उत्तर प्रदेश TGT परीक्षा में गलत प्रश्न: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माँगा आयोग से जवाब

हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) को एक बड़ी परीक्षा में गलत प्रश्नों के संबंध में गंभीरता से घेरा है। कोर्ट ने आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर यह बताने का आदेश दिया है कि प्रश्नपत्र कैसे तैयार किए जाते हैं और पूरी परीक्षा प्रक्रिया क्या है। यह मामला लाखों छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता से जुड़ा है।

टीजीटी इंग्लिश परीक्षा: 25% से अधिक प्रश्न गलत!

यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश टीजीटी इंग्लिश के पेपर से जुड़ा है, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

  • कुल 125 प्रश्नों में से 33 प्रश्न गलत पाए गए।
  • शुरुआत में 29 प्रश्न पाठ्यक्रम (सिलेबस) से बाहर बताए गए थे।
  • कुछ उम्मीदवारों द्वारा आपत्ति (ऑब्जेक्शन) दर्ज कराने के बाद, विशेषज्ञ जांच में 4 और प्रश्न गलत साबित हुए।

इस तरह, कुल 33 गलत प्रश्नों का मतलब है कि लगभग एक चौथाई (25% से अधिक) पेपर त्रुटिपूर्ण था, जो किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।

आयोग का समाधान बनाम हाईकोर्ट की नाराजगी

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने अदालत को बताया था कि गलत प्रश्नों के अंक बाकी सही प्रश्नों में बाँट दिए गए हैं और एक नई संशोधित चयन सूची जारी की गई है।

हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस समाधान पर गहरी असंतुष्टि व्यक्त की। कोर्ट ने साफ कहा:

“जब 25% से अधिक प्रश्न गलत हैं तो केवल अंक बाँटना इसका उचित समाधान नहीं माना जा सकता।”

अदालत ने यह भी जोर दिया कि प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की गहन जांच की आवश्यकता है। यह छात्रों के साथ-साथ पूरी शिक्षा प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, क्योंकि ऐसी गलतियाँ न केवल छात्रों के मनोबल को तोड़ती हैं बल्कि उनकी कड़ी मेहनत और भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।

परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की आवश्यकता

इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह सख्त रुख भारतीय परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है। सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में इतनी बड़ी संख्या में गलत प्रश्नों का पाया जाना एक गंभीर चूक है, जो चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। कोर्ट का हस्तक्षेप यह सुनिश्चित करेगा कि आयोग अपनी प्रक्रियाओं की समीक्षा करे और भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि छात्रों का विश्वास बना रहे और उन्हें उचित न्याय मिल सके।

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