झारखंड में 17 अगस्त 2026 को JSSC-CGL (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग – संयुक्त स्नातक स्तरीय) परीक्षा रद्द होने का फैसला एक साथ खुशी और भारी विरोध का गवाह बना। यह एक ऐसा निर्णय था जिसने राज्य के युवाओं के भविष्य को लेकर गहरे सवाल खड़े कर दिए। जहां एक ओर अनियमितताओं के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों ने जश्न मनाया, वहीं दूसरी ओर वे उम्मीदवार सड़क पर उतर आए, जिन्होंने यह परीक्षा पास कर नौकरी हासिल की थी।
JSSC-CGL परीक्षा रद्द: एक बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 17 अगस्त 2026 को हुई कैबिनेट की विशेष बैठक में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। यह निर्णय पिछले 24 दिनों से रांची में JSSC और JPSC परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बाद आया।
खुशी बनाम निराशा: दो अलग-अलग तस्वीरें
खुशी का माहौल: अनियमितताओं के खिलाफ जीत?
सरकार के इस फैसले के बाद, पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र महतो ने सोनम वांगचुक से बातचीत के बाद अपना अनशन तोड़ दिया। आंदोलनकारी छात्रों ने जमकर जश्न मनाया और इसे अपनी मांग की आंशिक जीत बताया। CJP लीडर अभिजीत दीपके और उनके साथियों का भी इन छात्रों को समर्थन मिला था। छात्र नेता रवींद्र पासवान ने सरकार का धन्यवाद किया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि उनकी CBI जांच की मांग अभी भी अधूरी है और जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
नौकरी गंवाने वाले अभ्यर्थियों का दर्द: सड़कों पर रोते हुए उम्मीदवार
हालांकि, इस फैसले का दूसरा पहलू बेहद दुखद और चिंताजनक था। लगभग 2950 ऐसे उम्मीदवार थे जिन्होंने JSSC-CGL परीक्षा पास कर ली थी और उन्हें नौकरी मिल चुकी थी। परीक्षा रद्द होने के बाद उनके सामने दोबारा बेरोजगार होने का संकट खड़ा हो गया। इन उम्मीदवारों ने रांची के प्रोजेक्ट भवन के बाहर एक नया आंदोलन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान कई उम्मीदवार भावुक होकर रोते हुए भी नजर आए।
- एक प्रदर्शनकारी ने भावुक होकर कहा कि सरकार के फैसले ने उसे सड़क पर ला दिया है।
- इन उम्मीदवारों का कहना है कि यह केवल नौकरी का मामला नहीं, बल्कि उनके अधिकार और भविष्य से जुड़ा सवाल है।
- उन्होंने सरकार से अपना फैसला वापस लेने की मांग की और दावा किया कि इस निर्णय से अदालत के आदेश का भी निरादर हुआ है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील और तनावपूर्ण स्थिति
आक्रोशित छात्रों ने एक मानव श्रृंखला बनाकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील की। उनकी मांग थी कि मुख्यमंत्री विरोध-प्रदर्शन के दबाव में आकर ऐसा कोई फैसला न लें जिससे उनकी नौकरी खतरे में पड़ जाए। इस दौरान सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों और पुलिस-प्रशासन के बीच कई मौकों पर तनावपूर्ण स्थिति भी देखने को मिली। उम्मीदवारों ने यह साफ कर दिया कि वे अपने अधिकारों के लिए आगे भी लड़ाई जारी रखेंगे।
आगे क्या? CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र
भले ही परीक्षा रद्द करने की मांग मान ली गई हो, लेकिन छात्र नेता और आंदोलनकारी अभी भी JSSC और JPSC परीक्षा गड़बड़ियों की CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका मानना है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक ऐसी अनियमितताएं भविष्य में भी होती रहेंगी। यह मामला झारखंड के युवाओं के भविष्य और राज्य की चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
निष्कर्ष: युवाओं के भविष्य का सवाल
JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने का यह पूरा प्रकरण झारखंड में रोजगार और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की जटिलता को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि कैसे एक ही फैसले से हजारों युवाओं का भविष्य दांव पर लग जाता है। सरकार, छात्रों और अन्य हितधारकों के बीच संवाद और एक पारदर्शी समाधान की आवश्यकता है ताकि योग्य उम्मीदवारों के साथ न्याय हो सके और राज्य के युवाओं का भविष्य सुरक्षित रहे।