UPSC और SSC भर्ती में बड़े बदलाव: जानें नए नियम और उम्मीदवारों को क्या फायदा मिलेगा

सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ी खबर है! संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने अपनी भर्ती प्रक्रियाओं में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, कुशल और उम्मीदवार-हितैषी बनाना है। कार्मिक राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद में इन बदलावों की जानकारी दी है। आइए जानते हैं क्या हैं ये नए नियम और उनसे आपको क्या फायदा होगा।

SSC में ‘स्लाइडिंग मैकेनिज्म’ फ्रेमवर्क: खाली सीटों की समस्या होगी खत्म!

अक्सर देखा जाता था कि एक ही उम्मीदवार का चयन SSC की कई भर्ती परीक्षाओं में हो जाता था। वह उम्मीदवार किसी एक पद को चुनकर बाकी बची सीटों को खाली छोड़ देता था, जिससे निचले रैंक वाले योग्य उम्मीदवारों को मौका नहीं मिल पाता था और सीटें खाली रह जाती थीं। इस समस्या को दूर करने के लिए SSC ने ‘स्लाइडिंग मैकेनिज्म’ फ्रेमवर्क पेश किया है।

  • कैसे काम करेगा यह? इस मैकेनिज्म के तहत, यदि कोई उम्मीदवार एक से अधिक पदों के लिए योग्य होता है, और वह किसी एक पद को चुन लेता है, तो उसकी खाली की गई सीटों पर मेरिट के आधार पर निचले पायदान वाले अगले योग्य उम्मीदवारों को अपग्रेड करके मौका दिया जाएगा।
  • फायदा: इससे कोई भी वैकेंसी बेकार नहीं जाएगी और अधिक से अधिक योग्य उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी मिल पाएगी।

UPSC में AI आधारित वेरिफिकेशन और फेस ऑथेंटिकेशन

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने अपनी सिविल सेवा परीक्षा (CSE) में तकनीक का सहारा लिया है ताकि प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाया जा सके।

  • AI आधारित वेरिफिकेशन: अब सिविल सेवा परीक्षा (CSE) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित वेरिफिकेशन लागू किया गया है। यह सिस्टम उम्मीदवारों द्वारा किए गए अटेम्प्ट्स का डाटा रखेगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
  • फेस ऑथेंटिकेशन (चेहरा पहचानना): परीक्षा हॉल में नकल रोकने के लिए ‘फेस ऑथेंटिकेशन’ यानी चेहरा पहचानना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे फर्जी उम्मीदवारों की पहचान करना आसान होगा और परीक्षा की शुचिता बनी रहेगी।

प्रोविजनल जॉइनिंग लेटर और वेरिफिकेशन में आसानी

सरकारी नौकरी मिलने के बाद भी कई बार जॉइनिंग की प्रक्रिया लंबी हो जाती है। सरकार ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:

  • सेल्फ-अटेस्टेशन पर प्रोविजनल जॉइनिंग: अब उम्मीदवारों को ‘सेल्फ-अटेस्टेशन’ (स्व-सत्यापन) के आधार पर प्रोविजनल जॉइनिंग लेटर देने का प्रावधान किया गया है। इससे शुरुआती चरण में विभागों पर कागजी कार्रवाई का बोझ कम होगा और जॉइनिंग में तेजी आएगी।
  • चरित्र और जाति प्रमाण पत्र का वेरिफिकेशन: चरित्र और जाति प्रमाण पत्र के वेरिफिकेशन के लिए विभागों को अधिकतम 6 महीने का समय दिया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि समय पर वेरिफिकेशन रिपोर्ट नहीं आती है, तो भी कैंडिडेट की सेवा पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। यह नियम उम्मीदवारों को बेवजह की देरी और मानसिक तनाव से बचाएगा।

बढ़ी पारदर्शिता और दिव्यांगजनों के लिए सुविधाएं

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और सभी उम्मीदवारों को समान अवसर प्रदान करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं:

  • ऑब्जेक्शन दर्ज कराने की फीस में कमी: UPSC परीक्षा में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए, आंसर-की जारी होने पर ऑब्जेक्शन दर्ज कराने की फीस घटा दी गई है। इससे अधिक उम्मीदवार अपनी आपत्ति दर्ज करा पाएंगे और किसी भी संभावित त्रुटि को सुधारा जा सकेगा।
  • दिव्यांगजनों को परीक्षा केंद्र चुनने की गारंटी: दिव्यांगजनों को उनकी पसंद का परीक्षा केंद्र चुनने की गारंटी दी गई है। यह सुविधा उन्हें बिना किसी बाधा के परीक्षा में शामिल होने में मदद करेगी और उनके लिए परीक्षा देना और भी सुगम बनाएगी।

ये सभी बदलाव दर्शाते हैं कि सरकार भर्ती प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और उम्मीदवारों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इन सुधारों से लाखों उम्मीदवारों को सीधा फायदा मिलेगा और सरकारी नौकरी पाने का उनका सपना साकार हो सकेगा।

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