हाल ही में सूरत स्थित सरकारी समरस गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं ने अपनी बुनियादी सुविधाओं को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। 1 सितंबर की रात को शुरू हुआ यह प्रदर्शन खाने की खराब गुणवत्ता, पानी की अनियमित आपूर्ति और छात्रावास में रहने की असुविधाजनक व्यवस्थाओं के खिलाफ था। छात्राओं ने शांतिपूर्ण ढंग से ‘रामधुन’ गाते हुए अपनी मांगों को पूरा करने तक विरोध जारी रखने का संकल्प लिया। यह घटना छात्रावासों में छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं और उनके अधिकारों पर महत्वपूर्ण सवाल उठाती है।
मुख्य समस्याएँ क्या थीं?
छात्राओं ने कई गंभीर मुद्दों को उठाया, जिनमें शामिल हैं:
- खाने की खराब गुणवत्ता: खाने में कीड़े-मकोड़े, प्लास्टिक के टुकड़े और सिगरेट के अवशेष मिलने की शिकायतें। सब्जियों में अत्यधिक तेल और पानी, सख्त रोटियां, खीर में अजीब गंध और पानी वाली छाछ जैसी समस्याएं भी आम थीं।
- पानी की अनियमित आपूर्ति: नौ मंजिला हॉस्टल में केवल कुछ ही मंजिलों पर पानी पहुंचना। 1200 छात्राओं के लिए सिर्फ एक घंटे की पानी की सप्लाई, जिसके कारण नहाने, कपड़े धोने और पानी स्टोर करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पानी का रंग हरा होने और उसे पीने से छात्राओं के बीमार पड़ने की शिकायतें भी सामने आईं।
- वार्डन का अनुचित व्यवहार: छात्राओं द्वारा घर जाने की अनुमति मांगने पर वार्डन द्वारा दुर्व्यवहार। खाने की शिकायतों पर कोई कार्रवाई न करना।
- सुरक्षा चिंताएं: हॉस्टल से बाहर निकलने पर छात्राओं को लड़कों द्वारा छेड़छाड़ का सामना करना पड़ता है, जिसके चलते हॉस्टल परिसर के आसपास CCTV कैमरे लगाने की मांग की गई।
विस्तार से जानें समस्याओं को:
खाने की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
छात्राओं का आरोप था कि हॉस्टल में परोसे जाने वाले खाने में सिर्फ कीड़े ही नहीं, बल्कि प्लास्टिक और सिगरेट के टुकड़े तक मिले हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की भावनगर जिला इकाई की अध्यक्ष दीपिका कचोट ने इन आरोपों को दोहराते हुए कहा कि यह खाद्य सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन है। छात्राओं ने बताया कि रोज आलू की सब्जी मिलना, सब्जियों में तेल और पानी का अधिक इस्तेमाल, और इतनी सख्त रोटियां कि उन्हें तोड़ना भी मुश्किल होता है, जैसी बातें सामान्य हैं। खीर में अजीब गंध आना और छाछ का बहुत ज्यादा पानी वाला होना भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था।
पानी की किल्लत और स्वास्थ्य जोखिम
पानी की समस्या छात्राओं के लिए एक बड़ा संकट बन गई है। 1200 महिलाओं के लिए सिर्फ एक घंटे पानी मिलना, वो भी केवल निचली मंजिलों तक, अकल्पनीय है। छात्राओं को दूसरे फ्लोर से पानी लाकर अपनी ज़रूरतें पूरी करनी पड़ती हैं। इससे भी बढ़कर, हॉस्टल के पानी का रंग कई बार हरा दिखाई देता है, और इसे पीने से कई छात्राएं बीमार पड़ चुकी हैं। यह साफ तौर पर स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी है।
वार्डन का अनुचित व्यवहार और शिकायतों की अनदेखी
एक छात्रा ने बताया कि जब उन्होंने वार्डन से घर जाने की अनुमति मांगी, तो वार्डन ने उनके साथ बुरा बर्ताव किया। इसके अलावा, खाने में कीड़े मिलने जैसी गंभीर शिकायतों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसी स्थिति में छात्राएं अपने अधिकारों और कल्याण को लेकर और भी असुरक्षित महसूस करती हैं।
सुरक्षा चिंताएं और CCTV की मांग
हॉस्टल के बाहर छात्राओं को छेड़छाड़ का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं। ABVP अध्यक्ष ने इस समस्या को उजागर करते हुए हॉस्टल परिसर के आसपास CCTV कैमरे लगाने की मांग की, ताकि छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पहले भी हुए थे विरोध प्रदर्शन
यह कोई पहली बार नहीं था जब छात्राओं ने अपनी मांगों को लेकर विरोध किया। इससे पहले 11 अगस्त को भी खाने की गुणवत्ता, साफ-सफाई, पानी की पर्याप्त आपूर्ति और हॉस्टल वार्डन के खराब व्यवहार के खिलाफ प्रदर्शन किया गया था। यह दर्शाता है कि ये समस्याएं लंबे समय से चली आ रही हैं और उन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा था।
प्रशासन का हस्तक्षेप और आगे की राह
विरोध प्रदर्शन के बाद, डिप्टी कलेक्टर ने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इस आश्वासन के बाद अगले दिन प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया। हालांकि, यह देखना होगा कि प्रशासन इन समस्याओं का स्थायी समाधान कब तक निकाल पाता है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि छात्रों के कल्याण और उनके अधिकारों की रक्षा करना किसी भी शैक्षिक संस्थान और प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।