एनसीईआरटी कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान: न्यायपालिका अध्याय में बड़े बदलाव
नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने अपनी कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान (भाग-2) की संशोधित पुस्तक ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ जारी कर दी है। यह पुस्तक इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र और अर्थव्यवस्था जैसे विषयों को एकीकृत रूप में प्रस्तुत करती है। इस नए संस्करण में न्यायपालिका से संबंधित विवादास्पद सामग्री को हटाने और पूरे अध्याय को फिर से लिखने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया था।
न्यायपालिका अध्याय में क्या बदला?
पहले के संस्करण में जहां ‘समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ शीर्षक वाले अध्याय में न्यायपालिका की चुनौतियों, लंबित मामलों और भ्रष्टाचार जैसे संवेदनशील मुद्दों का उल्लेख किया गया था, वहीं अब इन सभी हिस्सों को हटा दिया गया है। NCERT ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी गलती स्वीकार की थी, जिसके बाद अदालत ने पुस्तक के प्रिंट और डिजिटल दोनों एडिशन के वितरण पर रोक लगा दी थी और अध्याय को दोबारा लिखने का निर्देश दिया था। इस किताब की ऑफलाइन बिक्री 24 फरवरी 2023 से बंद कर दी गई थी।
अब किन विषयों पर है जोर?
संशोधित अध्याय में अब न्यायपालिका के सकारात्मक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें शामिल प्रमुख विषय हैं:
- संविधान की रक्षा में सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण भूमिका।
- आम लोगों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने के तरीके।
- जनहित याचिका (PIL) का विस्तृत विवरण।
- ट्रिब्यूनल और वैकल्पिक विवाद समाधान (Alternative Dispute Resolution – ADR) जैसी व्यवस्थाएं।
जनहित याचिका (PIL) को उदाहरणों से समझें
यह पहली बार है कि जनहित याचिका (Public Interest Litigation) को छात्रों के लिए इतने विस्तार से समझाया गया है। पुस्तक में बताया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 के तहत आम जनता के हित में सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। छात्रों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण मामलों के माध्यम से PIL की शक्ति का परिचय दिया गया है:
- हुसैनारा खातून केस: इसने विचाराधीन कैदियों की रिहाई का मार्ग प्रशस्त किया।
- एम.सी. मेहता के पर्यावरण से जुड़े मामले: जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय दिए।
- विशाखा निर्णय: जिसने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के खिलाफ व्यापक दिशा-निर्देश स्थापित किए।
विशेषज्ञ समिति ने किया पुनर्रचना
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए, शिक्षा मंत्रालय की ओर से एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया। इस समिति ने न्यायपालिका से संबंधित पूरे अध्याय को फिर से लिखा। पुरानी किताब की टीम में 51 विशेषज्ञ थे, लेकिन संशोधित संस्करण में तीन विशेषज्ञों – मिशेल डेनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार – के नाम हटा दिए गए हैं, जिससे अब 48 नाम रह गए हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने बाद में यह भी स्पष्ट किया कि पाठ्यपुस्तक तैयार करना एक सामूहिक प्रक्रिया है और किसी एक व्यक्ति को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने पहले दिए गए अपने आदेश में भी संशोधन किया था।
विवाद के बाद किए गए बड़े बदलाव
इस पूरे विवाद के बाद, शिक्षा मंत्रालय ने कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति बनाई गई। इसमें पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल और हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रकाश सिंह जैसे प्रमुख व्यक्तित्वों को शामिल किया गया। नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी के प्रमुख को भी स्कूली पाठ्यक्रम में न्यायपालिका से जुड़े विषयों की समीक्षा प्रक्रिया से जोड़ा गया। NCERT ने भी अपनी पाठ्यक्रम तैयार करने वाली कमेटी का पुनर्गठन किया और किताबों के अनुमोदन, प्रकाशन और वितरण प्रक्रियाओं में सुधार किए।
पहले क्यों हटाई गई थी किताब?
NCERT ने 23 फरवरी 2023 को क्लास 8 के स्टूडेंट्स के लिए सोशल साइंस की नई टेक्स्टबुक जारी की थी। यह किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्कूलों में पढ़ाई जानी थी। इसका पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज किया गया था। ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ नामक इस किताब में ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ अध्याय के तहत ‘करप्शन इन द ज्यूडिशियरी’ जैसे अनुभाग शामिल थे। इसमें भ्रष्टाचार, बड़ी संख्या में लंबित मामले और न्यायाधीशों की कमी को न्यायिक प्रणाली की प्रमुख चुनौतियों के रूप में बताया गया था। किताब में “Justice delayed is justice denied” (इंसाफ में देरी, इंसाफ न मिलने जैसा है) जैसे मुहावरे के साथ-साथ विभिन्न अदालतों में करोड़ों लंबित मामलों का डेटा भी दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस सामग्री को विवादित मानते हुए हटाने का निर्देश दिया था।
यह संशोधन NCERT द्वारा नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) और नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत की जा रही व्यापक पाठ्यक्रम सुधारों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य छात्रों को अधिक सटीक और संतुलित जानकारी प्रदान करना है।