आज के समय में मेडिकल साइंस और टेक्नोलॉजी एक-दूसरे के पर्याय बनते जा रहे हैं। एक हॉस्पिटल में सीटी स्कैन रिपोर्ट में आने वाली गड़बड़ी मशीन की तकनीकी खराबी है या किसी बीमारी का संकेत, यह समझना कभी-कभी डॉक्टरों और तकनीशियनों दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इस अंतर को पाटने के लिए देश के शीर्ष संस्थान आगे आए हैं। IIT मद्रास, IIT खड़गपुर और IIT कानपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान अब मेडिकल और टेक्नोलॉजी के इस अनूठे मिश्रण पर काम कर रहे हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य ‘फिजिशियन-इंजीनियर’ तैयार करना है।
IITs क्यों ला रहे हैं मेडिकल और इंजीनियरिंग का यह बदलाव?
पारंपरिक रूप से डॉक्टर मानव शरीर की संरचना को समझते हैं और इंजीनियर मशीनों का निर्माण करते हैं। लेकिन आज के दौर में मेडिकल इमेजिंग, एआई-बेस्ड डायग्नोस्टिक्स, बायो-सेंसर और सर्जिकल रोबोटिक्स के आ जाने से यह पुरानी दीवार अब ढह रही है। आधुनिक चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाले उन्नत उपकरणों को डिजाइन करने और उनका सटीक उपयोग करने के लिए ऐसे प्रोफेशनल्स की आवश्यकता है जो मशीन और मरीज दोनों की नब्ज को अच्छी तरह समझ सकें।
प्रमुख IITs की पहल और उनके मेडिकल प्रोग्राम्स
1. IIT मद्रास: डिपार्टमेंट ऑफ मेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी
IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रोफेसर वी. कामकोटि के अनुसार, संस्थान ने मेडिकल साइंसेज का नया स्कूल शुरू किया है, जिसका उद्देश्य मेडिकल साइंस और इंजीनियरिंग के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करना है। संस्थान द्वारा शुरू किए गए मुख्य कोर्स निम्नलिखित हैं:
- BS in Medical Science and Engineering: मेडिकल और तकनीक का संयुक्त पाठ्यक्रम।
- मैथमेटिकल मॉडलिंग इन फिजियोलॉजी
- क्वांटिटेटिव ह्यूमन फिजियोलॉजी
- क्लिनिकल न्यूरोसाइंस और मेडिकल इमेजिंग
प्रोफेसर कामकोटि का मानना है कि भविष्य में मेडिकल मार्केट में टिके रहने के लिए हर तकनीकी संस्थान को मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखना होगा।
2. IIT खड़गपुर: देश का पहला संस्थान जिसने शुरू किया मेडिकल कॉलेज
IIT खड़गपुर मेडिकल बिल्डिंग और एजुकेशन की शुरुआत करने वाला देश का पहला आईआईटी है। साल 2001 में स्कूल ऑफ मेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी की शुरुआत करने के बाद, संस्थान ने अपने ऑन-कैंपस हॉस्पिटल ‘डॉ. बी. सी. रॉय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी’ की स्थापना की है।
- इसे नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से 20 सीटों के साथ पोस्ट-ग्रेजुएट डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD) कोर्स शुरू करने की मंजूरी मिल चुकी है।
- यहां मेडिकल इमेजिंग, बायोमटेरियल्स, इम्प्लांट्स, कैंसर का शुरुआती पता लगाना और इम्यूनो-टेक्नोलॉजी जैसे विषयों पर विशेष रिसर्च की जा रही है।
3. IIT कानपुर का गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज
IIT कानपुर का गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी हायर और सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल डिग्रियां प्रदान करने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य एडवांस्ड मेडिसिन, मेडिकल रिसर्च और इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी को एक मंच पर लाना है ताकि देश स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।
‘फिजिशियन-इंजीनियर’ की क्यों है सख्त जरूरत?
IIT खड़गपुर के डायरेक्टर प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती का तर्क है कि अब वह मॉडल पुराना हो गया है जहाँ मेडिकल सेक्टर समस्या की पहचान करता था और इंजीनियरिंग सेक्टर उसके लिए मशीन बनाता था। आज जरूरत इस बात की है कि किसी बीमारी के इलाज से पहले ही सही तकनीकी समस्या की पहचान कर ली जाए। इसके अलावा, भारत आज भी वेंटिलेटर, स्कैनर, पेसमेकर और लाइफ-सपोर्ट सिस्टम जैसे मेडिकल उपकरणों के लिए विदेशों पर निर्भर है। मेड-टेक (Med-Tech) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए ऐसे विशेषज्ञों की फौज तैयार करना अनिवार्य है जो भारत को ग्लोबल लीडर बना सकें।
निष्कर्ष
IITs की यह पहल भारतीय शिक्षा और चिकित्सा जगत में एक क्रांतिकारी कदम है। जब इंजीनियरिंग की पैनी समझ मेडिकल साइंस के साथ जुड़ेगी, तो न केवल देश में अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों का निर्माण होगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा। यह शिक्षा प्रणाली छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए भविष्य के नए और रोमांचक द्वार खोल रही है।