भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर NEET (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) का दबाव छात्रों पर लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में हुई कुछ दुखद घटनाओं ने इस गंभीर मुद्दे को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है, जब NEET परीक्षा से जुड़े तनाव के कारण कई छात्रों ने अपनी जान ले ली। यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि हमारी शिक्षा प्रणाली और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गहरे प्रभाव का प्रतीक है।
NEET के तनाव से जूझते छात्रों की दर्दनाक दास्तां
तमिलनाडु के कोयंबटूर में 19 वर्षीय अनुकीर्तना की आत्महत्या का मामला बेहद पीड़ादायक है। उसने NEET परीक्षा दी थी और परिणाम का इंतजार कर रही थी, लेकिन परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा के डर ने उसे इतना घेर लिया कि उसने यह घातक कदम उठा लिया। अपने आखिरी संदेशों में उसने पिता द्वारा उस पर खर्च किए गए पैसे और भविष्य के डर का जिक्र किया। यह केवल एक अनुकीर्तना की कहानी नहीं है। अहमदाबाद में 17 वर्षीय छात्र की आत्महत्या, देहरादून की रिया थापा और लखनऊ की एक अन्य छात्रा की मौत भी इसी त्रासदी की कड़ी है। NEET परीक्षा रद्द होने के बाद से देशभर में अब तक लगभग 12 छात्र अपनी जान दे चुके हैं, जो एक भयावह आंकड़ा है।
पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने का दोहरा झटका
NEET-UG परीक्षा, जो 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी और जिसमें लगभग 23 लाख छात्र शामिल हुए थे, पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को रद्द कर दी गई। इसके बाद 21 जून को री-एग्जाम की घोषणा ने उन छात्रों को गहरे सदमे में डाल दिया, जो पहले ही परीक्षा के परिणाम का इंतजार कर रहे थे। इस अनिश्चितता और फिर से परीक्षा देने के दबाव ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। अनुकीर्तना के परिवार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है, और CPM सहित कई संगठनों ने NEET पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया है।
क्या है NEET और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) भारत में मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है। 2013 में शुरू हुई इस परीक्षा के माध्यम से देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, आयुष (BAMS, BHMS) और नर्सिंग जैसे कोर्सेज में दाखिला मिलता है, जिसमें AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं। यह परीक्षा लाखों छात्रों के लिए डॉक्टर बनने के सपने को साकार करने का एकमात्र रास्ता है, यही कारण है कि इस पर दबाव इतना अधिक रहता है।
शिक्षा प्रणाली पर सवाल और राहुल गांधी की टिप्पणी
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कोटा में छात्रों से संवाद करते हुए भारतीय शिक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हमारा एजुकेशन सिस्टम बच्चों को प्रेशराइज और स्ट्रेस देता है, और हमें मिलकर इसके खिलाफ लड़ना होगा ताकि भविष्य में कोई भी बच्चा आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम न उठाए। उन्होंने यह भी बताया कि 5 प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर 5 लाख करोड़ खर्च होता है, जो 5 मंत्रालयों के बजट से भी अधिक है। यह टिप्पणी इस बात पर प्रकाश डालती है कि कैसे हमारा तंत्र छात्रों पर अनावश्यक दबाव डाल रहा है, जिससे वे मानसिक और भावनात्मक रूप से कमजोर हो रहे हैं।
आगे का रास्ता: समाधान की ओर
यह आवश्यक है कि हम इन दुखद घटनाओं से सबक लें। सरकार, शिक्षाविदों और अभिभावकों को मिलकर छात्रों पर पड़ने वाले इस अत्यधिक दबाव को कम करने के लिए उपाय करने होंगे। इसमें शामिल हैं:
- प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना।
- छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता और परामर्श सेवाओं को सुलभ बनाना।
- शिक्षा प्रणाली में सुधार ताकि सफलता केवल एक परीक्षा के परिणाम पर निर्भर न हो।
- अभिभावकों को बच्चों की क्षमताओं को समझने और उन पर अवास्तविक अपेक्षाओं का बोझ न डालने के लिए जागरूक करना।
प्रत्येक छात्र का जीवन अनमोल है, और उन्हें एक सुरक्षित एवं सहयोगी वातावरण प्रदान करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।