पहाड़ी पर पढ़ाई, NEET में सफलता: ओडिशा की यज्ञसेनी और दिव्यसेनी की प्रेरणादायक कहानी

संघर्ष से सफलता की नई मिसाल: ओडिशा की यज्ञसेनी और दिव्यसेनी

ओडिशा के मयूरभंज जिले के कपतिपदा ब्लॉक स्थित महुलापंखा गांव की दो बहनों, यज्ञसेनी और दिव्यसेनी खतुआ ने NEET परीक्षा में सफलता हासिल कर पूरे देश को प्रेरित किया है। यह कहानी सिर्फ परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि अदम्य साहस, लगन और चुनौतियों को पार करने की है, जहाँ उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए हर संभव प्रयास किया।

मोबाइल नेटवर्क की चुनौती और पहाड़ों पर पढ़ाई

आज के डिजिटल युग में जहाँ ऑनलाइन पढ़ाई आम बात है, वहीं महुलापंखा गांव में मोबाइल नेटवर्क की भारी कमी इन बहनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। ऑनलाइन क्लास अटेंड करना या स्टडी मटेरियल डाउनलोड करना उनके लिए लगभग असंभव था। लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी। प्रतिदिन, दोनों बहनें अपनी किताबें और मोबाइल लेकर पास की पहाड़ियों पर चढ़ जाती थीं, सिर्फ एक अच्छी नेटवर्क कनेक्टिविटी की तलाश में। जहाँ भी उन्हें थोड़ा-सा सिग्नल मिल जाता, वे वहीं बैठकर घंटों पढ़ाई करती थीं, चाहे मौसम कोई भी हो। उनकी यह लगन वास्तव में काबिले तारीफ है।

सीमित संसाधन, असीमित संकल्प: सेल्फ-स्टडी से NEET क्रैक

यज्ञसेनी और दिव्यसेनी के पिता गौरांग खतुआ एक किसान हैं और मां सुनीता आंगनबाड़ी सहायिका। परिवार की सीमित आय के कारण NEET की महंगी कोचिंग फीस चुकाना उनके लिए संभव नहीं था। ऐसे में, इन बहनों ने सेल्फ-स्टडी और इंटरनेट पर उपलब्ध मुफ्त संसाधनों को अपना हथियार बनाया। दिव्यसेनी ने अपने पहले प्रयास में ही NEET क्लियर कर लिया, जबकि बड़ी बहन यज्ञसेनी ने तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की। यह दर्शाता है कि सही दिशा और कड़ी मेहनत से बिना महंगी कोचिंग के भी सफलता प्राप्त की जा सकती है।

भारत में डिजिटल डिवाइड और ग्रामीण शिक्षा का भविष्य

यज्ञसेनी और दिव्यसेनी की कहानी सिर्फ उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत में मौजूद ‘डिजिटल डिवाइड’ की एक मार्मिक तस्वीर भी पेश करती है। दूरसंचार विभाग (DoT) के आंकड़ों के अनुसार, देश के सैकड़ों गांवों, विशेषकर पहाड़ी, आदिवासी और घने जंगलों वाले इलाकों में आज भी मोबाइल नेटवर्क या तो बेहद कमजोर है या अनुपस्थित है। केंद्र सरकार की भारतनेट परियोजना, जो 2011 में शुरू हुई थी, का लक्ष्य ग्रामीण भारत को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट से जोड़ना है। यह दुनिया की सबसे बड़ी ग्रामीण दूरसंचार पहल है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसका असर अभी भी पूरी तरह से नहीं दिख रहा है। इन बहनों का पहाड़ियों पर जाकर पढ़ाई करना इसी फासले को उजागर करता है और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता पर बल देता है।

प्रेरणा का स्रोत: दृढ़ संकल्प और कठिनाइयों पर विजय

यज्ञसेनी और दिव्यसेनी खतुआ की यह कहानी उन लाखों छात्रों के लिए एक प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों और बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यह हमें सिखाती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा हमें अपने लक्ष्य तक पहुँचने से नहीं रोक सकती। उनकी लगन, धैर्य और शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण ने यह साबित कर दिया है कि सच्ची मेहनत और सही दिशा में किया गया प्रयास निश्चित रूप से रंग लाता है।

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