बिहार छात्र आंदोलन: BPSC TRE 4.0 और प्रतियोगी परीक्षाओं में बदलाव की कहानी

बिहार छात्र आंदोलन: BPSC TRE 4.0 और प्रतियोगी परीक्षाओं में बदलाव की कहानी

हाल के दिनों में, बिहार में छात्र आंदोलनों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। दिल्ली और झारखंड में हुए प्रदर्शनों के बाद, पटना में प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षक भर्ती (BPSC TRE 4.0) में पारदर्शिता और सुधार की मांग को लेकर छात्रों का ‘स्टूडेंट जस्टिस सत्याग्रह’ आंदोलन चल रहा है। गर्दनीबाग धरना स्थल पर पिछले 13 दिनों से ‘ऑल Ph.D. होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार’ के बैनर तले उम्मीदवार अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं।

छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

यह आंदोलन कई महत्वपूर्ण मांगों को लेकर किया जा रहा है, जो बिहार के शिक्षा और रोजगार परिदृश्य को प्रभावित करती हैं:

  • सहायक प्राध्यापक बहाली में UGC Regulation 2018 के Table 3A को लागू करना: यह उन शोधकर्ताओं और Ph.D. धारकों के लिए एक महत्वपूर्ण मांग है जो उच्च शिक्षा में अवसर चाहते हैं।
  • बिहार में डोमिसाइल नीति प्रभावी करना: छात्रों की मांग है कि राज्य की नौकरियों में बिहार के मूल निवासियों को प्राथमिकता मिले।
  • 70वीं BPSC परीक्षा निरस्त करना: कुछ उम्मीदवारों का मानना है कि इस परीक्षा में अनियमितताएं हुई हैं।
  • शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) में सुधार: प्रारंभिक मांग TRE-4 के नोटिफिकेशन की थी, लेकिन अब यह बढ़कर 13 सूत्रीय मांगों में बदल गई है, जिसमें परीक्षा को एक चरण में कराने और नेगेटिव मार्किंग खत्म करने जैसी मांगें शामिल हैं।

कैसे बढ़ा यह आंदोलन?

जुलाई में बिहार में भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी को लेकर उम्मीदवारों का विरोध अलग-अलग जगह पर शुरू हुआ।

  • 14 जुलाई: BSSC कार्यालय के बाहर उम्मीदवारों ने प्रदर्शन किया और परीक्षा/भर्ती से जुड़ी मांगें उठाईं।
  • पेपर लीक मुद्दे: इसके बाद पेपर लीक और परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर भी पटना समेत कई जगहों पर छात्र प्रदर्शन हुए।
  • 6 अगस्त: STET उम्मीदवारों ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। उनकी मुख्य मांगें TRE-4 में STET उम्मीदवारों को मौका मिलने, STET को साल में दो बार किए जाने, परीक्षा कैलेंडर के अनुसार परीक्षा किए जाने और 2026 की परीक्षा की तारीख घोषित की जाने की थीं।

आंदोलन का परिणाम: TRE-4 नोटिफिकेशन जारी

छात्रों के बढ़ते दबाव और व्यापक विरोध प्रदर्शनों के चलते बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इस भर्ती के तहत कुल 32,388 पदों पर शिक्षकों की बहाली की जाएगी। ऑनलाइन आवेदन 1 सितंबर से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलेगा। हालांकि, परीक्षा की तारीख फिलहाल घोषित नहीं की गई है।

नोटिफिकेशन के बाद भी प्रदर्शन जारी क्यों?

TRE-4 नोटिफिकेशन जारी होने के बावजूद, छात्रों का कहना है कि उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र अपनी नई मांगों को लेकर सत्याग्रह कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांगें अब यह हैं कि परीक्षा केवल एक चरण (फेज) में आयोजित की जाए और इसमें नेगेटिव मार्किंग (नकारात्मक अंकन) को पूरी तरह से खत्म किया जाए। छात्रों का तर्क है कि दो चरणों में परीक्षा और नेगेटिव मार्किंग उनके लिए अतिरिक्त दबाव और अन्यायपूर्ण है।

राजनीतिक हस्तक्षेप और सरकारी प्रतिक्रिया

इस छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। 19 अगस्त को बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने छात्र-युवा मुद्दों, पुलिस कार्रवाई, सीवान में छात्रों पर कथित AK-47 फायरिंग और पेपर लीक जैसे मुद्दों के विरोध में लोकभवन/राजभवन मार्च का नेतृत्व किया। यह RJD के बड़े राजनीतिक प्रदर्शन के रूप में देखा गया, जिसने छात्रों की मांगों को और भी अधिक राष्ट्रीय मंच पर ला दिया।

छात्रों के बढ़ते दबाव के बीच, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी शिक्षा विभाग और BPSC के अधिकारियों के साथ बैठक बुलाई। बैठक में TRE-4 में सीटों की संख्या बढ़ाने और छात्रों की अन्य मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।

व्यापक मुद्दे और आगे का रास्ता

यह आंदोलन केवल शिक्षक भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार में परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता और बेरोजगारी जैसे व्यापक मुद्दों को भी सामने ला रहा है। इस प्रदर्शन के दौरान कई जगह पुलिस कार्रवाई और हिंसक झड़पों के मामले भी सामने आए हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। छात्रों का यह सत्याग्रह बिहार के युवाओं के लिए न्याय और बेहतर भविष्य की लड़ाई का प्रतीक बन गया है। अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या अंतिम निर्णय लेती है और छात्रों को न्याय कब तक मिलता है।

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