मेडिकल इंटर्न स्टाइपेंड: देशभर में बढ़ते विरोध प्रदर्शन और उनके अधिकार

देशभर के मेडिकल इंटर्न्स का संघर्ष: क्यों जरूरी है उचित स्टाइपेंड?

देशभर के मेडिकल और पैरामेडिकल इंटर्न्स अपने अधिकारों और उचित स्टाइपेंड की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड तक, ये युवा डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी बेहतर वेतन और काम की उचित परिस्थितियों की मांग कर रहे हैं। इस लेख में हम इन विरोध प्रदर्शनों की गहराई से पड़ताल करेंगे, इंटर्न्स की मांगों को समझेंगे और यह भी जानेंगे कि भारत में मेडिकल इंटर्न्स के स्टाइपेंड को लेकर कानून क्या कहता है।

आंध्र प्रदेश में पैरामेडिकल इंटर्न्स का प्रदर्शन: 12 घंटे की शिफ्ट, कोई स्टाइपेंड नहीं

हाल ही में आंध्र प्रदेश के तिरुपति में पैरामेडिकल इंटर्न्स ने स्टाइपेंड की मांग को लेकर धरना दिया। आंध्र मेडिकल कॉलेज, विशाखापत्तनम और एसवी मेडिकल कॉलेज, तिरुपति जैसे कई सरकारी मेडिकल कॉलेज भी इस विरोध में शामिल हुए। इन इंटर्न्स, जिनमें एमएलटी (MLT) और हेल्थ साइंस के छात्र शामिल हैं, को कोई नियमित या आधिकारिक स्टाइपेंड नहीं मिलता। वे बिना किसी वेतन के 12 घंटे की लंबी शिफ्ट करने को मजबूर हैं और मासिक ₹15,000 के स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं। इस दौरान पुलिस द्वारा एक प्रदर्शनकारी छात्रा को बालों से खींचते हुए का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया।

मध्य प्रदेश में मेडिकल इंटर्न्स का संघर्ष और जीत

कुछ समय पहले मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी एमबीबीएस (MBBS) इंटर्न डॉक्टर्स ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान उन पर वाटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल किया गया था, जिसका इंटर्न्स ने कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि वे अपराधी नहीं, बल्कि डॉक्टर हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले में जांच के निर्देश दिए थे। प्रदर्शन के बाद, इंटर्न्स की मांगें मान ली गईं और उनका स्टाइपेंड ₹14,337 से बढ़ाकर ₹21,500 कर दिया गया। इंदौर में भी इंटर्न डॉक्टरों ने भोपाल की घटना के विरोध में रैली निकाली, जिसमें इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टर एकजुट हुए।

जम्मू-कश्मीर में अनिश्चितकालीन हड़ताल और भूख हड़ताल

जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस (BDS) इंटर्न्स 31 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। राज्य के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों और दो डेंटल कॉलेजों के इंटर्न्स ने बढ़े हुए स्टाइपेंड की मांग को लेकर 7 सितंबर से 48 घंटे की भूख हड़ताल भी शुरू की। उनका कहना है कि जब तक सरकार की ओर से स्टाइपेंड को लेकर आधिकारिक आदेश जारी नहीं हो जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वे पहले भी 2023 में इस मुद्दे पर सिफारिश कर चुके हैं और अब सिर्फ बातचीत से संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

उत्तराखंड में 600 इंटर्न्स का विरोध प्रदर्शन

उत्तराखंड में भी लगभग 600 एमबीबीएस इंटर्न्स अपने स्टाइपेंड को ₹17,000 से बढ़ाकर ₹30,000 करने की मांग कर रहे हैं। इस आंदोलन में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी; वीसीएसजी मेडिकल कॉलेज/इंस्टीट्यूट, श्रीनगर; गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून; और सोबन सिंह जीना मेडिकल साइंसेज संस्थान, अल्मोड़ा के छात्र शामिल हैं। इन इंटर्न्स ने ओपीडी (OPD) और वार्ड ड्यूटी का बहिष्कार किया है, हालांकि इमरजेंसी ड्यूटी वाले इंटर्न अभी भी मरीजों का इलाज कर रहे हैं। ‘वॉइस ऑफ इंटर्न्स – उत्तराखंड’ के बैनर तले यह आंदोलन चल रहा है। इसके अलावा, राज्य के करीब 600 पीजी रेजिडेंट डॉक्टर भी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर काली पट्टी बांधकर विरोध कर रहे हैं। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने स्टाइपेंड संशोधन का प्रस्ताव तैयार करने और मेडिकल कॉलेजों से रिपोर्ट मांगने की बात कही है।

मेडिकल इंटर्न्स के स्टाइपेंड को लेकर भारत का कानून क्या कहता है?

यह जानना महत्वपूर्ण है कि भारत में एमबीबीएस मेडिकल इंटर्न्स को स्टाइपेंड देना केवल कॉलेज की इच्छा पर निर्भर नहीं करता है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के "अनिवार्य रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप विनियम 2021" (Compulsory Rotating Medical Internship Regulations 2021 – CRMI) में स्टाइपेंड का स्पष्ट प्रावधान है। इन विनियमों के तहत, CRMI विनियम 2021 के शेड्यूल-IV, क्लॉज 3(a) के अनुसार, सभी इंटर्न्स को संबंधित संस्थान, विश्वविद्यालय या राज्य की सक्षम प्राधिकरण द्वारा तय स्टाइपेंड दिया जाना अनिवार्य है। इसका मतलब है कि इंटर्न्स को स्टाइपेंड मिलना उनका कानूनी अधिकार है।

निष्कर्ष

देशभर में मेडिकल और पैरामेडिकल इंटर्न्स का यह व्यापक आंदोलन भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के एक महत्वपूर्ण पहलू को उजागर करता है। उचित स्टाइपेंड और सम्मानजनक कामकाजी परिस्थितियां न केवल इंटर्न्स के मनोबल के लिए आवश्यक हैं, बल्कि भविष्य के चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के कल्याण के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। सरकार और संबंधित अधिकारियों को इन मांगों पर गंभीरता से विचार करना होगा और कानून के प्रावधानों का पालन करते हुए जल्द से जल्द समाधान प्रदान करना होगा ताकि ये युवा पेशेवर बिना किसी चिंता के देश की सेवा कर सकें।

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