देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच तनाव और दबाव एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। हाल ही में सामने आई दो हृदय विदारक घटनाओं ने इस मुद्दे की गंभीरता को और बढ़ा दिया है, जब राजस्थान के सीकर और उत्तराखंड के देहरादून में दो होनहार छात्रों ने कथित तौर पर परीक्षा के भारी दबाव के चलते अपनी जान ले ली। ये घटनाएँ हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हम एक समाज के तौर पर अपने युवाओं को पर्याप्त मानसिक और भावनात्मक समर्थन दे पा रहे हैं।
सीकर की दर्दनाक घटना: उमेश माली का तीसरा प्रयास
राजस्थान के सीकर में 22 वर्षीय उमेश माली, जो अपने NEET परीक्षा के तीसरे प्रयास की तैयारी कर रहे थे, ने सोमवार दोपहर (16 जून) अपने फ्लैट में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। 21 जून को उनकी परीक्षा थी। मूल रूप से झुंझुनूं के नवलगढ़ के रहने वाले उमेश के पिता मुंबई में टाइल्स ठेकेदारी का काम करते हैं और उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए सीकर में एक फ्लैट ले रखा था। उमेश अपनी माँ, बड़ी बहन और छोटे भाई के साथ रहते थे। घटना वाले दिन उमेश अपनी माँ को गाँव छोड़कर सीकर लौटे थे और अकेले थे। दोपहर करीब ढाई बजे उन्होंने यह कदम उठाया। जब उनकी बहन और भाई घर लौटे, तो उन्हें यह दर्दनाक मंजर देखने को मिला। चीख-पुकार सुनकर आस-पास के लोग इकट्ठा हुए और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस को तलाशी के दौरान उमेश के कमरे से एक सुसाइड नोट भी मिला है।
देहरादून की होनहार रिया कुमारी थापा
इसी तरह की एक अन्य दुखद घटना उत्तराखंड के देहरादून में सामने आई, जहाँ 16 जून को 20 वर्षीय रिया कुमारी थापा ने भी आत्महत्या कर ली। रिया पढ़ाई में बेहद होशियार थीं और उन्होंने 12वीं की परीक्षा में 97.6% अंक प्राप्त कर कॉलेज टॉप किया था। वह दो बार NEET की परीक्षा दे चुकी थीं और इस बार भी तैयारी में जुटी थीं, लेकिन पिछले काफी समय से वे परीक्षा को लेकर परेशान थीं। रिया अपनी पढ़ाई का खर्च खुद ट्यूशन पढ़ाकर उठाती थीं। उनके पिता कारगिल युद्ध के अनुभवी हैं, वहीं उनकी माँ गृहणी हैं। मंगलवार को जब रिया के कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो उनके परिजनों ने दरवाजा तोड़ा और उन्हें फांसी पर लटका पाया। पुलिस को उनके कमरे से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उन्होंने पढ़ाई में अपेक्षित सफलता न मिलने का जिक्र किया है। रिया देर रात तक पढ़ाई करती थीं, ऐसा उनके परिचितों ने बताया।
परीक्षा दबाव या पेपर लीक: पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत की चिंता
इन घटनाओं पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “सीकर में 22 वर्षीय नीट परीक्षार्थी उमेश माली की आत्महत्या का समाचार अत्यंत स्तब्ध करने वाला है। शोक संतप्त परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। नीट प्रश्नपत्र लीक के कारण इस वर्ष राजस्थान के प्रदीप मेघवाल सहित कई बच्चों ने आत्मघाती कदम उठाए हैं। यह आत्महत्या नहीं, बल्कि प्रश्न-पत्र लीक होने की व्यवस्था के सामने हमारे युवाओं का हौसला टूट रहा है।” गहलोत के इस बयान से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े होते हैं, जो छात्रों के तनाव का एक और कारण हो सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य और समर्थन की आवश्यकता
ये घटनाएँ केवल व्यक्तिगत त्रासदियाँ नहीं हैं, बल्कि एक बड़ी सामाजिक समस्या की ओर इशारा करती हैं। मेडिकल जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं का अत्यधिक दबाव, माता-पिता और स्वयं की अपेक्षाएँ, और असफलता के डर से छात्र अक्सर गहरे मानसिक तनाव में चले जाते हैं। ऐसे में उन्हें सही समय पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता और भावनात्मक समर्थन मिलना अत्यंत आवश्यक है। शिक्षा संस्थानों, परिवारों और सरकार को मिलकर एक ऐसा माहौल बनाना होगा जहाँ छात्र असफलता को सीखने का हिस्सा मानें और उन पर सफलता पाने का अनावश्यक दबाव न हो।
हमें मिलकर आगे बढ़ना होगा
यह समय है जब हम सभी को इन संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर बात करनी चाहिए। छात्रों को यह समझना चाहिए कि उनका जीवन किसी भी परीक्षा परिणाम से कहीं ज़्यादा कीमती है। परिवारों को अपने बच्चों पर अकादमिक प्रदर्शन के लिए अवास्तविक दबाव डालने से बचना चाहिए और उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। सरकार और परीक्षा आयोजकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि परीक्षा प्रणाली निष्पक्ष और पारदर्शी हो, ताकि छात्रों का विश्वास बना रहे। हमें मिलकर अपने युवाओं के लिए एक सुरक्षित और सहायक वातावरण बनाना होगा।