हाल ही में CBSE बोर्ड और 12वीं के छात्र वेदांत श्रीवास्तव के बीच सोशल मीडिया पर पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) के नतीजों को लेकर एक बड़ा विवाद देखने को मिला है। यह मामला सिर्फ अंकों के बढ़ने या घटने का नहीं, बल्कि CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली और छात्रों के अधिकारों से जुड़ा हुआ भी है। आइए इस पूरे विवाद को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि आखिर क्या है यह OSM सिस्टम।
विवाद की शुरुआत: गलत आंसर कॉपी
यह विवाद कुछ समय पहले तब शुरू हुआ जब वेदांत श्रीवास्तव ने CBSE की OSM (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) सिस्टम में एक बड़ी खामी उजागर की। दरअसल, CBSE द्वारा जारी विषयवार आंसर कॉपी में वेदांत की फिजिक्स की आंसर कॉपी गलत थी। उन्हें किसी और छात्र की कॉपी अपलोड करके दी गई थी। बाद में CBSE ने अपनी गलती स्वीकार की और उसे सुधार दिया था।
पुनर्मूल्यांकन के बाद फिर उठे सवाल
हाल ही में CBSE ने वेदांत का पुनर्मूल्यांकन परिणाम जारी किया। इस रिजल्ट को लेकर वेदांत ने एक बार फिर आरोप लगाया कि फिजिक्स विषय में उनके कोई भी नंबर नहीं बढ़े हैं। उनका कहना था कि गलत कॉपी के कारण पहले जो नंबर कम थे, वही अब भी दिख रहे हैं, जबकि पुनर्मूल्यांकन से कोई वास्तविक बदलाव नहीं आया।
CBSE का स्पष्टीकरण: कुल 11 अंक बढ़े
वेदांत के आरोपों के बाद CBSE ने उन्हें ‘सरासर झूठ’ बताया और अपने स्पष्टीकरण में कहा कि वेदांत के दावों में तथ्यात्मक सच्चाई नहीं है। CBSE के अनुसार, पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद वेदांत के कुल 11 नंबर बढ़े हैं। बोर्ड ने बताया कि वेदांत के गणित में 46 से 47, कंप्यूटर साइंस में 61 से 62 और मुख्य विवाद वाले विषय फिजिक्स में 35 से बढ़कर सीधे 44 नंबर (यानी 9 नंबर) हो गए हैं। बोर्ड ने यह भी बताया कि उन्होंने 99.7% पुनर्मूल्यांकन के परिणाम जारी कर दिए हैं।
वेदांत का पलटवार: ‘अंक नहीं बढ़े, गलती सुधरी’
CBSE की इस सफाई के बाद वेदांत ने सोशल मीडिया (X) पर एक वीडियो पोस्ट कर बोर्ड के दावों को फिर खारिज कर दिया। वेदांत के मुताबिक, पुनर्मूल्यांकन में उनके 9 नंबर नहीं बढ़े हैं, बल्कि यह स्कोर उनकी ‘असली’ उत्तर पुस्तिका के कारण बढ़ा है। उन्होंने तर्क दिया कि गलत कॉपी में फिजिक्स में 35 नंबर थे, जो असली आंसर शीट में 44 हैं। इसलिए यह स्कोर बढ़ा है, ना कि पुनर्मूल्यांकन के बाद। उनका सवाल है कि यदि फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका उनकी नहीं थी, तो उस पर दिए गए अंक उनके कैसे हो सकते थे?
इस विवाद ने इंटरनेट पर डिजिटल असेसमेंट सिस्टम (OSM) को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
क्या है CBSE का ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम?
- डिजिटल मूल्यांकन: OSM (On-Screen Marking) एक ऐसी प्रणाली है जहाँ उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल फॉर्मेट में बदल दिया जाता है।
- ऑनलाइन चेकिंग: परीक्षक इन डिजिटल कॉपियों को कंप्यूटर स्क्रीन पर देखते हुए मार्क्स देते हैं, बजाय भौतिक कॉपियों को जांचने के।
- लाभ: इस सिस्टम का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज, सटीक और पारदर्शी बनाना है। यह परीक्षक की गलतियों को कम करने और उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित रखने में मदद करता है।
- चुनौतियां: हालांकि, वेदांत जैसे मामलों से यह पता चलता है कि इस सिस्टम में भी तकनीकी और मानवीय त्रुटियों की गुंजाइश हो सकती है, जैसे गलत कॉपी अपलोड होना या मूल्यांकन में विसंगतियां।
पुनर्मूल्यांकन में देरी पर CBSE का रुख
CBSE बोर्ड ने अपने स्पष्टीकरण में यह भी साफ किया कि पुनर्मूल्यांकन के नतीजों में कोई देरी नहीं हुई है। बोर्ड के अनुसार, 2025 में पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया 27 जून को शुरू होकर 11 जुलाई को समाप्त हुई थी। 21 जून को CBSE ने 12वीं क्लास के वेरिफिकेशन और पुनर्मूल्यांकन रिजल्ट को जारी करने का नोटिफिकेशन जारी किया था।
निष्कर्ष
वेदांत और CBSE के बीच यह विवाद छात्रों के लिए पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की पारदर्शिता पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। यह मामला दिखाता है कि टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के बावजूद, छात्रों को हमेशा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और बोर्ड को अपनी प्रक्रियाओं में अधिकतम स्पष्टता और विश्वसनीयता बनाए रखनी चाहिए।