देश के कई हिस्सों में बच्चों का स्कूल जाना बना चुनौती
हाल ही में सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं। ये वीडियो सिर्फ कुछ स्थानों की कहानी नहीं, बल्कि देश के कई ग्रामीण इलाकों में शिक्षा तक पहुँचने की राह में आ रही गंभीर बाधाओं को उजागर करते हैं। आइए जानते हैं क्या है ये पूरा मामला और इसका शिक्षा के अधिकार से क्या संबंध है।
मध्यप्रदेश और बिहार से सामने आईं दिल दहला देने वाली तस्वीरें
रायसेन (मध्य प्रदेश) कीचड़ भरे रास्ते की त्रासदी
मध्यप्रदेश के रायसेन जिले की गैरतगंज तहसील के देवनगर गाँव में छात्राओं को स्कूल जाने के लिए हर दिन कीचड़ भरे रास्तों से गुजरना पड़ता है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि ये बच्चे बिना चप्पल या जूते के कीचड़ में चल रहे हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें आगे जाकर पैर धोने के लिए पानी खोजना होगा। ग्रामीण बताते हैं कि बच्चे अक्सर फिसलकर गिर जाते हैं और चोटिल हो जाते हैं। छोटे बच्चों के लिए तो स्कूल जाना और भी मुश्किल हो जाता है। इन खतरनाक रास्तों पर सांप-बिच्छू के काटने का खतरा भी बना रहता है। स्कूल शिक्षकों और ग्रामीणों ने कई बार पंचायत प्रशासन से सड़क बनाने की गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।
गया (बिहार): पुल न होने से बढ़ा जोखिम
बिहार के गया जिले के मानपुर प्रखंड के कैया गाँव की स्थिति भी ऐसी ही है। यहाँ बच्चों को स्कूल पहुँचने के लिए घुटनों तक पानी पार करना पड़ता है, क्योंकि एक तरफ नदी है और दूसरी तरफ नहर, लेकिन कोई पुल नहीं है। बारिश के मौसम में पानी बढ़ जाने से बच्चों का स्कूल जाना कई दिनों तक बंद हो जाता है। ग्रामीणों की शिकायत है कि 3 महीने की बारिश में बच्चे हफ़्ते में सिर्फ 1-2 दिन ही स्कूल जा पाते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई का बहुत नुकसान होता है और डूबने का खतरा भी रहता है।
बुरहानपुर (मध्य प्रदेश): बच्चों की सीधी अपील
मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले की देवला ग्राम पंचायत से भी एक ऐसा ही मार्मिक वीडियो सामने आया है। इसमें बच्चे सिर पर किताबें रखकर कीचड़ भरे रास्ते से घर लौटते हुए दिख रहे हैं। वे सीधे ‘डीएम साहब’ से अपने स्कूल की सड़क बनवाने की गुहार लगा रहे हैं, ताकि उन्हें स्कूल जाने में परेशानी न हो।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 और बच्चों के स्कूल का रास्ता
भारत में प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अधिकार है, जो शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act 2009) द्वारा सुनिश्चित किया गया है। इस अधिनियम की धारा 6 के तहत, बच्चों के स्कूल की दूरी और सुरक्षित पहुँच के स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। इसके अनुसार, स्कूल तक पहुँचने का रास्ता सुरक्षित, रोशनी से युक्त और पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ वाला होना चाहिए। ये नियम इसलिए बनाए गए हैं ताकि कोई भी बच्चा रास्ते की मुश्किलों के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
बच्चों को सुरक्षित और सुलभ तरीके से स्कूल तक पहुँचाना सरकार और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है। इन वायरल वीडियो में दिख रही परिस्थितियाँ इस अधिकार का सीधा उल्लंघन करती हैं और इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। एक बेहतर भविष्य के लिए बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ सुरक्षित वातावरण भी मिलना चाहिए।