गुजरात यूनिवर्सिटी भ्रष्टाचार विवाद: पूर्व कुलपति पर लगे गंभीर आरोप

गुजरात यूनिवर्सिटी एक बड़े भ्रष्टाचार विवाद की चपेट में आ गई है। नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और कांग्रेस ने यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलपति (Vice-Chancellor) नीरजा गुप्ता पर 40 करोड़ रुपये के वित्तीय अनियमितताओं (financial irregularities) का आरोप लगाया है। इस मामले ने न केवल राजनीतिक गलियारों में बल्कि शैक्षणिक समुदाय में भी हलचल मचा दी है।

क्या हैं भ्रष्टाचार के मुख्य आरोप?

आरोप प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) के तहत गुजरात यूनिवर्सिटी को मिली लगभग 40 करोड़ रुपये की ग्रांट से संबंधित हैं। NSUI का दावा है कि इस ग्रांट में से करीब 9.84 लाख रुपये की राशि पूर्व कुलपति नीरजा गुप्ता के बेटे के विदेश स्थित बैंक खाते में ट्रांसफर की गई।

इसके अतिरिक्त, उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने खुद को ‘प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर’ नियुक्त कर लिया और सिंडिकेट की मंजूरी के बिना अपनी नियमित सैलरी के अलावा हर महीने 4.20 लाख रुपये अतिरिक्त सैलरी के तौर पर वसूले। ये आरोप गंभीर वित्तीय हेरफेर की ओर इशारा करते हैं।

प्रदर्शन और विरोध का तरीका

इन आरोपों के विरोध में, NSUI और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने 25 अगस्त 2026 को गुजरात यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान, प्रदर्शनकारियों ने 100, 200 और 500 रुपये के नकली नोट वीसी ऑफिस में उछाले, जो भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रतीकात्मक रूप से दर्शा रहा था। वीडियो फुटेज में ऑफिस और टेबल पर नकली नोट बिखरे हुए साफ नजर आए, जिसने इस घटना को और सुर्खियां दीं।

NSUI और कांग्रेस की चेतावनी

NSUI और कांग्रेस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना जाता है, तो आने वाले दिनों में यूनिवर्सिटी के इंचार्ज कुलपति के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा है कि इस मुद्दे को लेकर जंतर-मंतर पर एक बड़ा आंदोलन छेड़ा जा सकता है, जो इस विवाद के राष्ट्रीय स्तर पर फैलने की संभावना को दर्शाता है।

नीरजा गुप्ता: एक ऐतिहासिक नियुक्ति

यह दिलचस्प है कि नीरजा गुप्ता की नियुक्ति 2023 में काफी खास मानी गई थी। वह गुजरात यूनिवर्सिटी के 70 से अधिक वर्षों के इतिहास में पहली महिला कुलपति थीं। उनकी प्रोफाइल के अनुसार, उन्हें हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी, असमिया, उर्दू, ओड़िया, पाली और प्राकृत जैसी कई भारतीय भाषाओं के साथ-साथ रूसी और ग्रीक भाषाओं का भी गहरा ज्ञान है। हालांकि, अब उनका कार्यकाल इन गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण विवादों में घिर गया है।

यह मामला अभी जांच के दायरे में है और आरोपों की सच्चाई सामने आना बाकी है। हालांकि, इसने गुजरात के शैक्षणिक और राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी है, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया जा रहा है।

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