पौड़ी गढ़वाल: छात्रों ने उठाई अपनी सुरक्षा की आवाज़, जर्जर पेड़ों को हटाने की मांग

पौड़ी गढ़वाल: छात्रों ने उठाई अपनी सुरक्षा की आवाज़, जर्जर पेड़ों को हटाने की मांग

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में, बी.आर. मॉडर्न स्कूल के छात्रों ने एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपनी एकजुटता और जागरूकता का परिचय दिया। 27 अगस्त 2026 को, ये छात्र अपने हाथों में ड्रम लेकर वन विभाग के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे। उनकी मांग स्पष्ट थी: स्कूल के रास्ते पर मौजूद खतरनाक और जर्जर पेड़ों को तुरंत हटाया जाए, जो उनकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं।

छात्रों का प्रदर्शन: सुरक्षा की अनदेखी पर आवाज़

छात्रों ने बताया कि ये पेड़ लंबे समय से जर्जर अवस्था में हैं, जिनकी जड़ें खोखली हो चुकी हैं। बारिश और तेज़ हवाओं के दौरान इनके गिरने का डर हमेशा बना रहता है, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों और राहगीरों की जान को खतरा हो सकता है। यह सिर्फ छात्रों की चिंता नहीं थी, बल्कि पूरे स्कूल प्रशासन और स्थानीय समुदाय की भी चिंता थी। बच्चों ने ड्रम बजाकर अधिकारियों का ध्यान अपनी ओर खींचा और अपनी गंभीर मांग को उनके सामने रखा। यह एक सशक्त संदेश था कि जब सुरक्षा की बात आती है, तो बच्चे भी अपनी आवाज़ उठाने में पीछे नहीं हटते।

एक साल से शिकायतों की अनदेखी, फिर कार्रवाई का वादा

यह मामला केवल एक दिन के विरोध प्रदर्शन का नहीं था। बी.आर. मॉडर्न स्कूल और स्थानीय लोग पिछले लगभग एक साल से इन खतरनाक पेड़ों को हटाने के लिए शिकायतें कर रहे थे। स्कूल प्रशासन ने मुख्यमंत्री कार्यालय, जिलाधिकारी और वन विभाग तक लिखित शिकायतें भेजी थीं, लेकिन इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। स्कूल के प्रिंसिपल, दामोदर ममगाई ने बताया कि वे 2025 से इन पेड़ों की जर्जर स्थिति के बारे में वन विभाग से लगातार संपर्क में थे। उन्होंने कहा, “जब कहीं भी कोई समाधान नहीं मिला, तो बच्चों की सुरक्षा की चिंता के कारण मुझे यहां आना पड़ा।”

प्रशासन की गंभीरता और त्वरित कार्रवाई का आश्वासन

छात्रों के प्रदर्शन और प्रिंसिपल की चिंता को गंभीरता से लेते हुए, वन विभाग के डीएफओ (DFO) महातिम यादव ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि स्कूल के रास्ते पर मौजूद खतरनाक पेड़ों को चिन्हित कर लिया गया है। डीएफओ यादव ने घोषणा की कि आगामी दो दिनों के भीतर इन पेड़ों को काटने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा को पेड़ों की वजह से खतरा न हो, इस बात का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

सुरक्षा पहले: एक ज़रूरी सबक

यह घटना हमें सिखाती है कि नागरिक, विशेषकर बच्चे, जब अपनी सुरक्षा और अधिकारों के लिए एकजुट होकर आवाज़ उठाते हैं, तो प्रशासन को कार्रवाई करने पर मजबूर होना पड़ता है। पौड़ी गढ़वाल के इन छात्रों ने न केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि यह भी दिखाया कि सामूहिक प्रयास और दृढ़ संकल्प से कैसे बदलाव लाया जा सकता है। यह मुद्दा पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मानव सुरक्षा के महत्व को भी उजागर करता है।

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