दिल्ली यूनिवर्सिटी में हिंदी पीएचडी एडमिशन विवाद: इंटरव्यू शेड्यूल रद्द और नया अपडेट

दिल्ली यूनिवर्सिटी हिंदी पीएचडी एडमिशन विवाद

दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने हाल ही में हिंदी पीएचडी एडमिशन के लिए जारी किए गए नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया है। यह फैसला छात्रों के भारी विरोध और आपत्ति के बाद लिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया में कम समय दिए जाने और शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों की संख्या को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, जिसके चलते अकादमिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

छात्रों का विरोध और एडमिशन प्रक्रिया पर सवाल

यूनिवर्सिटी द्वारा 27 अक्टूबर को एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था, जिसमें उम्मीदवारों को अगले ही दिन यानी 28 अक्टूबर को सुबह 9:15 बजे कॉलेज में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया था। शेड्यूल घोषित होने के कुछ ही घंटों बाद इंटरव्यू की यह प्रक्रिया शुरू होनी थी, जिस पर छात्रों ने कड़ा ऐतराज जताया।

  • समय की कमी: इंटरव्यू की सूचना और रिपोर्टिंग टाइम के बीच बहुत कम समय था, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाले छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता।
  • सीटों और उम्मीदवारों की संख्या में अंतर: 150 से अधिक सीटें उपलब्ध होने के बावजूद, इंटरव्यू के लिए केवल चुनिंदा आवेदकों को ही शॉर्टलिस्ट किया गया था।
  • छात्र संगठनों की मांग: ABVP और अन्य छात्र संगठनों ने मांग की है कि NET पास करने वाले सभी योग्य उम्मीदवारों को इंटरव्यू में शामिल होने का उचित अवसर मिलना चाहिए।

जेएनयू (JNU) पीएचडी एडमिशन विवाद

दिल्ली यूनिवर्सिटी के अलावा जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में भी पीएचडी एडमिशन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और ABVP ने आरक्षण नियमों और चयन सूची में विसंगतियों का आरोप लगाया है।

आरक्षण और सीटों को लेकर आरोप

SFI का दावा है कि JNU में उपलब्ध कुल 711 पीएचडी सीटों में एससी, एसटी और दिव्यांग वर्ग के लिए तय आरक्षण नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया है। संगठन के अनुसार:

  • एसटी वर्ग: निर्धारित 7.5% आरक्षण के मुकाबले एसटी वर्ग को लगभग 5.34% (38 सीटें) ही दी गई हैं, जो तय कोटे से कम हैं।
  • एससी वर्ग: 15% आरक्षण के मुकाबले एससी वर्ग के लिए 14.49% (103 सीटें) सीटें ही प्रदर्शित की गईं।

छात्र संगठन अब पूरी चयन प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं ताकि सभी योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिल सके।

निष्कर्ष

फिलहाल दिल्ली यूनिवर्सिटी में हिंदी पीएचडी के इंटरव्यू को अगले आदेश तक टाल दिया गया है और छात्र नए नोटिफिकेशन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह विवाद देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और छात्र-हितैषी नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उम्मीद है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द ही स्थिति स्पष्ट करते हुए एक नया और पारदर्शी शेड्यूल जारी करेगा।

Scroll to Top