आदित्य कुमार: बिहार छात्र आंदोलन का 6 साल का नन्हा योद्धा

आदित्य कुमार: बिहार छात्र आंदोलन का 6 साल का नन्हा योद्धा

हाल ही में, पटना में हुए BPSC TRE-4 प्रदर्शनों के दौरान एक 6 साल के बच्चे का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। यह बच्चा कोई और नहीं, बल्कि पहली कक्षा का छात्र आदित्य कुमार है, जिसने अपनी बेबाक बातों और दृढ़ संकल्प से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। आदित्य की कहानी सिर्फ एक प्रदर्शनकारी बच्चे की नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों, संवैधानिक मूल्यों और विरोध प्रदर्शन की शक्ति का प्रतीक बन गई है।

पुलिस हिरासत और आदित्य के आरोप

25 अगस्त को प्रदर्शन के दौरान आदित्य और उसके माता-पिता को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था। आदित्य का आरोप है कि थाने में पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। उसने यह भी दावा किया कि BPSC आंदोलन के दौरान उसे करीब आठ घंटे तक अवैध तरीके से थाने में रखा गया और इस दौरान उसे अपने माता-पिता से मिलने नहीं दिया गया।

संविधान और दशरथ मांझी का उदाहरण

गर्दनीबाग धरना स्थल पर आदित्य को हाथों में अंग्रेजी में लिखी भारतीय संविधान की किताब लिए देखा गया। उसने बताया कि वह संविधान पढ़ रहा है और संविधान के अनुसार ही अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। अपनी बात में दम भरते हुए, आदित्य ने ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी का उदाहरण दिया। उसने कहा, “जैसे मांझी ने पहाड़ का घमंड तोड़ा, वैसे ही मैं सरकार का घमंड तोड़ूंगा।” यह कथन उसकी दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री से शिकायत और राजनीतिक समर्थन

आदित्य ने अपनी इस आपबीती के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय मांगा है, ताकि वह पटना पुलिस की शिकायत कर सके। हालांकि, इस मामले में वह पहले ही बिहार के डीजीपी से शिकायत कर चुका है। इस पूरे मामले में आदित्य को उसके पिता जितेंद्र कुमार और मां मुन्नी कुमारी के अलावा, शिवनंदन भारती जैसे कुछ वकीलों का भी समर्थन मिला।

31 अगस्त की देर रात, लोकसभा सांसद पप्पू यादव आदित्य से मिलने पहुंचे और उनका धरना समाप्त करवाया। पप्पू यादव ने दावा किया कि वे राहुल गांधी का संदेश लेकर आए हैं और राहुल गांधी स्वयं आदित्य से मिलने आएंगे। उन्होंने आदित्य के परिवार के साथ हुए व्यवहार को गलत बताते हुए कहा कि न्याय के लिए पटना हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाएगा।

पहले भी आंदोलनों में सक्रिय रहा है आदित्य

यह पहली बार नहीं है जब आदित्य किसी प्रदर्शन या आंदोलन में शामिल हुआ है। वह पहले भी अपनी बेबाक बातों के लिए सुर्खियों में रहा है:

  • उसने बिहार छात्र आंदोलन में माइक के सामने छात्रों के समर्थन में बात की थी।
  • मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (वर्तमान उप-मुख्यमंत्री) से युवाओं के लिए नौकरी देने की मांग उठाई थी।
  • शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के इस्तीफे की भी मांग की थी।
  • एक बार तो वह हाथ में तिरंगा लेकर बस की छत पर चढ़ गया था और पुलिस से सवाल किया था, “आप सुरक्षा करते हैं या मर्डर करते हैं?” जिसके बाद पुलिस उसे ‘सुरक्षा’ के लिए थाने ले गई थी।
  • वह पेपर लीक और सिवान में AK-47 मामले को लेकर तेजस्वी यादव के लोकभवन मार्च में भी शामिल हो चुका है।
  • गर्दनीबाग में भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के बीच पहुंचकर उसने कहा था कि वह भी छात्र है और भविष्य में उसके साथ भी ऐसी समस्या हो सकती है।

एक नन्हे बच्चे की बड़ी आवाज़

आदित्य कुमार की कहानी हमें यह सिखाती है कि आवाज उठाने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती। एक 6 साल का बच्चा जब अपने अधिकारों के लिए, न्याय के लिए और संवैधानिक मूल्यों के लिए खड़ा हो सकता है, तो यह हमें बच्चों के अधिकारों और एक लोकतांत्रिक समाज में विरोध प्रदर्शन की स्वतंत्रता के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करता है। आदित्य एक ऐसा नाम बन गया है जो बिहार के छात्र आंदोलनों और युवाओं की आवाज़ को एक नई पहचान दे रहा है।

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