Home » होमस्कूलिंग का बढ़ता चलन: क्यों अपना रहे हैं माता-पिता यह शिक्षा मॉडल?

हाल के वर्षों में, बच्चों को घर पर शिक्षा देने का चलन, जिसे ‘होमस्कूलिंग’ के नाम से जाना जाता है, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे विकसित देशों में तेज़ी से बढ़ा है। यह केवल एक शैक्षणिक विकल्प नहीं, बल्कि माता-पिता की बदलती प्राथमिकताओं और बच्चों की ज़रूरतों को समझने का एक महत्वपूर्ण संकेत है।

वर्ष 2024 में, अकेले अमेरिका में स्कूल जाने की उम्र के लगभग 32 लाख बच्चों यानी कुल 6% बच्चों ने घर पर ही अपनी पढ़ाई पूरी की। यह आंकड़ा वर्ष 2019 की तुलना में लगभग दोगुना है, जो इस बात पर प्रकाश डालता है कि होमस्कूलिंग अब एक मुख्यधारा का विकल्प बनता जा रहा है।

कभी होमस्कूलिंग को मुख्य रूप से परंपरावादी ईसाई समुदायों से जुड़ा माना जाता था, लेकिन अब यह दूसरे समुदायों और विविध पृष्ठभूमि के परिवारों में भी तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है। इसके पीछे कई सामाजिक और शैक्षिक कारण हैं जिन पर गौर करना आवश्यक है।

होमस्कूलिंग के बढ़ते चलन के प्रमुख कारण

  • स्कूलों में भेदभाव और संवेदनहीन पाठ्यक्रम: कई माता-पिता को लगता है कि स्कूलों में उनके बच्चों के साथ भेदभाव होता है या पाठ्यक्रम उनकी ज़रूरतों और मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
  • सोशल मीडिया का बढ़ता दबाव: आधुनिक स्कूलों में बच्चों पर सोशल मीडिया का अप्रत्यक्ष दबाव भी एक चिंता का विषय बन गया है, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की चिंता: माता-पिता बच्चों के बढ़ते अकादमिक दबाव, परीक्षा के तनाव और सामाजिक चुनौतियों के कारण उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा 44 देशों में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, 15 साल की लड़कियों में स्कूल का दबाव महसूस करने वाली छात्राओं की संख्या 2018 से 2022 के बीच 54% से बढ़कर 63% हो गई है। यह बच्चों पर बढ़ते मानसिक बोझ को दर्शाता है। वहीं, इंग्लैंड में हुए एक अन्य सर्वेक्षण में यह पाया गया कि घर पर पढ़ने वाले हर छह बच्चों में से एक बच्चे की पढ़ाई पर उसके मानसिक स्वास्थ्य का असर देखा गया। यह दर्शाता है कि होमस्कूलिंग भी मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों से अछूती नहीं है, और इस पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

वैश्विक परिदृश्य: कहाँ मिलती है अनुमति, कहाँ नहीं?

हालांकि पश्चिमी देशों में होमस्कूलिंग का चलन बढ़ रहा है, लेकिन चीन, जर्मनी, ग्रीस, स्पेन और तुर्की जैसे कुछ देशों में इसकी अनुमति मिलना अभी भी मुश्किल है या सख्त नियमों के अधीन है। इन देशों की शैक्षिक प्रणालियां और सांस्कृतिक मूल्य होमस्कूलिंग के प्रति अलग दृष्टिकोण रखते हैं।

2019-2024: होमस्कूलिंग में असाधारण वृद्धि

वर्ष 2019 से 2024 के बीच होमस्कूलिंग अपनाने वाले बच्चों की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि अमेरिका में देखी गई:

  • अमेरिका: लगभग 32 लाख बच्चों ने घर पर पढ़ाई की, जो करीब 120% की वृद्धि दर्शाता है।
  • ब्रिटेन: 1 लाख 12 हज़ार बच्चों ने होमस्कूलिंग का विकल्प चुना, जिसमें 105% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • ऑस्ट्रेलिया: यहाँ 63 हज़ार बच्चों ने घर पर शिक्षा प्राप्त की, जो 95% की प्रभावशाली वृद्धि है।

यह आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि होमस्कूलिंग अब एक उपेक्षित विकल्प नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण और तेज़ी से बढ़ता रुझान बन गया है। माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा और कल्याण के लिए नए रास्तों की तलाश कर रहे हैं, और होमस्कूलिंग उनमें से एक प्रमुख विकल्प बनकर उभरा है।

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