हाल ही में हुए NEET UG पेपर लीक विवाद के बाद, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए संसदीय समिति से मुलाकात की। इस बैठक में NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह और नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) के अध्यक्ष अभिजात शेठ उपस्थित थे, जहाँ उन्होंने उठाए गए कदमों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।
परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर चर्चा और विदेशी मॉडल से सीखने का सुझाव
संसदीय समिति के सदस्यों ने भारत की परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए अमेरिका और चीन जैसे देशों से प्रेरणा लेने का सुझाव दिया। उनका मानना था कि इन देशों में बड़े पैमाने पर परीक्षाएं बिना किसी बड़ी शिकायत के सफलतापूर्वक आयोजित होती हैं। समिति ने इस बात पर जोर दिया कि हमें विदेशी प्रणालियों के अच्छे तरीकों को अपनाना चाहिए, ताकि देश में परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह से सुरक्षित और पुख्ता बन सके।
चीन का ‘गाओकाओ’ मॉडल: एक प्रेरणा
इस संदर्भ में, चीन की प्रवक्ता यू जिंग ने ‘गाओकाओ’ (Gaokao) नामक परीक्षा का एक वीडियो साझा किया, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा बताया गया है। उन्होंने लिखा कि यह भारत के JEE-NEET का संयुक्त रूप है, जिसमें 2 दिनों में 1.3 करोड़ छात्र भाग लेते हैं। ‘गाओकाओ’ के दौरान पूरा देश छात्रों के लिए एकजुट हो जाता है; कारखाने काम रोक देते हैं और सड़कें सूनी रहती हैं। इसकी तुलना में, भारत में NEET में आमतौर पर 20 लाख से अधिक और JEE में लगभग 15 लाख उम्मीदवार शामिल होते हैं। यह उदाहरण भारतीय परीक्षा प्रणालियों के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
पुनः परीक्षा और NTA-NMC का समन्वय
3 मई को आयोजित NEET UG परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के कारण 12 मई को रद्द कर दिया गया था। अब यह परीक्षा 21 जून को दोबारा आयोजित की जा रही है। पेपर विवाद के बाद यह तीसरी संसदीय समिति थी, जिसके सामने NTA और NMC के अधिकारी पेश हुए। इससे पहले, वे शिक्षा और सरकारी आश्वासनों से जुड़ी संसदीय समितियों के सामने भी अपनी बात रख चुके थे। अधिकारियों ने समिति को बताया कि उनका पूरा ध्यान 21 जून को होने वाली NEET की पुनः परीक्षा को पेन-पेपर फॉर्मेट में सफलतापूर्वक कराने पर है।
संसदीय समिति ने इस दौरान NTA का मनोबल बढ़ाने की बात कही और छात्रों का तनाव कम करने पर जोर दिया। इसके साथ ही, NTA और NMC के बीच बेहतर तालमेल बिठाने का सुझाव भी दिया गया, ताकि मेडिकल सीटों के खाली रहने की समस्या से बचा जा सके। समिति ने छात्रों में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की और सरकार से ऐसे छात्रों के परिवारों की मदद करने का आग्रह किया।
साल में कई बार NEET UG आयोजित करने का सुझाव
वर्तमान में, भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG साल में एक बार ही आयोजित की जाती है। संसदीय समिति के सदस्यों ने सुझाव दिया कि NEET UG को साल में 2-3 बार करवाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे छात्रों को परीक्षा पास करने के अधिक अवसर मिलेंगे और वे उन कारणों से परेशान नहीं होंगे जो उनके नियंत्रण से बाहर हैं। यह मांग पहले भी कई बार उठाई जा चुकी है। जुलाई 2018 में, तत्कालीन केंद्रीय HRD मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने घोषणा की थी कि NTA साल में दो बार JEE Main और NEET UG आयोजित करेगा, लेकिन इसे कभी लागू नहीं किया जा सका। हालांकि, 2023 में नेशनल मेडिकल कमीशन ने कहा था कि साल में दो बार NEET UG करना व्यावहारिक नहीं होगा, क्योंकि सभी MBBS सीटें एक ही काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से भरी जाती हैं।
NEET UG पेपर लीक: अब तक की कार्रवाई और महत्व
3 मई को NEET UG परीक्षा देश के 551 शहरों और विदेश के 14 सेंटरों में आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। 7 मई की शाम को परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिलने के बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया। 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 जून को पुनः परीक्षा का फैसला लिया गया। इस मामले की जांच CBI कर रही है और अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) भारत में मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में दाखिले के लिए एक राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है, जिसकी शुरुआत 2013 में हुई थी। इस परीक्षा के माध्यम से देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, आयुष (BAMS, BHMS) और नर्सिंग जैसे कोर्सेज में दाखिला मिलता है, जिसमें AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं। वर्तमान में देश में लगभग 1 लाख से अधिक MBBS और 27,000 से अधिक BDS सीटें हैं। इस पृष्ठभूमि में, NEET UG परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और विश्वसनीयता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।