NCERT कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान: संविधान, आपातकाल और चुनाव आयोग में हुए महत्वपूर्ण बदलाव

NCERT की कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान पुस्तकों में हुए महत्वपूर्ण बदलाव

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने हाल ही में कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य छात्रों को भारतीय समाज, राजनीति और इतिहास के कुछ प्रमुख पहलुओं से अवगत कराना है। हालांकि, कुछ परिवर्तनों ने शिक्षाविदों और आम जनता के बीच चर्चा को भी जन्म दिया है। आइए इन प्रमुख बदलावों को विस्तार से समझते हैं।

संविधान की प्रस्तावना और प्रमुख शब्दों का लोप

नई पाठ्यपुस्तकों में कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब से भारतीय संविधान की प्रस्तावना को हटा दिया गया है। इसके अतिरिक्त, ‘सोशलिस्ट’ (समाजवादी) और ‘सेक्युलर’ (पंथनिरपेक्ष/धर्मनिरपेक्ष) जैसे शब्दों का भी सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया गया है। जहां एक ओर यह बताया गया है कि पुस्तक में संविधान की चर्चा उसके निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मौलिक अधिकारों के माध्यम से की गई है, वहीं दूसरी ओर ‘सॉवरेन’ (संप्रभुता), ‘सोशलिस्ट’ (समाजवादी), ‘सेक्युलर’ (पंथनिरपेक्ष/धर्मनिरपेक्ष), ‘डेमोक्रेटिक’ (लोकतांत्रिक) और ‘रिपब्लिक’ (गणराज्य) जैसे शब्दों के महत्व और अर्थ पर अलग से कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

आपातकाल: लोकतंत्र के समक्ष एक बड़ी चुनौती

NCERT की नई किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ के एक अध्याय में आपातकाल (Emergency) को लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक के रूप में विस्तार से वर्णित किया गया है।

जयप्रकाश नारायण का जन आंदोलन

  • पुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने छात्रों और आम लोगों को एकजुट करके बिहार तथा गुजरात में बड़े जन आंदोलनों को जन्म दिया।
  • यह बताया गया है कि 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद आम चुनाव हुए, जिसमें जनता ने मतदान के जरिए अपनी असहमति व्यक्त की और तत्कालीन सत्तारूढ़ सरकार चुनाव हार गई। इसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना गया है।

आपातकाल के कारण और प्रभाव

किताब में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ जनता में असंतोष बढ़ रहा था। बेरोजगारी, महंगाई और कुप्रबंधन जैसे आरोपों के कारण देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए। इन्हीं परिस्थितियों के चलते जून 1975 में ‘आंतरिक अशांति’ के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया गया।

आपातकाल के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण घटनाएँ हुईं:

  • अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए।
  • प्रेस पर कठोर सेंसरशिप लागू की गई।
  • कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।
  • लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा और लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रताएँ सीमित हो गईं।

भारत का चुनाव आयोग: एक सफल लोकतांत्रिक प्रणाली का आधार

कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में भारत के चुनाव आयोग (ECI) की भी प्रशंसा की गई है। पुस्तक इसे भारत में चुनाव कराने को दुनिया के सबसे बड़े और जटिल कार्यों में से एक मानती है, जिसके बावजूद चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।

चुनाव आयोग के कार्य और चुनौतियाँ

  • ‘इलेक्शंस’ नामक अध्याय में बताया गया है कि 2024 में देश में 96.8 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाता थे। इतनी बड़ी आबादी के लिए चुनाव कराना बेहद चुनौतीपूर्ण है, खासकर जब देश के विभिन्न हिस्सों में भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियाँ अत्यधिक भिन्न हों।
  • चुनाव आयोग को फेक न्यूज, गलत जानकारी फैलाना और मतदाताओं को डराने-धमकाने जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।
  • इन चुनौतियों से निपटने के लिए चुनाव आयोग RPA कानून, आदर्श आचार संहिता (MCC), EVM, VVPAT और मतदाता जागरूकता अभियानों का प्रभावी ढंग से उपयोग करता है।

लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका

पुस्तक इस बात पर जोर देती है कि सिर्फ चुनाव आयोग के प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं। निष्पक्ष और सफल चुनावों के लिए लोगों की जागरूकता और सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। जितना अधिक नागरिक सतर्क रहेंगे, भारतीय लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा। यह अध्याय राजनीतिक दलों की भूमिका को भी स्वीकार करता है, जो विभिन्न नीतियाँ और योजनाएँ प्रस्तुत करके मतदाताओं को अपनी पसंद का निर्णय लेने में मदद करते हैं। छात्रों को 1977 से 2024 तक हुए लोकसभा चुनावों में विभिन्न विजयी गठबंधनों का अध्ययन करने के लिए भी प्रेरित किया गया है।

मोहनजोदड़ो की नर्तकी मूर्ति पर विवाद

NCERT की कक्षा 9 की पुस्तक ‘मधुरिमा’ के पहले अध्याय ‘हिस्ट्री ऑफ आर्ट्स’ में मोहनजोदड़ो से प्राप्त प्रसिद्ध कांस्य नर्तकी की मूर्ति की एक तस्वीर को बदले हुए रूप में छापा गया है। यह मूर्ति 1926 में मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली थी। मूल मूर्ति में उसका धड़ खुला हुआ दिखाई देता है, जबकि पुस्तक में छपी तस्वीर में मूर्ति के कंधे से नीचे के हिस्से को ढंक दिया गया है और उसका रंग भी बदल दिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले 25 वर्षों से इस कांस्य मूर्ति के मूल स्वरूप में कभी कोई बदलाव नहीं किया गया था, जिससे यह परिवर्तन एक विवाद का विषय बन गया है।

निष्कर्ष

NCERT द्वारा किए गए ये बदलाव भारतीय शिक्षा प्रणाली में समसामयिक मुद्दों और ऐतिहासिक घटनाओं की व्याख्या को दर्शाते हैं। छात्रों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे इन विषयों पर गहनता से विचार करें और लोकतांत्रिक मूल्यों व संस्थाओं को समझने का प्रयास करें।

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