राजस्थान में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। हाल ही में, यह बहुप्रतीक्षित परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई, जिसमें लाखों उम्मीदवारों ने भाग लिया। इस लेख में, हम परीक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं, उपस्थिति दर, सुरक्षा व्यवस्था और साथ ही सामने आई कुछ चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
RPSC सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा: एक अवलोकन
यह परीक्षा कुल 9,651 पदों पर भर्ती के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें गणित विषय में सर्वाधिक और गुजराती में सबसे कम पद थे। परीक्षा को कुल चार वर्गों (ग्रुप्स) में बांटा गया था।
- परीक्षा की शुरुआत: रविवार, 12 जुलाई को हुई।
- परीक्षा केंद्र: प्रदेश के 27 जिलों में 1221 केंद्र बनाए गए थे।
- पंजीकृत उम्मीदवार: कुल 12 लाख 30 हजार से अधिक उम्मीदवारों ने इस परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था।
- परीक्षा का पैटर्न:
- पहले दिन दो पारियों में पेपर हुए।
- पहली पारी (सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक): सामान्य ज्ञान (GK) का पेपर।
- दूसरी पारी (दोपहर 3 बजे से शाम 5:30 बजे तक): सोशल साइंस की परीक्षा।
- प्रवेश नियम: अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने से एक घंटे पहले तक ही प्रवेश दिया गया।
उम्मीदवारों की उपस्थिति: एक नज़र
परीक्षा में उम्मीदवारों की भागीदारी उत्साहजनक रही, लेकिन कुछ आंकड़े भी सामने आए जो रोचक हैं:
- पहली पारी:
- पंजीकृत: 3 लाख 60 हजार 268 उम्मीदवार।
- शामिल हुए: 2 लाख 26 हजार 852 उम्मीदवार।
- उपस्थिति प्रतिशत: 62.97%।
- दूसरी पारी:
- शामिल हुए: 2 लाख 23 हजार 655 उम्मीदवार।
- उपस्थिति प्रतिशत: 62.08%।
- महत्वपूर्ण तथ्य: पहली पारी में शामिल हुए 3197 उम्मीदवार दूसरी पारी की परीक्षा में उपस्थित नहीं हुए, जो दर्शाता है कि कुछ उम्मीदवारों ने केवल एक ही पेपर देने का विकल्प चुना।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और नियम
इस साल की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक होने के कारण, RPSC ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे ताकि परीक्षा की शुचिता बनी रहे।
- प्रवेश से पहले जांच: सभी अभ्यर्थियों को मेटल डिटेक्टर से जांच के बाद ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया गया।
- महिला अभ्यर्थियों के लिए विशेष नियम:
- उन्हें अपनी चूड़ियां उतारनी पड़ीं।
- हाथों में बंधे धागे काटने पड़े।
- दुपट्टे भी सेंटर के बाहर ही उतरवा दिए गए।
परीक्षा के दौरान सामने आईं कुछ चुनौतियाँ
इतनी बड़ी परीक्षा के आयोजन में कुछ चुनौतियाँ और अप्रत्याशित घटनाएँ भी सामने आईं:
- गलत परीक्षा केंद्र का पता: झुंझुनूं से जयपुर के जमवारामगढ़ पहुंचे एक अभ्यर्थी श्रवण कुमार ने बताया कि उनके एडमिट कार्ड पर लिखे पते पर परीक्षा केंद्र की बजाय एक क्रिकेट का मैदान था। गूगल लोकेशन पर भी वही पता दिखा रहा था, जिससे काफी परेशानी हुई।
- मेटल डिटेक्टर में देरी: सवाई माधोपुर शहर के एक केंद्र पर मेटल डिटेक्टर 20 मिनट की देरी से पहुंचा, जिसके कारण शुरुआत में कुछ अभ्यर्थियों को बिना जांच के ही प्रवेश देना पड़ा।
- देरी से प्रवेश निषेध और विवाद: पाली शहर के बांगड़ स्कूल में सुबह 9 बजे के बाद पहुंचे अभ्यर्थियों को प्रवेश नहीं दिया गया। इसी दौरान, जब पेपर लेकर आई गाड़ी के लिए गेट खोला गया, तो कुछ अभ्यर्थी उसके पीछे घुसने का प्रयास करने लगे। हालांकि सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान एक महिला अभ्यर्थी के पिता ने विरोध दर्ज कराया और कोर्ट जाने की धमकी भी दी।
निष्कर्ष
हाल ही में आयोजित RPSC सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा का आयोजन लाखों युवाओं के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच, यह परीक्षा बड़े पैमाने पर सफलतापूर्वक संपन्न हुई, हालांकि कुछ स्थानों पर छोटी-मोटी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा। इन अनुभवों से सीख लेकर भविष्य की परीक्षाओं को और भी सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करने में मदद मिलेगी, जिससे अभ्यर्थियों को एक निष्पक्ष और सहज अनुभव मिल सके।