एमबीबीएस इंटर्न स्टाइपेंड: देश भर में डॉक्टरों की हड़ताल क्यों है ज़रूरी? जानें कारण और कानूनी पहलू
भारत में चिकित्सा इंटर्नशिप (Medical Internship) एक महत्वपूर्ण चरण है, जहां भावी डॉक्टर अपनी शिक्षा को व्यावहारिक अनुभव में बदलते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से, देश भर के मेडिकल इंटर्न डॉक्टर अपने स्टाइपेंड (मासिक भत्ता) में वृद्धि की मांग को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। यह सिर्फ एक राज्य का मुद्दा नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड सहित कई राज्यों में इंटर्न अपनी जायज मांगों को लेकर एकजुट होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस लेख में, हम इस आंदोलन के कारणों, विभिन्न राज्यों में इसकी वर्तमान स्थिति और इंटर्न स्टाइपेंड से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
मध्य प्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न का जोरदार प्रदर्शन
मध्य प्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन लगातार जारी है। राजधानी भोपाल में हाल ही में इंटर्न डॉक्टरों ने हमीदिया अस्पताल से मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च किया। इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग का इस्तेमाल किया और जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने लगे तो स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन (पानी की बौछार) का भी प्रयोग किया गया। इस घटना के बाद, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वाटर कैनन के इस्तेमाल की जांच के आदेश दिए हैं, क्योंकि डॉक्टरों का तर्क है कि वे अपराधी नहीं, बल्कि समाज सेवक हैं।
- मांग: मौजूदा 14,337 रुपए स्टाइपेंड को बढ़ाने की मांग।
- समर्थन: भोपाल के अलावा इंदौर, रतलाम और अन्य शहरों के सरकारी अस्पतालों के इंटर्न और जूनियर डॉक्टर भी हड़ताल में शामिल हैं।
- भविष्य की रणनीति: इंटर्न डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक स्टाइपेंड बढ़ाने का लिखित आदेश और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में भी इंटर्न की आवाज़ बुलंद
एमबीबीएस इंटर्न स्टाइपेंड वृद्धि की यह मांग केवल मध्य प्रदेश तक ही सीमित नहीं है। देश के अन्य हिस्सों, खासकर जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में भी इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्षरत हैं।
जम्मू-कश्मीर की स्थिति
- जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस (BDS) इंटर्न 31 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
- 7 सितंबर से उन्होंने 48 घंटे की भूख हड़ताल भी शुरू की।
- यहां के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों और दो डेंटल कॉलेजों के इंटर्न शामिल हैं।
- उनकी मुख्य मांग है कि सरकार जल्द से जल्द बढ़े हुए स्टाइपेंड को लेकर आधिकारिक आदेश जारी करे। उनका कहना है कि बातचीत का समय अब खत्म हो गया है और उन्हें ठोस कार्रवाई चाहिए।
उत्तराखंड में इंटर्न का आंदोलन
- उत्तराखंड में लगभग 600 एमबीबीएस इंटर्न स्टाइपेंड को 17,000 रुपए से बढ़ाकर 30,000 रुपए करने की मांग कर रहे हैं।
- यहां के इंटर्न ओपीडी (OPD) और वार्ड ड्यूटी का बहिष्कार कर रहे हैं, हालांकि आपातकालीन सेवाओं में कार्यरत इंटर्न मरीजों का इलाज जारी रखे हुए हैं।
- यह आंदोलन ‘वॉइस ऑफ इंटर्न्स – उत्तराखंड’ के बैनर तले हो रहा है।
- उत्तराखंड के करीब 600 पीजी (PG) रेजिडेंट डॉक्टर भी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
- चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने स्टाइपेंड संशोधन का प्रस्ताव तैयार करने की बात कही है और मेडिकल कॉलेजों से रिपोर्ट भी मांगी है।
भारत में मेडिकल इंटर्न स्टाइपेंड से जुड़ा कानून क्या कहता है?
यह समझना महत्वपूर्ण है कि मेडिकल इंटर्न को स्टाइपेंड देना केवल कॉलेज की इच्छा पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि यह एक कानूनी प्रावधान है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission – NMC) ने ‘कंपलसरी रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप रेगुलेशंस 2021’ (Compulsory Rotating Medical Internship Regulations 2021) में स्टाइपेंड के प्रावधान को अनिवार्य किया है।
- एनएमसी रेगुलेशंस 2021: इसके तहत, सभी मेडिकल इंटर्न को स्टाइपेंड देने का नियम तय है।
- शेड्यूल-IV, क्लॉज 3(a): इन रेगुलेशंस के शेड्यूल-IV, क्लॉज 3(a) के अनुसार, सभी इंटर्न को संबंधित संस्थान, विश्वविद्यालय या राज्य की सक्षम प्राधिकरण द्वारा तय स्टाइपेंड दिया जाना अनिवार्य है।
निष्कर्ष
एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों की यह हड़ताल केवल स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की स्वास्थ्य प्रणाली के आधारशिला माने जाने वाले युवा डॉक्टरों के उचित सम्मान और अधिकारों का भी प्रतीक है। शिक्षा के बाद कड़ी मेहनत और जिम्मेदारी भरे कार्य के लिए पर्याप्त पारिश्रमिक मिलना उनका अधिकार है। उम्मीद है कि सरकारें और संबंधित प्राधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर जल्द से जल्द सकारात्मक निर्णय लेंगे ताकि भविष्य के डॉक्टर बिना किसी बाधा के अपनी सेवाएं दे सकें और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली मजबूत बनी रहे।