लखनऊ के प्रणव भास्कर तिवारी: चेवनिंग स्कॉलरशिप से लंदन तक, UP के लिए तकनीक क्रांति का सपना

लखनऊ के प्रणव भास्कर तिवारी ने एक असाधारण उपलब्धि हासिल की है, जिससे कई युवाओं को प्रेरणा मिल सकती है। उन्हें प्रतिष्ठित चेवनिंग-भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी उत्तर प्रदेश राज्य सरकार छात्रवृत्ति के लिए चुना गया है, जिसकी कीमत लगभग 83 लाख रुपये है। इस छात्रवृत्ति के तहत, प्रणव लंदन के प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) में विकास, तकनीक और नवाचार नीति में लोक प्रशासन की परास्नातक (मास्टर्स) की पढ़ाई करेंगे।

कानून से तकनीक नीति की ओर का सफर

प्रणव भास्कर तिवारी ने अपने करियर की शुरुआत कानून के क्षेत्र से की थी। एक प्रथम पीढ़ी के वकील के रूप में, उन्होंने कानून की पढ़ाई और वकालत में अनुभव प्राप्त किया। हालांकि, उनकी रुचि जल्द ही उभरती हुई तकनीकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में बढ़ी। इस बदलाव ने उन्हें तकनीक नीति के विशेषज्ञ बनने की दिशा में प्रेरित किया। अमेज़न वेब सर्विसेज के साथ काम करते हुए, प्रणव को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल नीति और नई तकनीकों से संबंधित विषयों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मिला। यूसीएल में अपनी पढ़ाई के दौरान, वे तकनीक, नवाचार और सार्वजनिक नीति के बीच के गहरे संबंधों को और अधिक समझेंगे।

माता-पिता की प्रेरणा और अटूट विश्वास

प्रणव की इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता, गीता तिवारी और ओम प्रकाश भास्कर का अथक योगदान है। बचपन में जब उन्हें लखनऊ के ला मार्टिनियर स्कूल में प्रवेश नहीं मिला था, तब उनकी माँ ने लगभग छह महीने तक लगातार प्रयास किए। उनके पिता ने भी सीमित आर्थिक संसाधनों और औसत अकादमिक अंकों को कभी बच्चों के भविष्य की राह में बाधा नहीं बनने दिया। परिवार में शिक्षा को लेकर इस सकारात्मक सोच ने प्रणव और उनके भाइयों को हमेशा आगे बढ़ने का हौसला दिया। प्रणव कहते हैं, “मेरी माँ ने मुझे ‘अटल’ रहना सिखाया और पिता ने यह भरोसा दिया कि परिस्थितियाँ या अंक आपका भविष्य तय नहीं करते। मैं अपने माता-पिता के अथक प्रयासों का ही परिणाम हूँ, इसलिए हाथ पर हाथ रखकर बैठना मुझे शोभा नहीं देता।”

उत्तर प्रदेश और भारत के लिए एक बड़ा सपना

प्रणव इस चेवनिंग छात्रवृत्ति को सिर्फ विदेश में पढ़ाई का अवसर नहीं मानते, बल्कि इसे उत्तर प्रदेश से मिले अवसरों को वैश्विक अनुभव से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम समझते हैं। उनका अंतिम लक्ष्य अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत लौटना और उत्तर प्रदेश के तकनीकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े तंत्र को मजबूत करने में सक्रिय योगदान देना है। वह दृढ़ता से कहते हैं, “लंदन जाना एक उपलब्धि हो सकती है, लेकिन असली सफलता तब होगी जब वहाँ की सीख और अनुभव वापस उत्तर प्रदेश और पूरे भारत के काम आए।” प्रणव की यह कहानी दर्शाती है कि कड़ी मेहनत, परिवार का समर्थन और एक स्पष्ट लक्ष्य कैसे व्यक्ति को ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।

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