मंडला के जर्जर स्कूल में तिरपाल के नीचे बच्चों की पढ़ाई: शिक्षा का एक मार्मिक संघर्ष
मध्य प्रदेश के मंडला जिले से सामने आया एक वीडियो शिक्षा व्यवस्था की चौंकाने वाली तस्वीर पेश करता है। ‘स्कूल चलें हम’ के नारे को दीवारों पर समेटे एक सरकारी स्कूल में बच्चे खुले आसमान के नीचे, एक फटी हुई तिरपाल की छत के नीचे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। यह केवल एक वीडियो नहीं, बल्कि हमारे बच्चों के भविष्य और शिक्षा के अधिकार पर मंडराते सवालों की एक कड़वी सच्चाई है।
मंडला के तलैया टोला में जर्जर स्कूल भवन की हकीकत
यह घटना मंडला के तलैया टोला की है, जहां पहली से पाँचवीं कक्षा तक के लगभग 25-28 छात्र एक ही स्थान पर एक साथ शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। स्कूल भवन की हालत इतनी दयनीय है कि उसकी दीवारें बड़े-बड़े दरारों से भरी हैं और छत इतनी टपकती है कि बरसात में बच्चों की किताबें भीग जाती हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, दो समर्पित शिक्षक उन्हें स्कूल के बाहर, एक अस्थायी तिरपाल के नीचे बैठकर पढ़ाने के लिए विवश हैं।
शिक्षकों का अथक प्रयास और बच्चों का सीखने का जज्बा
वीडियो में यह साफ देखा जा सकता है कि धूप में रखे एक व्हाइट बोर्ड के सहारे ये बच्चे अपने भविष्य की नींव रख रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि बच्चे पढ़ना चाहते हैं और वे हर संभव प्रयास कर रहे हैं ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो। हर दिन शिक्षक खुद ही तिरपाल बांधते हैं और शाम को उसे अगले दिन के लिए खोलकर रखते हैं। यह उनकी कर्तव्यनिष्ठा और बच्चों के प्रति समर्पण का बेजोड़ उदाहरण है।
खतरे के बीच पढ़ाई: सांप-बिच्छू का डर
जर्जर भवन के बाहर पढ़ने का मतलब सिर्फ मौसम की मार झेलना नहीं है, बल्कि इससे कई अन्य खतरे भी जुड़े हैं। शिक्षकों ने बताया कि खुले में पढ़ाई के दौरान सांप और बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का खतरा बना रहता है, और कई बार वे निकल भी आते हैं। यह स्थिति बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा करती है।
सरकारी उपेक्षा और अनसुनी गुहार
शिक्षकों ने कई बार भवन की मरम्मत और बेहतर व्यवस्था के लिए सरकार को पत्र लिखकर गुहार लगाई है, लेकिन अब तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है। यह सरकारी तंत्र की उदासीनता को दर्शाता है, जहाँ बच्चों के बुनियादी शिक्षा के अधिकार और सुरक्षित सीखने के माहौल को नजरअंदाज किया जा रहा है।
शिक्षा के अधिकार पर सवाल
भारत में शिक्षा का अधिकार एक मौलिक अधिकार है, और प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित एवं उचित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने का हक है। मंडला के इस स्कूल की स्थिति हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम वास्तव में अपने बच्चों को वह शिक्षा दे पा रहे हैं, जिसके वे हकदार हैं? यह घटना न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।
हमें उम्मीद है कि यह मार्मिक कहानी संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करेगी और इन बच्चों को जल्द ही एक सुरक्षित और बेहतर सीखने का वातावरण मिलेगा।