NIEPVD देहरादून: दृष्टिबाधित छात्रों का शिक्षा और मूलभूत अधिकारों के लिए संघर्ष

देहरादून के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPVD) में इन दिनों दृष्टिबाधित छात्र-छात्राएं अपने अधिकारों और बेहतर भविष्य के लिए आवाज उठा रहे हैं। बीते पांच दिनों से वे संस्थान में व्याप्त कुव्यवस्थाओं और अनदेखी के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश में दिव्यांग छात्रों के शिक्षा अधिकार और उनकी गरिमा के लिए एक बड़ा संघर्ष है।

क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं NIEPVD के छात्र?

छात्रों का यह आंदोलन कई गंभीर मुद्दों पर आधारित है, जो उनकी शिक्षा और दैनिक जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं। छात्रों की मुख्य मांगें और शिकायतें इस प्रकार हैं:

1. शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की कमी

  • छात्रों का आरोप है कि उन्हें अच्छी शिक्षा, योग्य शिक्षक और पर्याप्त किताबें नहीं मिल रही हैं।
  • संस्थान में प्रशिक्षित प्रशिक्षकों की कमी एक बड़ी समस्या है, जिसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है।

2. छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) की बहाली

  • 12वीं कक्षा के बाद दृष्टिबाधित छात्रों को सरकार से मिलने वाली स्कॉलरशिप बंद कर दी गई है, जो उनकी उच्च शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी। छात्र इसकी तत्काल बहाली की मांग कर रहे हैं।

3. दुर्व्यवहार और शारीरिक हिंसा के गंभीर आरोप

  • छात्रों ने संस्थान में बुरे बर्ताव और कुछ मामलों में शारीरिक हिंसा के गंभीर आरोप लगाए हैं। एक छात्रा के अनुसार, कुछ बच्चों को चोट पहुंचाई जाती है और लात-घूंसों से मारपीट भी होती है।

4. बहु-दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष सुविधाओं का अभाव

  • संस्थान में मल्टी-डिसेबल (एक से अधिक दिव्यांगता वाले) बच्चों को भी प्रवेश दिया गया है, लेकिन उनकी विशेष देखभाल के लिए अलग यूनिट, स्पेशल स्टाफ और प्रशिक्षित शिक्षकों का अभाव है। छात्रों का कहना है कि ऐसे बच्चों के साथ भी मारपीट की जाती है, जबकि उन्हें विशेष मार्गदर्शन और देखभाल की आवश्यकता होती है।

5. किताबों की बढ़ती कीमतें और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी

  • छात्र सस्ती और सुलभ किताबों की मांग कर रहे हैं, क्योंकि उनकी कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और उन्हें पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिल रही।
  • बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और डिस्पेंसरी में दुर्व्यवहार की शिकायतें भी सामने आई हैं।

6. छात्रावास की व्यवस्था और भोजन की गुणवत्ता

  • छात्रों ने छात्रावास के खाने की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई है, जो लगातार खराब बनी हुई है।

7. खराब मोबाइल फोन का मुद्दा

  • ADIP योजना के तहत नवंबर 2020 में मिले मोबाइल फोन में मार्च 2021 से तकनीकी समस्याएं आने लगी थीं। कई बार शिकायत के बावजूद, नवंबर 2022 में नए फोन देने का आश्वासन मिला, लेकिन अप्रैल 2023 तक भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

छात्रों की चेतावनी और आगे की राह

छात्रों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन के साथ दो दौर की बातचीत की है, लेकिन उनकी मांगों का कोई समाधान नहीं निकला है। इस कारण उन्होंने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है और यदि उनकी बात नहीं सुनी गई, तो उन्हें भूख हड़ताल पर बैठने को मजबूर होना पड़ेगा।

सोशल मीडिया पर भी कई लोग इन छात्रों के समर्थन में आगे आए हैं। एक यूजर ने इसे “संवेदनशील व्यवस्था के लिए शर्मनाक” बताया है और मंत्रालय तथा संस्थान से तुरंत हस्तक्षेप कर छात्रों की जायज मांगों का समाधान करने की अपील की है। छात्रों का कहना है कि वे काफी समय से अपनी मांगें रख रहे थे और लिखित में भी अनुरोध किया था, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो उन्हें प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।

एक समावेशी शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता

यह घटना हमें देश में दिव्यांग छात्रों के लिए एक समावेशी और संवेदनशील शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता की याद दिलाती है। दृष्टिबाधित छात्रों को समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान मिलना उनका मूलभूत अधिकार है। उम्मीद है कि जल्द ही इन छात्रों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा और उन्हें एक बेहतर व सम्मानजनक भविष्य मिल पाएगा।

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