झालावाड़ स्कूल में बाढ़ का मंजर: शिक्षकों और ग्रामीणों ने बचाई 80 बच्चों की जान
हाल ही में राजस्थान के झालावाड़ जिले के मनोहरथाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत टोडरी मीरा के झिकनी गांव में स्थित एक सरकारी स्कूल में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। रोजाना की तरह कक्षाएं चल रही थीं, तभी पास के बरसाती नाले में अचानक पानी का बहाव तेज़ हो गया। देखते ही देखते, नाले का गंदा और तेज़ पानी स्कूल परिसर में घुसने लगा, जिससे पूरा स्कूल पानी से घिर गया और अंदर मौजूद बच्चों में चीख-पुकार मच गई।
खतरे में पड़ी जान, ‘चेन’ बनाकर बच्चों का साहसिक बचाव
स्थिति इतनी विकट हो गई थी कि बच्चों को अकेले बाहर निकालना खतरनाक था। ऐसे में, स्कूल के 7 शिक्षकों और गांव वासियों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर एक मानव ‘चेन’ बनाई और इसी के सहारे एक-एक करके लगभग 80 बच्चों को तेज़ बहते पानी से सुरक्षित बाहर निकाला। यह घटना तेज़ बारिश के बीच बच्चों को स्कूल से समय पर छुट्टी न देने के कारण घटी, जिससे बच्चों की जान पर बन आई। सभी बच्चों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाया गया। हालांकि, नाले के तेज़ बहाव की चपेट में आने से स्कूल की करीब 50 फीट लंबी बाउंड्री वॉल भी टूट गई, जो कि सरकारी स्कूल सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को उजागर करती है।
सोशल मीडिया पर फूटा आक्रोश: शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर नाराजगी व्यक्त की। यूजर्स ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक झरना नहीं, बल्कि झालावाड़ के सरकारी स्कूल की तस्वीर है, जो सरकार के बेहतर शिक्षा के दावों पर सवाल उठाती है। लोगों ने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और जल निकासी व्यवस्था की कमी पर आक्रोश व्यक्त किया, इसे शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का प्रतीक बताया।
यह पहली घटना नहीं: झालावाड़ में छत ढहने से हुई थी 7 छात्रों की मौत
दुर्भाग्य से, झालावाड़ में सरकारी स्कूलों की बदहाली का यह कोई अकेला मामला नहीं है। इसी साल जुलाई में, झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र के पीपलोदी में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत गिरने से 7 छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि 17 बच्चे घायल हुए थे। उस समय भी करीब 60 बच्चे कक्षा में मौजूद थे। इस मामले में स्कूल के सभी 5 शिक्षकों को निलंबित किया गया था, क्योंकि बच्चों के बार-बार कहने पर भी कि मलबा गिर रहा है, शिक्षकों ने ध्यान नहीं दिया था। छत गिरने के बाद स्कूल खंडहर जैसा दिखने लगा था, और स्थानीय लोगों ने मलबे से बच्चों को निकालने में मदद की थी।
सरकारी स्कूलों में सुरक्षा और सुविधाओं की गंभीर चुनौतियाँ
ये घटनाएं भारत के सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे, सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक लापरवाही की गंभीर तस्वीर पेश करती हैं। चाहे वह बाढ़ का पानी स्कूल में घुसना हो, छत का ढह जाना हो, या फिर हॉस्टल में छात्रों को खराब गुणवत्ता का भोजन और अत्यधिक भीड़ में रहना पड़े, ये सभी मामले बच्चों के सुरक्षित और स्वस्थ शैक्षिक वातावरण के अधिकार पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। शिक्षा सिर्फ कक्षा के भीतर किताबें पढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बच्चों की सुरक्षा और कल्याण भी शामिल है। सरकार और संबंधित अधिकारियों को इन मुद्दों को गंभीरता से लेना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे बच्चे सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सकें।