दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज में एडमिशन विवाद: क्या है पूरा मामला और क्यों मचा है घमासान?

दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज में एडमिशन से जुड़ा एक बड़ा विवाद इन दिनों सुर्खियों में है। कॉलेज में दाखिलों में कथित धांधली को लेकर शिक्षकों और स्टाफ एसोसिएशन (HCSA) ने मोर्चा खोल दिया है, जिससे कॉलेज के साथ-साथ पूरी यूनिवर्सिटी में हड़कंप मच गया है। आखिर क्या है यह पूरा मामला और क्यों उठ रहे हैं एडमिशन प्रक्रिया पर सवाल?

हिंदू कॉलेज एडमिशन विवाद: धांधली के आरोप क्या हैं?

विवाद की जड़ एक्स्ट्रा करिकुलम एक्टिविटी (ECA) और स्पोर्ट्स कोटे से हुए एडमिशन को लेकर है। हिंदू कॉलेज स्टाफ एसोसिएशन (HCSA) और कॉलेज के शिक्षकों का आरोप है कि एडमिशन कमेटी और डिपार्टमेंट हेड्स के कड़े विरोध के बावजूद, तय 20% की सीमा से अधिक छात्रों को प्रवेश दिया गया है।

  • सीमा से अधिक एडमिशन: शिक्षकों का कहना है कि किसी भी एक अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के लिए ECA और स्पोर्ट्स कोटे से अधिकतम 20% सीटें ही भरी जा सकती हैं। हालांकि, B.Com (ऑनर्स) और BA (ऑनर्स) पॉलिटिकल साइंस जैसे कोर्सेज में यह सीमा पार की गई है।
  • उदाहरण के तौर पर: कॉलेज में ECA और स्पोर्ट्स कोटे के तहत कुल 48 सुपरन्यूमेरेरी सीटें हैं (33 स्पोर्ट्स, 15 ECA)। नियमानुसार, इन 48 सीटों का 20% यानी अधिकतम 9.6 छात्रों को एडमिशन दिया जा सकता है, जिसे सामान्यतः 10 माना जाता है। लेकिन आरोप है कि कॉमर्स में 17 और पॉलिटिकल साइंस में 15 छात्रों को प्रवेश दे दिया गया, जो निर्धारित सीमा से काफी अधिक है।

शिक्षकों की मांगें: DU कुलपति लें कॉलेज की कमान

इस धांधली के विरोध में दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिक्षक और HCSA ने कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में:

  • एडमिशन में हुई कथित धांधली की तुरंत जांच की मांग की गई है।
  • कुलपति से हिंदू कॉलेज का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का अनुरोध किया गया है, ताकि निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

हिंदू कॉलेज और DU का क्या है पक्ष?

इस पूरे विवाद पर हिंदू कॉलेज और दिल्ली यूनिवर्सिटी ने अपना पक्ष रखा है।

  • एल्गोरिदम में गलती: हिंदू कॉलेज और DU एडमिशन डिपार्टमेंट ने माना है कि यह पूरा मामला एडमिशन एल्गोरिदम में हुई एक गलती के कारण हुआ है। उनका कहना है कि यह कॉलेज के अधिकार क्षेत्र से बाहर है क्योंकि एडमिशन प्रक्रिया सेंट्रलाइज्ड है।
  • सेंट्रलाइज्ड एडमिशन प्रक्रिया: DU के प्रिंसिपल ने स्पष्ट किया है कि एडमिशन प्रक्रिया पूरी तरह से सेंट्रलाइज्ड होती है। यूनिवर्सिटी ही UG और PG कोर्सेज के लिए एप्लीकेशन इनवाइट करती है, और CUET स्कोर तथा छात्रों की पसंद के आधार पर कॉलेज और विषय अलॉट करती है। ECA और स्पोर्ट्स कोटे के लिए भी CUET स्कोर अनिवार्य होता है।
  • मेरिट का उल्लंघन नहीं: यूनिवर्सिटी का यह भी कहना है कि मेरिट का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है, क्योंकि जिन छात्रों को एडमिशन मिला है, वे स्पोर्ट्स/ECA मेरिट स्कोर के आधार पर योग्य थे।

HCSA का कड़ा रुख: प्रिंसिपल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

शिक्षकों और स्टाफ एसोसिएशन ने प्रिंसिपल के स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए कड़ा रुख अपनाया है।

  • HCSA ने प्रिंसिपल के खिलाफ ‘नो-कॉन्फिडेंस मोशन’ (अविश्वास प्रस्ताव) पारित किया है।
  • उन्होंने गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन टी.सी.ए. रंगाचारी और प्रिंसिपल अंजू श्रीवास्तव को पद से हटाने की मांग की है।
  • एसोसिएशन ने छात्र और शिक्षक प्रदर्शनकारियों को धमकाने के भी आरोप लगाए हैं।
  • इसके अतिरिक्त, स्टडी लीव, चाइल्ड केयर लीव, प्रमोशन में देरी और तय कार्यकाल से अधिक समय तक पद पर बने रहने वालों को लेकर भी चिंताएं व्यक्त की गई हैं।

आगे क्या? रद्द होंगे धांधली वाले एडमिशन?

इस विवाद के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अधिक संख्या में हुए एडमिशन रद्द किए जाएंगे? एसोसिएशन की मांग है कि इन सीटों को भरने के लिए 3 दिन के लिए दोबारा एडमिशन सेल खोला जाए और योग्य छात्रों को मौका दिया जाए।

यह मामला दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज की पारदर्शिता और एडमिशन प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस विवाद को कैसे सुलझाता है और क्या धांधली के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाती है।

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