6 अप्रैल 2026 — यह तारीख भारत के परमाणु इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित भारत के पहले स्वदेशी 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने रात 8:26 बजे पहली क्रिटिकैलिटी सफलतापूर्वक प्राप्त कर ली। यह उपलब्धि भारत को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया के चुनिंदा देशों की श्रेणी में खड़ा करती है।
🔬 क्रिटिकैलिटी का मतलब क्या है?
क्रिटिकैलिटी का अर्थ है — रिएक्टर के भीतर नियंत्रित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया (Controlled Nuclear Chain Reaction) की शुरुआत होना। इसका मतलब यह नहीं कि रिएक्टर अभी बिजली बना रहा है, बल्कि यह पुष्टि होती है कि रिएक्टर की मूल भौतिकी ठीक वैसी काम कर रही है जैसी डिजाइन की गई थी। इसके बाद रिएक्टर को ग्रिड से जोड़ने से पहले चरणबद्ध बिजली परीक्षण और सुरक्षा जांच की जाएगी।
🇮🇳 भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम
महान वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने 1950 के दशक में भारत के लिए एक दूरदर्शी तीन-चरणीय परमाणु रणनीति बनाई थी, जो देश के सीमित यूरेनियम भंडार और विशाल थोरियम भंडार को ध्यान में रखकर बनाई गई थी:
| चरण | रिएक्टर प्रकार | ईंधन | स्थिति |
|---|---|---|---|
| ⚛️ चरण 1 | दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) | प्राकृतिक यूरेनियम | ✅ जारी |
| ⚡ चरण 2 | फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) | प्लूटोनियम + यूरेनियम | 🟢 अभी शुरू (PFBR) |
| 🌟 चरण 3 | उन्नत भारी जल रिएक्टर (AHWR) | थोरियम-232 / यूरेनियम-233 | 🔜 भविष्य |
🏭 PFBR क्या है और यह खास क्यों है?
PFBR एक सोडियम-कूल्ड फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है जिसे पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाया गया है। इसे इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR), कलपक्कम ने डिजाइन किया और भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) ने निर्मित किया। इस रिएक्टर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जितना ईंधन इस्तेमाल करता है, उससे अधिक नया ईंधन तैयार करता है — इसीलिए इसे “जादुई अक्षय पात्र” की संज्ञा दी जा रही है।
- ⚙️ क्षमता: 500 MWe
- 🧪 ईंधन: यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (MOX)
- 🌡️ शीतलक: तरल सोडियम
- 🏗️ निर्माण शुरू: 2004
- 💰 लागत: ₹8,181 करोड़ (मूल अनुमान ₹3,500 करोड़)
- 🏆 डिजाइनकर्ता: IGCAR | निर्माता: BHAVINI
🌍 वैश्विक महत्व: रूस के बाद भारत
इस उपलब्धि के साथ भारत, रूस के बाद दुनिया का दूसरा देश बन गया है जो व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का संचालन करता है। अमेरिका, फ्रांस, जापान और चीन समेत कई देशों ने इस दिशा में प्रयास किए लेकिन लागत, तकनीकी जटिलताओं और सुरक्षा चिंताओं के कारण अपने कार्यक्रम बंद कर दिए। भारत की यह उपलब्धि इसलिए और भी खास है क्योंकि यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से हासिल की गई है।
☢️ थोरियम: भारत का ऊर्जा बीमा
भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडार हैं — लगभग 8,46,000 टन, जो मुख्य रूप से केरल, तमिलनाडु और ओडिशा के तटीय इलाकों में पाए जाते हैं। यह दुनिया के कुल थोरियम भंडार का लगभग 25% है। PFBR की सफलता इसी थोरियम-आधारित भविष्य की नींव है। अनुमान है कि थोरियम चक्र के पूरी तरह सफल होने पर भारत 400 से 500 साल तक अपनी ऊर्जा जरूरतें खुद पूरी कर सकेगा।
🗣️ पीएम मोदी का बयान
“आज भारत अपनी नागरिक परमाणु यात्रा में एक निर्णायक कदम उठा रहा है। कलपक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है। यह उपलब्धि हमारी वैज्ञानिक क्षमता की गहराई और हमारी इंजीनियरिंग उद्यम की ताकत को दर्शाती है।”
— प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 6 अप्रैल 2026
🔮 आगे का रास्ता
क्रिटिकैलिटी हासिल करने के बाद PFBR को चरणबद्ध तरीके से बिजली उत्पादन के लिए तैयार किया जाएगा। पूर्ण क्षमता से चालू होने पर यह रिएक्टर 500 मेगावाट बिजली देगा। इसकी सफलता के बाद कलपक्कम सहित देश के अन्य स्थानों पर 600 MWe क्षमता के बड़े फास्ट ब्रीडर रिएक्टर बनाने की योजना है। यह भारत को ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर तेजी से ले जाएगा।
📌 स्रोत: परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE), भारत सरकार | PIB | Jagran | DD News