। वह अपनी पुरानी बचत से ही अपना खर्च चला रहे हैं और सारा मुनाफा व्यवसाय में ही फिर से निवेश कर रहे हैं, क्योंकि रेस्टोरेंट चलाने का खर्च काफी ज्यादा है। उनके पेरेंट्स इराकी मूल के थे, और बचपन में कांसास सिटी बार्बेक्यू में खाया गया नॉन-हलाल खाना उनकी प्रेरणा बना, जिसे उन्होंने हलाल रूप में पेश किया।
निष्कर्ष
पराग अग्रवाल और सलाहुद्दीन अब्दुल-काफी की कहानियाँ हमें सिखाती हैं कि जुनून, दृढ़ संकल्प और जोखिम उठाने की क्षमता ही सफलता की कुंजी है। चाहे वह अत्याधुनिक AI टेक्नोलॉजी हो या स्वादिष्ट BBQ, अपने सपनों को साकार करने के लिए लीक से हटकर सोचना और कड़ी मेहनत करना हमेशा रंग लाता है। ये कहानियाँ उन सभी के लिए प्रेरणा हैं जो अपने करियर में बदलाव लाना चाहते हैं या अपना खुद का कुछ शुरू करने का सपना देखते हैं।