MPSC परीक्षा धांधली: छात्रों का आक्रोश और पारदर्शी भर्ती प्रणाली की मांग

MPSC परीक्षा धांधली: छात्रों का आक्रोश और पारदर्शी भर्ती प्रणाली की मांग

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) में भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। सरकारी नौकरियों में भर्ती की निष्पक्षता और पारदर्शिता की कमी ने हजारों उम्मीदवारों को सड़कों पर उतरने पर मजबूर कर दिया है। यह आंदोलन अब सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की पूरी भर्ती प्रणाली में सुधार की मांग बन चुका है।

MPSC भर्ती धांधली: क्या है पूरा मामला?

इस पूरे आंदोलन की जड़ में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित कई भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताएं हैं। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा पैटर्न में गड़बड़ी, कुछ पदों में कटौती और सबसे महत्वपूर्ण, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी ने उनके भविष्य को दांव पर लगा दिया है।

ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा पेपर लीक: आंदोलन की मुख्य वजह

MPSC ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर, ग्रुप-B पद के लिए 22 मार्च 2026 को हुई भर्ती परीक्षा को पेपर लीक के बाद रद्द कर दिया था। इस परीक्षा के परिणाम जुलाई में जारी हुए थे और इंटरव्यू भी हो चुके थे। क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि गौरव राजेंद्र पाटिल नामक एक आरोपी ने अपनी पूर्व प्रेमिका ऋतुजा पाटिल के जरिए पेपर हासिल किया था। ऋतुजा ने यह पेपर अपने पिता के माध्यम से एक कोचिंग इंस्टीट्यूट के मालिक प्रवीण पाटिल से 5 लाख रुपए में खरीदा था। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि ऋतुजा ने जानबूझकर कम सवालों के जवाब दिए ताकि किसी को शक न हो।

इस कथित पेपर लीक के खुलासे और परीक्षा रद्द होने की खबर ने छात्रों के बीच बड़े पैमाने पर गुस्सा पैदा कर दिया। छात्रों का कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि पूरी भर्ती और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल है।

आंदोलन ने पकड़ा जोर: प्रमुख घटनाक्रम

  • 5 सितंबर 2026: अमरावती में MPSC उम्मीदवारों ने सड़कों पर उतरकर जिला प्रशासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। हजारों छात्रों ने MPSC अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग की और कार्रवाई न होने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी।
  • 6 सितंबर 2026: छात्र और प्रतियोगी परीक्षा से जुड़े शिक्षकों ने NCP(SP) विधायक रोहित पवार के माध्यम से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने अपनी शिकायतें रखीं और MPSC अध्यक्ष पर कार्रवाई की मांग की। छात्रों ने स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, जब तक दोषियों पर कार्रवाई और व्यापक सुधार नहीं होते, आंदोलन जारी रहेगा।
  • 7 सितंबर 2026: पुणे में ओंकारेश्वर चौक से हजारों उम्मीदवारों ने एक विशाल मार्च निकाला। इस मार्च में सांसद सुप्रिया सुले भी शामिल हुईं और उन्होंने छात्रों की मांगों का समर्थन किया। छात्रों ने MPSC अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर नारे लगाए और तख्तियां प्रदर्शित कीं। यह दिन आंदोलन का सबसे बड़ा प्रदर्शन साबित हुआ।

सरकार का रुख और उच्च स्तरीय समिति का गठन

छात्रों के बढ़ते दबाव और व्यापक असंतोष के बाद सरकार ने भर्ती परीक्षा प्रणाली की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने का फैसला किया। इस समिति का मुख्य कार्य भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा बढ़ाना, प्रक्रिया में सुधार लाना और छात्र, शिक्षक व अभिभावकों से सुझाव लेना होगा।

पुणे कलेक्टर कार्यालय में 7 से 10 सितंबर तक छात्रों और नागरिकों से सुझाव लेने के लिए एक विशेष सेल भी बनाया गया। समिति ने 12 सितंबर को पुणे विश्वविद्यालय में छात्रों से सीधे बातचीत करने की योजना भी बनाई है।

भविष्य की उम्मीद: पारदर्शी व्यवस्था की दरकार

MPSC छात्रों का यह आंदोलन महाराष्ट्र में एक निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रणाली की स्थापना के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य के उम्मीदवारों के लिए भी एक सुरक्षित और विश्वसनीय परीक्षा वातावरण सुनिश्चित करेगा, जहां योग्यता को प्राथमिकता मिले और भ्रष्टाचार की कोई जगह न हो। यह देखना होगा कि सरकार द्वारा गठित समिति और उठाए गए कदम छात्रों की अपेक्षाओं पर कितने खरे उतरते हैं।

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