शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी बदलावों को अपनाते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और एनसीईआरटी (NCERT) ने एक ऐतिहासिक पहल की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत अब स्कूली शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (CT) को अनिवार्य रूप से शामिल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य की डिजिटल दुनिया और तकनीकी चुनौतियों के लिए शुरुआत से ही तैयार करना है।
कक्षा 3 से 8 तक के लिए नया पाठ्यक्रम
छात्रों में शुरुआती कक्षाओं से ही तार्किक सोच और तकनीकी कौशल विकसित करने के लिए CBSE ने कक्षा 3 से 8 तक कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और AI का नया कोर्स लागू किया है:
- कक्षा 3 से 5: इन कक्षाओं में AI को अलग से कोई विषय नहीं बनाया गया है, बल्कि इसे गणित और ‘द वर्ल्ड अराउंड अस’ (TWAU) जैसे विषयों के साथ जोड़ा गया है। इसे गेम्स, पहेलियों (Puzzles) और एक्टिविटीज के जरिए पढ़ाया जा रहा है।
- निर्धारित समय: इस आयु वर्ग के लिए शैक्षणिक वर्ष में लगभग 50 घंटे तय किए गए हैं। इससे बच्चे खेल-खेल में कोडिंग, डेटा साइंस और डिजिटल तकनीक से रूबरू हो सकेंगे।
कक्षा 9 से 12 के लिए स्पेशल एक्टिविटी-बेस्ड मॉड्यूल
माध्यमिक और उच्च माध्यमिक कक्षाओं के लिए NCERT ने 20 घंटे का एक विशेष एक्टिविटी-बेस्ड मॉड्यूल लॉन्च किया है। इस पाठ्यक्रम की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- विशेषज्ञों द्वारा तैयार: इस मॉड्यूल को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे IIT मद्रास, IIT जोधपुर और NCERT के विशेषज्ञों ने मिलकर तैयार किया है।
- कार्यान्वयन: कक्षा 9 के छात्रों के लिए यह मॉड्यूल पढ़ना अनिवार्य किया गया है, जबकि कक्षा 10 के स्टूडेंट्स अपनी पुरानी व्यवस्था के अनुसार पढ़ाई जारी रखेंगे। वहीं, कक्षा 11 और 12 के लिए भी संबंधित विषयों के मॉड्यूल तैयार हैं।
- परीक्षा और मूल्यांकन: राहत की बात यह है कि इस विषय की कोई अलग से बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर ही किया जाएगा।
बिना इंटरनेट वाले स्कूलों के लिए अनप्लग मोड (Unplugged Mode)
देश के सभी स्कूलों में एक जैसी तकनीकी सुविधाएं न होने के कारण, CBSE ने इसका अनूठा समाधान निकाला है। जिन स्कूलों में कंप्यूटर या इंटरनेट की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां शिक्षक पेपर वर्क और ग्रुप डिस्कशन के जरिए ‘अनप्लग मोड’ में छात्रों को AI की शिक्षा दे सकेंगे। इसके अलावा, छात्रों को अपनी प्रैक्टिकल एक्टिविटीज दर्ज करने के लिए एक विशेष ‘क्यूरियस नोटबुक’ (Curious Notebook) बनानी होगी।
निष्कर्ष
स्कूल स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग की शुरुआत भारत के शैक्षिक ढांचे में एक क्रांतिकारी कदम है। यह पहल न केवल विद्यार्थियों को कोडिंग और डेटा साइंस जैसी आधुनिक तकनीकों से परिचित कराएगी, बल्कि भविष्य में उन्हें ग्लोबल जॉब मार्केट और AI-संचालित करियर के लिए भी मजबूत आधार प्रदान करेगी।