Home » ABES कॉलेज हॉस्टल विवाद: वॉर्डन पर लगे चोरी के आरोपों से छात्र सुरक्षा और प्राइवेसी पर सवालिया निशान

हाल ही में गाजियाबाद के प्रतिष्ठित ABES इंजीनियरिंग कॉलेज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसने पूरे शैक्षिक जगत और छात्र समुदाय में हलचल मचा दी है। इस वीडियो में हॉस्टल के एक वॉर्डन को कथित तौर पर छात्र के कमरे में घुसकर उसकी निजी चीज़ों को खंगालते और नकदी निकालते हुए देखा जा रहा है। इस घटना ने हॉस्टल में छात्र सुरक्षा, प्राइवेसी और वॉर्डन के अधिकारों की सीमा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वायरल वीडियो में क्या है?

वायरल वीडियो ABES इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल का बताया जा रहा है। इसमें वॉर्डन सुनील कुमार, जिन्हें छात्र प्यार से ‘मारियो’ भी बुलाते हैं, एक छात्र के हॉस्टल रूम में प्रवेश करते हुए दिख रहे हैं। वीडियो में वॉर्डन अलमारी, बैग और दराज़ें खोलकर सामान की तलाशी लेते नज़र आते हैं। कुछ देर बाद, वह छात्र के वॉलेट से कुछ रुपए निकालकर अपनी जेब में रखते हुए दिखाई देते हैं। इसके अलावा, वह छात्रों के कमरे से लाइटर जैसी प्रतिबंधित चीज़ों की भी जांच करते हुए रिकॉर्ड हुए हैं।

उपयोगकर्ताओं और छात्रों के अनुसार, यह घटना उस समय की है जब छात्र अपने सेमेस्टर की परीक्षाओं में व्यस्त थे और अपने कमरों में मौजूद नहीं थे। इस वायरल फुटेज ने ऑनलाइन माध्यमों पर वॉर्डन के इस कृत्य को लेकर ‘चोर वॉर्डन’ जैसे हैशटैग के साथ तीखी बहस छेड़ दी है।

छात्रों के आरोप और पूर्व शिकायतें

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद, कई छात्रों ने अपनी आपबीती साझा की है। उनका आरोप है कि हॉस्टल से सामान गायब होने की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन उन पर कभी गंभीरता से कार्रवाई नहीं की गई। कुछ छात्रों ने यह भी दावा किया कि परीक्षा के दौरान कमरों से चोरी की घटनाएँ पहले भी हो चुकी हैं, जिससे छात्रों में असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है। यह स्थिति हॉस्टल के अंदर छात्रों के सामान और उनकी निजी जगह की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ पैदा करती है।

क्या ये एक ‘साइलेंट रेड’ थी? वैकल्पिक दृष्टिकोण

हालांकि, इस वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर एक और पक्ष भी सामने आया है। कुछ यूज़र्स इस घटना को भ्रामक बता रहे हैं और सुझाव दे रहे हैं कि यह एक ‘साइलेंट रेड’ हो सकती है। उनके अनुसार, हॉस्टल वॉर्डन अक्सर ऐसे समय में कमरों की तलाशी लेते हैं जब छात्र मौजूद न हों, ताकि वे हॉस्टल के नियमों के विरुद्ध पाई जाने वाली प्रतिबंधित चीज़ों जैसे लाइटर, हीटर या अन्य अवैध सामान की जांच कर सकें।

  • एक यूजर ने लिखा, “हमारे हॉस्टल के दिनों में भी ऐसा होता था। ये आमतौर पर हॉस्टल में बैन गैरकानूनी चीजें ढूंढने के लिए किया जाता था। वो (वॉर्डन) कुछ चोरी नहीं कर रहा। इसे ‘साइलेंट रेड’ कहते हैं।”
  • एक अन्य यूज़र ने यह भी तर्क दिया, “यह थोड़ा मिसलीडिंग लग रहा है। वह बस लाइटर उठा रहा है। ज्यादा संभावना यही है कि वीडियो उसने खुद रिकॉर्ड किया हो, ताकि ये दिखा सके कि वो हॉस्टल में रहने वाले लोगों पर झूठा आरोप नहीं लगा रहा।”

यह वैकल्पिक दृष्टिकोण घटना की जटिलता को बढ़ाता है और एकतरफा निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करने की आवश्यकता पर बल देता है।

कॉलेज प्रशासन की चुप्पी और आगे की राह

फिलहाल, ABES इंजीनियरिंग कॉलेज प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सोशल मीडिया पर लोग लगातार वॉर्डन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने कॉलेज कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था, हॉस्टल के नियम और छात्रों की प्राइवेसी के अधिकारों पर एक व्यापक बहस छेड़ दी है। यह देखना होगा कि कॉलेज प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या प्रतिक्रिया देता है और छात्रों के विश्वास को बहाल करने के लिए क्या कदम उठाता है।

यह घटना न केवल ABES कॉलेज, बल्कि देश भर के अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए भी एक सबक है कि उन्हें छात्रों की सुरक्षा, उनकी निजी जगह के सम्मान और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अपनी नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए।

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