हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों में हुए छात्र आंदोलनों ने सरकारी परीक्षाओं की प्रणाली में बड़े बदलाव लाए हैं। बिहार से लेकर झारखंड तक, छात्रों के एकजुट संघर्ष ने सरकारों को उनकी मांगों पर विचार करने और महत्वपूर्ण सुधार लागू करने के लिए मजबूर किया है। आइए, इन सफल छात्र आंदोलनों और उनके परिणामस्वरूप हुए महत्वपूर्ण फैसलों पर विस्तार से चर्चा करें।
बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) में बड़ा बदलाव
बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह एक बड़ी खुशखबरी है। लगातार चल रहे छात्र आंदोलन के बाद, बिहार सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि BPSC TRE-4 परीक्षा अब केवल एक ही चरण में आयोजित की जाएगी। इसका मतलब है कि अब प्रारंभिक परीक्षा (प्रीलिम्स) और मुख्य परीक्षा (मेन्स) दोनों नहीं होंगी, बल्कि सिर्फ एक परीक्षा होगी। इस फैसले से उन हजारों उम्मीदवारों को राहत मिली है जो परीक्षा प्रणाली में सरलता और पारदर्शिता की मांग कर रहे थे।
पटना के गर्दनीबाग में 18 अगस्त से धरने पर बैठे छात्र नेताओं अमन और जहान्वी ने सरकार के इस फैसले के बाद अपना अनशन तोड़ा। छात्र नेताओं ने इसे ‘छात्र एकता और संघर्ष की जीत’ बताया।
सरकार के अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
- परीक्षा सुधार विशेषज्ञ समिति: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार के लिए सुझाव देने हेतु पटना हाईकोर्ट के जज की अध्यक्षता में एक ‘परीक्षा सुधार पर विशेषज्ञ समिति’ का गठन किया गया है। यह समिति छात्रों की शिकायतों की भी सुनवाई करेगी।
- विद्यार्थी सहयोग पोर्टल: छात्रों की समस्याओं और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए ‘विद्यार्थी सहयोग पोर्टल’ और ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ की शुरुआत की गई है। इसके माध्यम से 30 दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार की मांग
बिहार के साथ-साथ झारखंड में भी छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर मुखर प्रदर्शन किया। जून में जंतर-मंतर पर शुरू हुआ छात्र आंदोलन जल्द ही रांची की सड़कों पर फैल गया, जहाँ हजारों छात्र-छात्राओं ने JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाई।
छात्रों ने कचहरी स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डेरा डाला और चेतावनी दी कि यदि परीक्षा व्यवस्था में तुरंत सुधार नहीं किया गया तो आंदोलन और भी बड़ा रूप लेगा। उन्होंने धरना स्थल पर ही अपने भोजन का इंतजाम किया और अपनी पढ़ाई भी जारी रखी, बारिश में भी उनके हौसले पस्त नहीं हुए।
झारखंड आंदोलन के प्रमुख परिणाम
- परीक्षाएं स्थगित: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य (लिखित) प्रतियोगिता परीक्षा-2025 को स्थगित कर दिया।
- अध्यक्ष का इस्तीफा और जांच: जेपीएससी के अध्यक्ष एल. खियांगते ने इस्तीफा दे दिया है, और जेपीएससी परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच CID कर रही है।
- हाईलेवल कमेटी का गठन: 25 जुलाई से 12 अगस्त तक चले आंदोलन के बाद, 27 अगस्त को सरकार ने JPSC-JSSC भर्ती व्यवस्था में सुधार के लिए तीन सदस्यीय हाईलेवल कमेटी गठित की।
- 44 भर्ती परीक्षाएं रद्द: अनियमितताओं के विरोध प्रदर्शनों के चलते सरकार ने 44 भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दीं। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग ने इसकी पूरी सूचना जारी की।
JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने पर नया विरोध
हालांकि, 44 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले से एक नया विवाद खड़ा हो गया। JSSC-CGL में चयनित लगभग 2,950 उम्मीदवार, जो परीक्षा पास करके नियुक्ति प्रक्रिया तक पहुंच चुके थे, इस फैसले से नाराज हैं। उनका कहना है कि परीक्षा रद्द होने से वे फिर से बेरोजगार होने की कगार पर आ गए हैं। वे अपनी स्थिति को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार से समाधान की मांग कर रहे हैं।
छात्र शक्ति की जीत: एक सबक
ये छात्र आंदोलन दर्शाते हैं कि छात्रों की एकता और संघर्ष में कितनी शक्ति है। चाहे वह बिहार में शिक्षक भर्ती का मामला हो या झारखंड में परीक्षा में पारदर्शिता की मांग, छात्रों ने अपनी आवाज बुलंद की है और सरकारों को उनकी मांगों को मानना पड़ा है। यह दिखाता है कि एक लोकतांत्रिक समाज में युवाओं की सक्रिय भागीदारी कितनी महत्वपूर्ण है, खासकर जब बात शिक्षा और रोजगार के अवसरों की आती है।