बच्चों से स्कूल की सफाई: शिक्षा के अधिकार का हनन और कानूनी प्रावधान

हाल ही में देश के कई सरकारी स्कूलों से ऐसे चौंकाने वाले वीडियो सामने आए हैं, जहाँ बच्चों से पढ़ाई के बजाय सफाई या अन्य शारीरिक काम करवाए जा रहे हैं। ये घटनाएँ न केवल बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं, बल्कि उनके शिक्षा के अधिकार का भी सीधा उल्लंघन हैं।

शहडोल, बिहार और मंडला में सामने आए मामले

मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के गोरतरा गाँव से एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें सरकारी प्राथमिक विद्यालय के बच्चे खतरनाक तरीके से छत और छज्जे पर जमी काई साफ करते दिख रहे थे। छत पर चढ़ने के लिए कोई सुरक्षित इंतजाम नहीं था, जिससे बच्चों की जान को खतरा हो सकता था। इसी तरह, बिहार के कोकला गाँव के मध्य विद्यालय में बच्चों को कुदाल से सफाई करते देखा गया, जबकि उनकी कक्षाएँ चल रही थीं। मध्य प्रदेश के मंडला जिले में भी एक प्राथमिक विद्यालय के बच्चे कक्षाओं और यहाँ तक कि शौचालयों की सफाई करते हुए पाए गए। एक और वीडियो में तो बच्चे स्कूल यूनिफॉर्म में मजदूरों के साथ मिलकर रेत उठाते हुए दिखाई दिए।

शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन: क्या कहता है RTE अधिनियम?

ये घटनाएँ शिक्षा के अधिकार (Right to Education – RTE) अधिनियम का सीधा उल्लंघन हैं। भारत के संविधान के तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है। RTE अधिनियम इसी अधिकार को सुनिश्चित करता है।

  • बच्चों को काम पर लगाना अपराध: इस अधिनियम के अनुसार, बच्चों को पढ़ाई के बजाय नियमित रूप से किसी भी काम में लगाना उनके शिक्षा के अधिकार के विरुद्ध है।
  • सुरक्षा का अभाव: सफाई जैसे कार्यों में बच्चों को बिना सुरक्षा के लगाना उनकी जान को जोखिम में डालता है, खासकर ऊँचाई पर या खतरनाक उपकरणों के साथ।
  • RTE अधिनियम की धारा 17: यदि बच्चों से स्कूल में काम करवाया जाता है, तो यह RTE अधिनियम की धारा 17 का उल्लंघन है, और ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। बच्चों को गलती की सजा के तौर पर भी स्कूल में काम नहीं करवाया जा सकता।

जांच और कार्रवाई की मांग

इन वीडियो के सामने आने के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों ने स्कूलों के खिलाफ नाराजगी जताई है। संबंधित विभागों, जैसे कि ट्राइबल डिपार्टमेंट और शिक्षा विभाग, ने मामलों का संज्ञान लिया है और जांच के आदेश दिए हैं। कुछ मामलों में तो शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं। यह गंभीर सवाल उठाता है कि जब स्कूलों में साफ-सफाई के लिए पर्याप्त धन आवंटित किया जाता है, तो फिर बच्चों से यह काम क्यों करवाया जाता है?

हमारी जिम्मेदारी: बच्चों के भविष्य की सुरक्षा

ये घटनाएँ देश में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती हैं। यह आवश्यक है कि स्कूल प्रशासन, अभिभावक और सरकारी अधिकारी मिलकर यह सुनिश्चित करें कि बच्चों को उनका पूरा ध्यान केवल पढ़ाई पर लगाने का मौका मिले। शिक्षा ही उनके बेहतर भविष्य की कुंजी है, न कि स्कूल की सफाई। हमें जागरूक रहना होगा और अपने बच्चों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं होने देना चाहिए।

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