देशभर के सरकारी स्कूलों में कार्यरत हजारों शिक्षकों के लिए एक बड़ा बदलाव आया है। सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्देशों के बाद, अब शिक्षक पात्रता परीक्षा (HTET/TET) पास करना कई शिक्षकों के लिए अनिवार्य हो गया है, खासकर जिनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 के लागू होने से पहले हुई थी। इस फैसले का असर न केवल हरियाणा, बल्कि पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों पर भी पड़ रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं इस नए नियम और इसके प्रभावों के बारे में।
हरियाणा में HTET की नई चुनौती
हरियाणा में लगभग 12,000 ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने अभी तक हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (HTET) पास नहीं की है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय, हरियाणा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए एक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के अनुसार, जिन शिक्षकों ने HTET पास नहीं की है, उन्हें यह परीक्षा पास करनी होगी। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ सकती है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। इसके अलावा, ऐसे शिक्षकों को पदोन्नति भी नहीं मिलेगी।
- छूट का प्रावधान: सरकार ने इसमें एक महत्वपूर्ण शर्त जोड़ी है। जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में 5 साल से कम समय बचा है, उन्हें HTET से छूट दी गई है। हालांकि, जो शिक्षक पदोन्नति चाहते हैं, उनके लिए HTET पास करना अनिवार्य होगा।
- पर्याप्त अवसर: शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिले, इसके लिए भिवानी बोर्ड (BSEH) को साल में दो बार HTET परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
- विरोध की आवाज़: इस फैसले के खिलाफ हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच में फिर से याचिका दायर करने पर विचार कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और इसकी पृष्ठभूमि
यह महत्वपूर्ण बदलाव सुप्रीम कोर्ट के कई आदेशों के परिणामस्वरूप सामने आया है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए शिक्षकों का पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य है। यह फैसला सिविल अपील संख्या 1385/2025 (अंजुमन इशात-ए-तलीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य) में दिए गए आदेशों के अनुसार लिया गया है। इस फैसले के बाद, विभिन्न राज्य सरकारें अपने यहां कार्यरत शिक्षकों के लिए TET परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया शुरू कर रही हैं।
पश्चिम बंगाल में भी TET की तैयारी
पश्चिम बंगाल में भी स्कूल शिक्षा विभाग ने इन-सर्विस प्राइमरी शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) कराने का आदेश दिया है। अनुमान है कि करीब 90,000 शिक्षक इस प्रक्रिया के दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, परीक्षा की तारीखें, आवेदन प्रक्रिया और शेड्यूल अभी जारी नहीं किया गया है।
- शिक्षकों की नाराजगी: इस फैसले पर कुछ शिक्षक संगठनों ने नाराजगी भी जताई है। उनका कहना है कि लंबे समय से पढ़ा रहे शिक्षकों पर नौकरी के दौरान दोबारा पात्रता परीक्षा थोपना उचित नहीं है। उन्होंने खासकर पुराने नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से बाहर रखने की मांग की है।
उत्तर प्रदेश का अनुभव: UPTET की अनिवार्यता और शिक्षकों की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश में भी सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर, 2025 के फैसले के बाद UPTET की अनिवार्यता लागू की गई। इस फैसले के तहत, जिन प्राइमरी शिक्षकों ने TET पास नहीं किया था, उन्हें अब इसे पास करना अनिवार्य है, अन्यथा नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। इस फैसले से करीब 1.85 लाख शिक्षकों पर असर पड़ा, जिन्होंने 2 से 4 जुलाई 2026 के बीच UPTET परीक्षा दी।
- कड़ा विरोध: शिक्षकों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया। प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजे गए और संसद में भी कानून में संशोधन की मांग उठाई गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला अटल रहा।
- भावनात्मक असर: शिक्षक संघों का दावा है कि इस तनाव के कारण 2 शिक्षकों की मौत भी हुई है। कई शिक्षक, जो 20-25 साल से पढ़ा रहे हैं, उनका तर्क है कि इतनी लंबी सेवा के बाद फिर से परीक्षा देना कहां तक तर्कसंगत है?
- सरकार का सहयोग: यूपी सरकार ने सेवारत शिक्षकों के लिए दो बड़े फैसले लिए हैं: कार्यरत शिक्षकों के लिए भी TET आयोजित की जाएगी और उन्हें परीक्षा देने के लिए स्कूल से छुट्टी भी मिलेगी। यह परीक्षा साल में दो बार होगी और इसे पास करने के लिए 2 साल का समय दिया जाएगा। इस अवधि में भी परीक्षा पास न कर पाने पर नौकरी जाएगी, भले ही शिक्षक की उम्र 40-45 साल ही क्यों न हो।
निष्कर्ष: शिक्षकों के लिए आगे का रास्ता
यह स्पष्ट है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा अब सरकारी शिक्षक बनने और बने रहने के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त बन गई है। शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लिए गए इस फैसले का देशभर के हजारों शिक्षकों पर सीधा असर पड़ रहा है। शिक्षकों के लिए यह आवश्यक है कि वे इन नियमों को समझें और समय रहते पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करें ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रह सके और वे राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान जारी रख सकें।