IIT बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला: विवाद, करियर और सम्मान

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे एक बार फिर सुर्खियों में है, और इस बार चर्चा का केंद्र हैं संस्थान के ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला। छात्र साहिल वाकोडे की दुखद मृत्यु के बाद उनका नाम एक बड़े विवाद से जुड़ गया है। लेकिन, प्रोफेसर दूल्ला केवल इस विवाद के लिए ही नहीं जाने जाते; उनका एक लंबा और प्रतिष्ठित अकादमिक तथा पेशेवर करियर रहा है। आइए, उनके जीवन, करियर और इस पूरी घटना को विस्तार से समझते हैं।

कौन हैं प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला?

प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला IIT बॉम्बे के ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग में एक सम्मानित प्रोफेसर हैं। वे एक दशक से भी अधिक समय से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं और अकादमिक के साथ-साथ छात्र प्रशासन से जुड़ी गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। JEE एडवांस्ड, UCEED और CEED जैसी प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षाओं के सफल आयोजन में उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां रही हैं, जिन्हें उन्होंने बखूबी निभाया है।

IIT बॉम्बे से पहले का सफर

IIT बॉम्बे में अपनी सेवाएं देने से पहले, प्रोफेसर दूल्ला ने बेंगलुरु में ‘पावर रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंसल्टेंट्स’ में काम किया। इसके बाद, उन्होंने हैदराबाद में ‘मशीन 2 मशीन’ के साथ भी अपनी विशेषज्ञता साझा की। इन अनुभवों के बाद, उन्हें IIT बॉम्बे में बतौर प्रोफेसर नियुक्त किया गया, जहाँ उन्होंने अपनी पहचान बनाई।

सम्मान और उपलब्धियाँ

प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है। इनमें 2021 में ‘प्रो. एस.पी. सुखात्मे एक्सीलेंस इन टीचिंग अवार्ड’ और 2017 में ‘IIT बॉम्बे एक्सीलेंस इन टीचिंग अवार्ड’ प्रमुख हैं। ये पुरस्कार शिक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और उत्कृष्टता को दर्शाते हैं।

साहिल वाकोड़े आत्महत्या मामला: विवाद की जड़

यह विवाद मिड सेमेस्टर परीक्षा के दौरान तब शुरू हुआ, जब IIT बॉम्बे के दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे को मोबाइल फोन पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल, चैट जीपीटी (ChatGPT) का इस्तेमाल करते हुए नकल करते पकड़ा गया। उस समय प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला ही कोर्स इंस्ट्रक्टर और इनविजिलेटर के तौर पर मौजूद थे। उन्होंने साहिल को पकड़ा और इसकी जानकारी संस्थान के अन्य अधिकारियों को भी दी। इस घटना के कुछ समय बाद ही छात्र साहिल वाकोडे ने हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या कर ली, जिससे संस्थान में हड़कंप मच गया।

पुलिस जांच और आरोप

साहिल की मृत्यु के बाद, उनके परिवार ने प्रोफेसर दूल्ला पर मानसिक उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर दूल्ला के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (abetment to suicide) और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST Act) से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। फिलहाल, पुलिस इन आरोपों की गहन जांच कर रही है।

फैकल्टी का समर्थन और विरोध

हालांकि, IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर दूल्ला के निलंबन (डीन के पद से अस्थायी रूप से हटाया गया) का पुरजोर विरोध किया है। फोरम का कहना है कि प्रोफेसर ने केवल वही किया जो एक इनविजिलेटर का कर्तव्य होता है – परीक्षा में नकल को रोकना। फोरम ने उनके समर्थन में बयान जारी किए हैं, और कई अन्य संस्थानों ने भी प्रोफेसर दूल्ला के समर्थन में अपनी आवाज उठाई है। उनका मानना है कि इस मामले में प्रोफेसर को गलत तरीके से फंसाया जा रहा है।

IIT में बढ़ती आत्महत्याएँ: एक चिंताजनक प्रवृत्ति

यह घटना IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और उन पर पड़ने वाले अकादमिक दबाव पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है। पिछले कुछ समय में IIT बॉम्बे सहित देश भर के IITs में छात्रों की आत्महत्या के कई मामले सामने आए हैं, जो एक गहरी चिंता का विषय है। इस दुखद घटना ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

निष्कर्ष

प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला का मामला एक जटिल स्थिति को दर्शाता है, जहाँ एक ओर एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर का करियर, सम्मान और कर्तव्य है, वहीं दूसरी ओर एक छात्र की दुखद मृत्यु और परिवार के गंभीर आरोप हैं। पुलिस जांच जारी है, और उम्मीद है कि जल्द ही सच्चाई सामने आएगी, ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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