भारत की शिक्षा व्यवस्था: UDISE+ और AISHE रिपोर्ट का विश्लेषण – स्कूल बंद, उच्च शिक्षा में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी

भारत की शिक्षा व्यवस्था: UDISE+ और AISHE रिपोर्ट का विश्लेषण – स्कूल बंद, उच्च शिक्षा में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी

शिक्षा किसी भी देश के विकास की नींव होती है। भारत की शिक्षा व्यवस्था को समझने के लिए, एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली (UDISE+) और अखिल भारतीय उच्चतर शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) की रिपोर्टें महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करती हैं। ये रिपोर्टें स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा, दोनों के अलग-अलग पहलुओं को उजागर करती हैं – जहाँ एक ओर स्कूलों के बंद होने की चिंताजनक स्थिति सामने आती है, वहीं दूसरी ओर उच्च शिक्षा में लड़कियों और वंचित वर्गों की बढ़ती भागीदारी एक सकारात्मक तस्वीर पेश करती है। आइए इन दोनों रिपोर्ट्स के प्रमुख बिंदुओं को विस्तार से समझते हैं।

भारत की स्कूली शिक्षा: एक चिंताजनक तस्वीर – UDISE+ रिपोर्ट

UDISE+ की रिपोर्ट भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली में कुछ गंभीर चुनौतियों की ओर इशारा करती है। यह रिपोर्ट बताती है कि देश में प्रतिदिन औसतन 13 स्कूल बंद हो रहे हैं। साल 2025-26 के दौरान देशभर में कुल 4,791 स्कूल बंद हुए, जो चिंता का विषय है।

मध्य प्रदेश में सर्वाधिक स्कूल बंद

स्कूल बंद होने के मामले में मध्य प्रदेश सबसे आगे है। देश में बंद हुए कुल स्कूलों में से आधे से भी अधिक (2,426) अकेले मध्य प्रदेश के हैं। इसके बाद तेलंगाना (1,392 स्कूल), पश्चिम बंगाल (568), आंध्र प्रदेश (474), तमिलनाडु (369), कर्नाटक (281) और हिमाचल प्रदेश (266) का स्थान आता है।

‘ज़ीरो एनरोलमेंट’ वाले स्कूल: छात्र नहीं, शिक्षक मौजूद

यह एक और हैरान करने वाला तथ्य है कि देश में ‘ज़ीरो एनरोलमेंट’ यानी बिना छात्रों वाले स्कूलों की संख्या में पहली बार गिरावट दर्ज की गई है। पिछले एक साल में ऐसे स्कूलों की संख्या 7,993 से घटकर 5,663 रह गई है। हालांकि, इन स्कूलों में अभी भी 20,667 शिक्षक कार्यरत हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए कोई छात्र नहीं मिलता।

  • पश्चिम बंगाल: यहां ऐसे स्कूलों की संख्या में 321 की बढ़ोतरी हुई है, जहाँ अब 4,133 स्कूलों में 19,502 शिक्षक हैं, पर पढ़ाने के लिए छात्र नहीं।
  • उत्तर प्रदेश: पिछले सत्र में बिना नामांकन वाले 81 स्कूल थे, जो अब बढ़कर 313 हो गए हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों की संख्या भी 56 से बढ़कर 177 हो गई है।
  • छत्तीसगढ़: 2024-25 में छत्तीसगढ़ में एक भी ‘ज़ीरो एनरोलमेंट’ वाला स्कूल नहीं था, लेकिन 2025-26 में ऐसे 149 स्कूल हो गए, जहाँ 140 शिक्षक तैनात हैं।

उच्च शिक्षा में क्रांति: AISHE रिपोर्ट से उम्मीद की किरण

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी AISHE की 2022-23 और 2023-24 की रिपोर्ट उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारत की प्रगति को दर्शाती है। यह रिपोर्ट कई मायनों में उत्साहजनक है, खासकर लड़कियों और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की बढ़ती भागीदारी को लेकर।

उच्च शिक्षा में लड़कियों का बढ़ता नामांकन: एक नया रिकॉर्ड

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात (GER) पहली बार बढ़कर 30 हो गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उच्च शिक्षा में लड़कियों का GER 31.2 दर्ज किया गया है, जो पुरुषों के GER से अधिक है। यह लगातार सातवां वर्ष है जब उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में अधिक रही है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

साल 2014-15 में महिलाओं का GER 22.9 था, जो 2023-24 में बढ़कर 31.2 हो गया है। जेंडर पैरिटी इंडेक्स (GPI) भी 2023-24 में 1.08 रहा है, जो महिला-पुरुष समानता की दिशा में बेहतर स्थिति का संकेत है।

वंचित वर्गों की उच्च शिक्षा तक बढ़ती पहुंच

AISHE रिपोर्ट बताती है कि सामाजिक रूप से वंचित वर्गों, जैसे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों की उच्च शिक्षा तक पहुंच में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

  • अनुसूचित जाति (SC) छात्र: इनका नामांकन 2014-15 के 46.07 लाख से बढ़कर 2023-24 में 69.72 लाख हो गया है।
  • अनुसूचित जनजाति (ST) छात्र: इनका नामांकन 16.41 लाख से बढ़कर 28.83 लाख पहुंच गया है।
  • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) छात्र: इनका नामांकन भी 1.13 करोड़ से बढ़कर 1.80 करोड़ हुआ है।

शिक्षक वर्ग में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की कुल संख्या 2023-24 में 17.32 लाख हो गई है, जिसमें 44.9% महिलाएं हैं। महिला शिक्षकों की संख्या 2014-15 के 5.69 लाख से बढ़कर 2023-24 में 7.78 लाख हो गई है, जो शिक्षा क्षेत्र में लैंगिक समानता की दिशा में एक और सकारात्मक कदम है।

निष्कर्ष

ये दोनों रिपोर्टें भारतीय शिक्षा प्रणाली की दोहरी तस्वीर प्रस्तुत करती हैं। जहाँ UDISE+ की रिपोर्ट स्कूली शिक्षा के बुनियादी ढांचे और पहुंच में सुधार की तत्काल आवश्यकता को दर्शाती है, विशेषकर स्कूल बंद होने और ‘ज़ीरो एनरोलमेंट’ वाले स्कूलों की समस्या को उजागर करती है, वहीं AISHE रिपोर्ट उच्च शिक्षा में एक सकारात्मक बदलाव की कहानी कहती है। उच्च शिक्षा में लड़कियों और वंचित वर्गों की बढ़ती भागीदारी, साथ ही महिला शिक्षकों की संख्या में वृद्धि, भारत के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करती है। इन चुनौतियों और सफलताओं को समझते हुए ही हम एक मजबूत और समावेशी शिक्षा प्रणाली का निर्माण कर सकते हैं।

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