देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (National Eligibility cum Entrance Test) के परिणाम अक्सर छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। हालांकि, हाल के दिनों में NEET UG 2026 के परिणामों को लेकर कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह लेख कानपुर की एक छात्रा के बदले हुए स्कोर और एक 70 वर्षीय उम्मीदवार द्वारा आरक्षण की मांग जैसे दो प्रमुख विवादों पर विस्तार से चर्चा करेगा।
NEET स्कोर में बदलाव का चौंकाने वाला मामला: कानपुर की छात्रा आर्या सिंह
कानपुर की छात्रा आर्या सिंह का मामला NEET के नतीजों में संभावित तकनीकी गड़बड़ियों की ओर इशारा करता है। आर्या का आरोप है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा जारी NEET के परिणाम में उनकी OMR (Optical Mark Recognition) शीट के अनुसार उनके 609 अंक बन रहे थे। लेकिन, NTA की वेबसाइट पर परिणाम देखने के कुछ ही घंटों के भीतर उन्हें दो अलग-अलग स्कोर दिखाई दिए।
क्या हुआ था?
- 13 जुलाई की रात को जब NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर उनकी OMR शीट आई, तो उसमें प्रश्न नंबरों का क्रम (sequence) गलत था।
- अपने प्रश्नों का मिलान करने पर आर्या के 609 नंबर बन रहे थे।
- उन्होंने तुरंत NTA के चैलेंज पोर्टल पर इस गलती की शिकायत की।
- शिकायत के जवाब में NTA ने अपडेटेड OMR शीट भेजी, जिसमें प्रश्नों का क्रम तो सही था, लेकिन स्कोर 609 ही रहा।
- इसके बाद, NTA की वेबसाइट पर उनका स्कोर बदलकर 540 और फिर कुछ ही घंटों में चौंकाने वाला 167 अंक दिखने लगा।
आर्या का सीधा सवाल है कि एक ही छात्र के कुछ घंटों के भीतर दो अलग-अलग परिणाम कैसे जारी हो सकते हैं? वर्तमान में NTA की वेबसाइट पर उनका स्कोर 167 अंक ही दिख रहा है, जिसके आधार पर उनकी अखिल भारतीय रैंक (All India Rank) 12,52,036 और श्रेणी रैंक (Category Rank) 3,67,585 है। आर्या ने अपने पास मौजूद सभी सबूतों (स्क्रीनशॉट, OMR शीट आदि) के साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री और NTA को ईमेल भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर कोई तकनीकी त्रुटि हुई है तो उसे जल्द सुधारा जाना चाहिए।
यह आर्या का दूसरा NEET प्रयास था। उन्होंने बताया कि 2025 में भी उन्हें परिणाम संबंधी कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ा था, लेकिन तब उनके पास पर्याप्त सबूत नहीं थे। इस बार उन्होंने सभी दस्तावेज सुरक्षित रखे हैं और अगर उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती है, तो वह इस मामले को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय तक ले जाने को तैयार हैं। यह मामला परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों के अधिकारों की रक्षा के महत्व को रेखांकित करता है।
70 वर्ष की उम्र में डॉक्टर बनने का सपना और आरक्षण की लड़ाई: अशोक बहरा
NEET UG 2026 के सबसे उम्रदराज उम्मीदवारों में से एक, 70 वर्षीय अशोक बहरा एक अलग तरह की लड़ाई लड़ रहे हैं। वे डॉक्टर बनने के अपने आजीवन सपने को पूरा करने में जुटे हैं और मेडिकल कॉलेजों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरक्षण की मांग को लेकर कोर्ट पहुंच गए हैं।
अशोक बहरा की मांग और तर्क:
- उन्होंने लखनऊ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मेडिकल कॉलेजों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1% आरक्षण की मांग की है।
- उनका तर्क है कि यदि वरिष्ठ नागरिकों को मेडिकल शिक्षा हासिल करने का अधिकार है, तो उन्हें प्रवेश में भी उचित अवसर मिलना चाहिए।
- उन्होंने याचिका में बताया कि NEET UG में दिव्यांगों, स्वतंत्रता सेनानियों, पूर्व सैनिकों और अन्य विशेष वर्गों को आरक्षण मिलता है, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
- उनका कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर भी यदि कोई व्यक्ति मेडिकल शिक्षा प्राप्त करना चाहता है और परीक्षा उत्तीर्ण करने की क्षमता रखता है, तो उसे समान अवसर मिलना चाहिए।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अशोक बहरा ने इस मांग को लेकर केंद्र सरकार को आवेदन भी भेजे थे, लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने पर उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाया। उनकी याचिका में केंद्र सरकार की मौजूदा नीति को मनमाना और तर्कहीन बताया गया है, जो समानता और न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। अशोक बहरा ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि केंद्र सरकार को MBBS प्रवेश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरक्षण या अलग कोटा देने पर विचार करने और इस संबंध में उचित नीति तैयार करने का निर्देश दिया जाए।
अशोक बहरा का पूरा परिवार चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ा है, उनकी पत्नी डॉ. मंजू बहरा एक स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं और परिवार में लगभग 20 डॉक्टर हैं। उन्होंने 1974 में पहली बार मेडिकल प्रवेश परीक्षा दी थी, लेकिन सफल नहीं हुए। 2023 में भी उन्होंने प्रयास किया, लेकिन परीक्षा केंद्र देर से पहुंचने के कारण उन्हें अनुमति नहीं मिली। तीन साल बाद, 2026 में उन्होंने फिर हिम्मत जुटाई और NEET UG परीक्षा दी। उनकी यह यात्रा “सीखने की कोई उम्र नहीं होती” की कहावत को सही साबित करती है।
निष्कर्ष: पारदर्शिता और समान अवसर की आवश्यकता
ये दोनों मामले NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा प्रणाली में सुधार और संवेदनशीलता की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हैं। जहाँ एक ओर, आर्या सिंह का मामला तकनीकी गड़बड़ियों की जवाबदेही और छात्रों के परिणामों की पवित्रता सुनिश्चित करने की मांग करता है, वहीं अशोक बहरा का मामला शिक्षा में समान अवसर और आजीवन सीखने के अधिकार की वकालत करता है। NTA और सरकार से अपेक्षा है कि वे इन शिकायतों का गंभीरता से संज्ञान लें और एक निष्पक्ष, पारदर्शी तथा समान अवसर प्रदान करने वाली शिक्षा प्रणाली सुनिश्चित करें।