IPS संकेत कुमार: नीट प्रदर्शन में वायरल वीडियो और दृढ़ पुलिस नेतृत्व की कहानी
हाल ही में पटना में हुए NEET प्रदर्शन के दौरान, एक आईपीएस अधिकारी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा। यह वीडियो पटना वेस्ट के एसपी, आईपीएस संकेत कुमार का था, जहाँ वे अपने पुलिसकर्मियों से कहते सुनाई दिए, "पीछे हटे तो नौकरी के लायक नहीं छोडूंगा।" यह घटना न केवल एक पुलिस अधिकारी के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है, बल्कि संकट की स्थिति में नेतृत्व और अनुशासन के महत्व पर भी प्रकाश डालती है।
क्या था पूरा मामला?
22 जुलाई को पटना की सड़कें NEET से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के उग्र आंदोलन का गवाह बनीं। गांधी मैदान से शुरू हुआ छात्रों का यह जुलूस लोक भवन की ओर बढ़ रहा था। जब प्रदर्शनकारी छात्र पटना के प्रमुख डाकबंगला चौराहे पर पहुँचे, तो स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई। पुलिस ने छात्रों को रोकने के लिए भारी बैरिकेडिंग की थी, लेकिन आक्रोशित छात्रों ने पुलिस के घेरे को तोड़ दिया। इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प हुई और प्रदर्शन ने जल्द ही हिंसक रूप ले लिया, जिसमें भीड़ की ओर से पथराव भी शुरू हो गया।
संकेत कुमार का निर्णायक हस्तक्षेप
डाकबंगला चौराहे पर स्थिति बिगड़ती देख, वेस्ट एसपी आईपीएस संकेत कुमार खुद मोर्चे पर उतरे। जब कुछ पुलिसकर्मी उग्र भीड़ और पथराव के बीच पीछे हटने लगे, तो एसपी संकेत कुमार ने कड़े और चेतावनी भरे लहजे में अपने साथियों को पीछे न हटने की चेतावनी दी। उनके इस बयान ने पुलिस बल में नई ऊर्जा भर दी और पुलिसकर्मियों ने दोबारा आगे बढ़कर उग्र छात्रों को खदेड़ने के लिए मोर्चा संभाला। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और उनकी कार्यशैली तथा नेतृत्व क्षमता की खूब सराहना हुई। यह दिखाता है कि कैसे एक अधिकारी का सही समय पर लिया गया फैसला और दृढ़ता पूरी स्थिति को बदल सकती है।
IPS संकेत कुमार: एक वैज्ञानिक से पुलिस अधिकारी तक का सफर
आईपीएस संकेत कुमार का बैकग्राउंड भी काफी दिलचस्प है। आईपीएस बनने से पहले, वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में एक वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत थे। विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र से कानून व्यवस्था के चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में आना उनके बहुमुखी प्रतिभा और सेवा भावना को दर्शाता है। उनका यह सफर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है, जो विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के बाद भी राष्ट्र सेवा के लिए तैयार रहते हैं।
‘लेडी सिंघम’ अनु बेनिवाल का भी है प्रेरक किस्सा
आईपीएस अधिकारियों के इसी तरह के साहस और दृढ़ता का एक और उदाहरण मध्य प्रदेश कैडर की आईपीएस अनु बेनिवाल का है, जिन्हें लोग ‘लेडी सिंघम’ के नाम से भी जानते हैं। उनका एक वीडियो भी पहले वायरल हुआ था, जब उन्होंने ग्वालियर में एक ब्लैक फिल्म चढ़ी कार को रोका था। कार चालक ने जब अपने रसूखदार रिश्तेदारों का हवाला दिया, तो अनु बेनिवाल ने दो टूक शब्दों में कहा था, "तुम्हारे फूफा चाहे प्रेसिडेंट हों तो भी चालान तो होगा।" उन्होंने उस दौरान 172 वाहनों पर चालानी कार्रवाई करके 86 हजार से अधिक की राशि वसूल की थी। उनकी यह कार्यशैली सार्वजनिक जीवन में कानून के प्रति समानता और ईमानदारी के महत्व को स्थापित करती है।
अनु बेनिवाल: शिक्षा और सेवा का संगम
2022 बैच की पुलिस अधिकारी अनु बेनिवाल का जन्म दिल्ली के पीतमपुरा में हुआ था। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज से फिजिक्स ऑनर्स में बीएससी और एमएससी की डिग्री प्राप्त की है। इसके साथ ही उन्होंने नैनो साइंस पर रिसर्च भी किया है। शिक्षा के क्षेत्र में इतनी उच्च उपलब्धि हासिल करने के बाद, उनका पुलिस सेवा में आना यह दर्शाता है कि कैसे brightest minds देश की सेवा में अपना योगदान दे रहे हैं। अनु बेनिवाल का विवाह आयुष जाखड़ से हुआ है, जो स्वयं भी 2022 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। विवाह के बाद केंद्र सरकार ने उनका बिहार कैडर से मध्य प्रदेश कैडर में इंटर कैडर ट्रांसफर स्वीकार किया।
निष्कर्ष: पुलिस अधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान
आईपीएस संकेत कुमार और अनु बेनिवाल जैसे अधिकारी हमारे समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। वे दिखाते हैं कि कैसे दृढ़ नेतृत्व, अनुशासन और कानून के प्रति निष्ठा से किसी भी कठिन परिस्थिति का सामना किया जा सकता है। सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में इन अधिकारियों का योगदान अतुलनीय है। इनकी कहानियां न केवल छात्रों को सिविल सेवा में आने के लिए प्रेरित करती हैं, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनने और नियमों का पालन करने का महत्व भी सिखाती हैं।