सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र को बेहतर बनाने और छात्रों पर से पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ कम करने के लिए एक नया सर्कुलर जारी किया है। इस सर्कुलर के माध्यम से CBSE Syllabus Change की घोषणा की गई है, जो मुख्य रूप से कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों की ‘स्कीम ऑफ स्टडीज’ (Scheme of Studies) से संबंधित है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत उठाए
गए इस कदम का उद्देश्य छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक और प्रोफेशनल स्किल्स से लैस करना है। आइए विस्तार से जानते हैं कि सीबीएसई के इस नए बदलाव से छात्रों की पढ़ाई पर क्या असर पड़ेगा।
कक्षा 9वीं और 10वीं के पाठ्यक्रम में क्या हुए हैं बदलाव?
बोर्ड द्वारा जारी नए नियमों के अनुसार, अब कक्षा 10वीं के पाठ्यक्रम से ‘एनवायरमेंटल एजुकेशन’ विषय को हटा दिया गया है। वहीं, कक्षा 9वीं के सिलेबस से ‘इंडिविजुअल्स इन सोसाइटी’, ‘कंप्यूटेशनल थिंकिंग’ और ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ के कुछ मॉड्यूल्स को हटाया गया है। हालांकि, छात्रों को यह स्पष्ट कर दें कि जो छात्र शैक्षणिक वर्ष 2026-27 में कक्षा 10वीं में पढ़ रहे हैं, उन पर ये नए नियम लागू नहीं होंगे; वे अपने पुराने पाठ्यक्रम के अनुसार ही पढ़ाई जारी रखेंगे। नई योजना के तहत अब छात्रों को कुल 9 अनिवार्य विषय पढ़ने होंगे, जिसमें वोकेशनल एजुकेशन को भी शामिल किया गया है।
पासिंग क्राइटेरिया और मार्किंग सिस्टम
- अनिवार्य विषय और अंक: दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में पास होने के लिए दोनों मुख्य भाषाओं, गणित (Maths), विज्ञान (Science) और सामाजिक विज्ञान (Social Science) में अलग-अलग 33% अंक लाना अनिवार्य होगा। इसमें लिखित परीक्षा और आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) दोनों के अंक जोड़े जाएंगे।
- विषय बदलने का विकल्प: यदि कोई छात्र मैथ्स, साइंस या सोशल साइंस में से किसी एक विषय में फेल हो जाता है, लेकिन उसने स्किल सब्जेक्ट की बोर्ड परीक्षा पास कर ली है, तो फेल हुए विषय को स्किल विषय से बदला जा सकता है।
- ग्रेडिंग सिस्टम: आंतरिक मूल्यांकन वाले विषयों में 33 से 40 अंक पाने वाले छात्रों को ‘D’ ग्रेड और 33 से कम अंक पाने पर ‘E’ ग्रेड मिलेगा। ‘D’ या उससे बेहतर ग्रेड पाने वाले विद्यार्थियों को स्कूल द्वारा प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
ऑप्शनल और एडवांस लेवल विषयों का चयन
छात्रों की रुचि को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने कई नए विकल्प जोड़े हैं:
- 57 ऑप्शनल सब्जेक्ट्स: कक्षा 9वीं और आगामी 2028 की कक्षा 10वीं के छात्र अपनी रुचि के अनुसार लैंग्वेज, कंप्यूटर एप्लीकेशन, होम साइंस, पेंटिंग, संगीत और बिजनेस से जुड़े कुल 57 वैकल्पिक विषयों में से किसी एक का चयन कर सकते हैं।
- एडवांस लेवल मैथ्स और साइंस: अब छात्रों के पास मुख्य विषयों के तौर पर ‘एडवांस लेवल मैथ्स’ और ‘एडवांस लेवल साइंस’ चुनने का भी विकल्प होगा। जो छात्र भविष्य में इंजीनियरिंग या वैज्ञानिक अनुसंधान (Scientific Research) के क्षेत्र में जाना चाहते हैं, उनके लिए यह बेहद मददगार साबित होगा।
- स्किल एजुकेशन के नए विकल्प: बोर्ड ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर और डिजाइन थिंकिंग एंड इनोवेशन को स्किल एजुकेशन के नए विकल्पों के रूप में जोड़ा है।
निष्कर्ष
सीबीएसई का यह नया कदम छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक क्रांतिकारी बदलाव है। वोकेशनल और प्रैक्टिकल एजुकेशन को अनिवार्य करने से छात्रों में कौशल विकास होगा, जिससे वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे। स्टूडेंट्स और टीचर्स को सलाह दी जाती है कि वे बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर नए सर्कुलर का पूरा विवरण जरूर पढ़ें।