UPTET 2026: कार्यरत शिक्षकों के लिए नए नियम और परीक्षा से जुड़ी हर ज़रूरी जानकारी
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026, 2 से 4 जुलाई तक एक बड़े बदलाव के साथ संपन्न हो रही है। इस बार यह परीक्षा न सिर्फ नए उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि उन लाखों सेवारत शिक्षकों के लिए भी एक चुनौती बन गई है जिनकी नौकरी का भविष्य इस पर टिका है। आइए जानते हैं UPTET 2026 से जुड़े सभी अहम पहलू और शिक्षकों पर इसका क्या असर होगा।
सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए नए नियम
यूपी सरकार ने UPTET को लेकर सेवारत शिक्षकों के लिए दो महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं:
- अब कार्यरत शिक्षकों को भी TET परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा।
- परीक्षा में शामिल होने वाले सेवारत शिक्षकों को स्कूल से छुट्टी मिलेगी।
यह परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाएगी, और शिक्षकों को इसे पास करने के लिए 2 साल का समय दिया गया है। यदि कोई शिक्षक इस अवधि में परीक्षा पास नहीं कर पाता है, तो उसे अपनी नौकरी गंवानी पड़ेगी, भले ही उनकी उम्र 40-45 साल क्यों न हो।
सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला और इसका असर
इस फैसले की जड़ें 1 सितंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ द्वारा दिए गए एक निर्णय में हैं। इस फैसले के अनुसार, वे सभी उम्मीदवार जो बिना TET पास किए प्राइमरी शिक्षक बन गए थे, उन्हें भी अब TET पास करना अनिवार्य होगा, अन्यथा उन्हें नौकरी से हटा दिया जाएगा। इस निर्देश के बाद, लगभग 1.85 लाख शिक्षक अपनी नौकरी बचाने के लिए यह परीक्षा दे रहे हैं।
हालांकि, इस फैसले का शिक्षकों ने पुरजोर विरोध किया। प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजे गए और संसद में भी कानून में संशोधन की मांग उठी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के सामने ये सभी प्रयास व्यर्थ साबित हुए।
शिक्षकों पर तनाव और चुनौतियाँ
कई ऐसे शिक्षक हैं जो 20-25 सालों से पढ़ा रहे हैं और उन्हें इतनी लंबी सेवा के बाद फिर से परीक्षा देना तर्कसंगत नहीं लगता। शिक्षक संघों का दावा है कि इस तनाव के कारण 2 शिक्षकों की मौत भी हो चुकी है, जो इस स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
UPTET 2026 में उम्मीदवारों की संख्या
इस वर्ष UPTET 2026 में कुल 19 लाख 94 हजार 661 उम्मीदवार शामिल हो रहे हैं। इनमें से 1 लाख 85 हजार 791 उम्मीदवार ऐसे हैं जो पहले से बेसिक स्कूलों में कार्यरत शिक्षक हैं और अब अपनी नौकरी बचाने के लिए TET परीक्षा पास करना चाहते हैं। वहीं, 18 लाख 08 हजार 870 नए उम्मीदवार भी इस परीक्षा में शामिल हो रहे हैं।
यह परीक्षा प्रदेश के 60 जिलों में 955 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जा रही है। वाराणसी में सबसे ज्यादा 68 केंद्र बनाए गए हैं, जहां 1 लाख 27 हजार 239 उम्मीदवार परीक्षा दे रहे हैं। प्रयागराज में 53 केंद्रों पर 76 हजार 634 और लखनऊ में 45 केंद्रों पर 76 हजार 720 उम्मीदवार शामिल हुए हैं।
कड़ी सुरक्षा और पारदर्शी व्यवस्था
परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित करने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं:
- हर जिले में ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं, जिनमें आयोग के सदस्य, रिटायर्ड IAS और IPS अधिकारी शामिल हैं।
- परीक्षा केंद्रों पर मल्टी-लेयर सुरक्षा, बायोमेट्रिक और आइरिस स्कैन लागू किया गया है।
- पूरी परीक्षा की सीसीटीवी लाइव फीड के जरिए कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से निगरानी की जा रही है।
- नकल माफिया पर लगाम लगाने के लिए STF की टीमें भी तैनात की गई हैं।
NIOS D.El.Ed. (ODL) कोर्स वाले अभ्यर्थियों के लिए एक विशेष नोटिस भी जारी किया गया है। केवल वे अभ्यर्थी जिनके पास 18 माह का D.El.Ed. (ODL) कोर्स है और जो 31.03.2015 अथवा उससे पूर्व सेवा में थे, उन्हें ही UPTET 2026 में औपबन्धिक रूप से सम्मिलित होने की अनुमति दी जाएगी।
लंबे अंतराल के बाद UPTET
यह UPTET परीक्षा लगभग साढ़े चार साल के लंबे अंतराल के बाद हो रही है। इससे पहले UPTET परीक्षा 2022 में हुई थी, जबकि 2021 में पेपर लीक होने के कारण परीक्षा टाल दी गई थी। इस लंबे इंतजार के बाद हो रही परीक्षा का महत्व और भी बढ़ जाता है।
निष्कर्ष
UPTET 2026 उत्तर प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह परीक्षा न केवल नए शिक्षकों के लिए दरवाजे खोल रही है, बल्कि लाखों सेवारत शिक्षकों के करियर को भी परिभाषित करेगी। सरकार और आयोग द्वारा अपनाई गई सख्त नीतियां और सुरक्षा व्यवस्था, परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं, हालांकि इससे जुड़े मानवीय पहलुओं और शिक्षकों के तनाव को भी समझना ज़रूरी है।