हाल ही में सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणामों को लेकर मचे बवाल के बीच, रांची के एक 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने साहस और बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए एक ऐसे घोटाले का पर्दाफाश किया, जिसने पूरे शिक्षा जगत को हिला दिया। ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में कॉपियों के धुंधले दिखने और मूल्यांकन में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद, सार्थक ने केवल शिकायत नहीं की, बल्कि सिस्टम की जड़ों तक जाकर उसकी पोल खोल दी।
सीबीएसई ओएसएम अनियमितताएं: कैसे हुई शुरुआत?
सीबीएसई ने 13 मई को 12वीं कक्षा के नतीजे जारी किए थे। इस वर्ष पहली बार कॉपियों की जाँच कंप्यूटर स्क्रीन (OSM सर्विस) पर की गई थी। नतीजों के बाद, कई छात्रों ने अपने अंकों को लेकर शिकायतें दर्ज कराईं। इसी क्रम में, निसर्ग अधिकारी नामक 12वीं के एक अन्य छात्र ने अपने ब्लॉग में इन गड़बड़ियों का विस्तृत उल्लेख किया। निसर्ग के ब्लॉग को पढ़ने के बाद सार्थक के मन में सवाल उठा कि सीबीएसई ने इतने असुरक्षित प्लेटफॉर्म को टेंडर क्यों दिया। यहीं से सार्थक की खोजी यात्रा शुरू हुई।
सार्थक सिद्धांत की असाधारण खोज
एक आम छात्र की तरह नंबरों से असंतुष्ट सार्थक ने री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया, लेकिन उनका मन सिर्फ यहीं तक नहीं रुका। उन्होंने तय किया कि वे इस ‘असुरक्षित प्लेटफॉर्म’ के पीछे की सच्चाई जानेंगे। सरकारी पोर्टल पर टेंडरों की जानकारी न मिलने पर उन्होंने टेंडर एग्रीगेटर वेबसाइट्स का सहारा लिया। उन्होंने सीबीएसई के पिछले 576 टेंडर दस्तावेजों को खंगाल डाला और गहन रिसर्च के बाद ओएसएम का ठेका देने की प्रक्रिया में हुई भारी अनियमितताओं को अपने ब्लॉग के माध्यम से उजागर किया।
संसद तक गूंजी छात्र की आवाज
सार्थक के इस सनसनीखेज खुलासे ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। उनकी रिपोर्ट की गूंज संसद तक पहुंची, जहाँ स्थायी समिति ने इस मामले पर संज्ञान लिया। समिति के समक्ष, सार्थक ने टेंडर की शर्तों से जुड़ी 500 से अधिक पृष्ठों का अध्ययन कर निकाले गए निष्कर्षों को प्रस्तुत किया। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे कोएम्ट (COEMPT) कंपनी ने टेंडर की शर्तों का उल्लंघन किया था। इस खुलासे के परिणामस्वरूप, सरकार को सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को उनके पदों से हटाना पड़ा, जो छात्र शक्ति का एक अभूतपूर्व उदाहरण है।
राहुल गांधी से बातचीत और एथिकल हैकिंग का स्पष्टीकरण
संसद में अपनी बात रखने के बाद, सार्थक सिद्धांत ने राहुल गांधी से भी मुलाकात की, जिन्होंने ओएसएम पोर्टल और टेंडरों में मिली गलतियों के बारे में बिंदुवार जानकारी ली। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने सीबीएसई की साइट हैक की थी, तो सार्थक ने स्पष्ट किया कि वह एक एथिकल हैकर हैं और पहले भी कई साइट्स को हैक कर चुके हैं, लेकिन सीबीएसई की साइट को उन्होंने हैक नहीं किया। उन्होंने बताया कि निसर्ग अधिकारी ने साइट हैक कर अपने ब्लॉग में पोस्ट किया था, जिससे उनकी जिज्ञासा बढ़ी और उन्होंने रिसर्च कर गड़बड़ी के साक्ष्य जुटाए।
री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर हमला और अन्य छात्रों की कहानी
इस पूरे मामले में री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर हुए साइबर हमले ने भी ध्यान खींचा। सीबीएसई के अनुसार, पोर्टल खुलने के 2 मिनट के भीतर 15 लाख एक्सेस अटेंप्ट हुए, और 1 लाख से अधिक बार सिस्टम की फाइलों तक अनधिकृत पहुँचने की कोशिश की गई। हालांकि, पोर्टल काम करता रहा और हजारों छात्रों ने आवेदन किया।
इस संघर्ष में अकेले सार्थक ही नहीं थे। दिल्ली के वेदांत श्रीवास्तव ने भी 12वीं की परीक्षा दी थी और फिजिक्स में 65 नंबर मिलने पर आवाज उठाई थी। री-इवैल्यूएशन में उनकी कॉपी में गड़बड़ी मिली। उन्हें पहले सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया, यहाँ तक कि ‘देशद्रोही’ भी कहा गया, लेकिन बाद में बोर्ड ने अपनी गलती मानी और माफी मांगी। इन घटनाओं ने साबित कर दिया कि छात्र मिलकर एक बड़े सिस्टम को जवाबदेह बना सकते हैं।
मुख्य घटनाक्रम: परिणाम से री-इवैल्यूएशन तक
- 13 मई: सीबीएसई ने 12वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजे घोषित किए।
- 19 मई: पोस्ट रिजल्ट शिकायतों के समाधान के लिए री-इवैल्यूएशन पोर्टल खुला, लेकिन पहले ही दिन क्रैश हो गया।
- 20 से 23 मई: आंसरशीट की फोटोकॉपी लेने की तारीख तीन बार बढ़ाई गई। छात्रों ने आंसर शीट ब्लर, अधिक फीस और साइट क्रैश होने की शिकायतें कीं।
- 25 मई: पोर्टल दुरुस्त करने के लिए देश के दो आईआईटी से मदद मांगी गई और साइबर अटैक रोकने पर काम हुआ। बोर्ड ने कहा- री-इवैल्यूएशन पोर्टल 1 जून को खुलेगा।
- 1 जून: OSM का रीवैल्यूएशन से जुड़ा पोर्टल दिन भर नहीं खुल सका।
- 2 जून: बोर्ड ने बताया कि पोर्टल लाइव हो गया है और 6 जून तक ओपन रहेगा।
निष्कर्ष: छात्र शक्ति का विजय
सार्थक सिद्धांत, निसर्ग अधिकारी और वेदांत श्रीवास्तव जैसे छात्रों ने यह साबित कर दिया कि जागरूकता, दृढ़ता और खोजी प्रवृत्ति से बड़े से बड़े सिस्टम की खामियों को उजागर किया जा सकता है। सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में सामने आई अनियमितताएं न केवल एक प्रशासनिक चूक थीं, बल्कि यह पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी का भी प्रमाण थीं। इन छात्रों की पहल ने लाखों अन्य छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने में मदद की है और यह दर्शाया है कि न्याय के लिए लड़ने से बदलाव संभव है।