हाल ही में आईआईटी बॉम्बे में हुई कुछ दुखद घटनाओं, विशेषकर छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद, संस्थान ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त और व्यापक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इन पहलों का उद्देश्य छात्रों को एक सहायक और सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है, जहाँ वे बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी समस्याओं को साझा कर सकें और उचित सहायता प्राप्त कर सकें।
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए प्रमुख पहलें
आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- ट्विन-शेयरिंग मॉडल लागू करना: हॉस्टल के कमरों में ‘ट्विन-शेयरिंग मॉडल’ लागू करने पर विचार किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों में अकेलेपन और डिप्रेशन की भावना को कम करना है। एक रूममेट के साथ रहने से छात्रों को मानसिक संबल मिलता है और वे अपनी भावनाओं और समस्याओं को एक-दूसरे के साथ साझा कर पाते हैं। यह सामाजिक जुड़ाव को बढ़ावा देता है और अलगाव की भावना को दूर करता है।
- काउंसलिंग सेवाओं का विस्तार: संस्थान ने काउंसलिंग सेवाओं के दायरे को काफी बढ़ा दिया है। कैंपस के 6 प्रमुख हॉस्टल और स्टूडेंट्स वेलनेस सेंटर में काउंसलिंग के घंटों में वृद्धि की गई है, ताकि छात्रों को आवश्यकता पड़ने पर तुरंत मदद मिल सके।
- बाहरी काउंसलिंग का खर्च वहन: आईआईटी बॉम्बे ने छात्रों को यह आश्वासन दिया है कि वे कैंपस के बाहर भी अपनी पसंद के किसी पेशेवर काउंसलर या एजेंसी से मदद ले सकते हैं। ऐसी बाहरी काउंसलिंग सेवाओं पर होने वाला पूरा खर्च संस्थान द्वारा उठाया जाएगा, जिससे छात्रों को अपनी पसंद और सुविधा के अनुसार सहायता प्राप्त करने में आसानी होगी।
- फैकल्टी से सुझाव: संस्थान प्रशासन प्रोफेसर्स और फैकल्टी सदस्यों से छात्रों के तनाव को कम करने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए और अधिक प्रभावी कदमों पर लगातार सलाह ले रहा है। इस संबंध में डिपार्टमेंट और इंस्टीट्यूट स्तर पर कई दौर की बैठकें की जा रही हैं।
- हॉस्टल के पंखों में बदलाव: हालांकि यह निर्णय एक पूर्वनियोजित नवीनीकरण योजना का हिस्सा था, लेकिन हॉस्टल के कमरों में सीलिंग फैन हटाकर वॉल-माउंटेड पंखे लगाए जा रहे हैं। यह कदम भी छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में देखा जा रहा है।
साहिल वाकोडे का दुखद मामला और विरोध प्रदर्शन
महाराष्ट्र के यवतमाल के रहने वाले एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग के द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे ने 18 सितंबर 2026 की शाम को हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या कर ली थी। साहिल को परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था, जहाँ उसने क्वेश्चन पेपर का फोटो चैट जीपीटी पर अपलोड करके नकल करने की कोशिश की थी। इस दुखद घटना के बाद करीब 400 छात्रों ने कैंपस में विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें छात्रों का गुस्सा और निराशा साफ झलक रही थी।
आईआईटी बॉम्बे में पहले की घटनाएं और परीक्षा स्थगित
पिछले 7 महीनों में आईआईटी बॉम्बे कैंपस में यह आत्महत्या का तीसरा मामला था। इससे पहले जुलाई में नए सेमेस्टर की शुरुआत में इसी हॉस्टल में 20 वर्षीय बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र ने और फरवरी में हॉस्टल-4 में एक और द्वितीय वर्ष के छात्र ने आत्महत्या की थी। इन घटनाओं के बाद, छात्रों के बढ़ते विरोध को देखते हुए, आईआईटी बॉम्बे ने 26 और 27 सितंबर को होने वाली मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है। ये परीक्षाएं अब 10 और 11 अक्टूबर को आयोजित की जाएंगी।
निष्कर्ष
आईआईटी बॉम्बे द्वारा छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या की रोकथाम के लिए उठाए गए ये कदम एक महत्वपूर्ण दिशा में पहल है। यह न केवल वर्तमान संकट से निपटने के लिए आवश्यक हैं, बल्कि भविष्य में छात्रों को एक अधिक सुरक्षित, सहायक और तनावमुक्त शैक्षिक वातावरण प्रदान करने के लिए भी अनिवार्य हैं। इन पहलों की सफलता छात्रों, फैकल्टी और प्रशासन के सामूहिक प्रयासों पर निर्भर करेगी, ताकि हर छात्र को यह महसूस हो सके कि वे अकेले नहीं हैं और मदद हमेशा उपलब्ध है।