महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) राज्य में सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षा आयोजित करने वाली एक महत्वपूर्ण संस्था है। पिछले कुछ महीनों से MPSC अपनी भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और पारदर्शिता की कमी को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शनों का सामना कर रहा है। यह विवाद लगातार सुर्खियों में बना हुआ है, जिसमें हजारों छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला, छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं और सरकार व न्यायपालिका ने इस पर क्या रुख अपनाया है।
MPSC के खिलाफ छात्र क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन?
MPSC परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के आंदोलन के पीछे कई मुख्य कारण हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
- पेपर लीक और अनियमितताएं: सबसे बड़ा मुद्दा पेपर लीक का है, खासकर ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में हुई धांधली ने छात्रों के आक्रोश को और बढ़ा दिया। उनका मानना है कि इस तरह की घटनाओं से परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
- पारदर्शिता की कमी: छात्रों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है, जिससे उन्हें अपनी मेहनत पर भरोसा नहीं रह जाता।
- भर्ती में देरी: विभिन्न पदों पर भर्ती प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी से छात्रों का भविष्य अधर में लटक जाता है।
- परीक्षा पैटर्न में बदलाव: MPSC द्वारा CBT (कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) के माध्यम से परीक्षाएं कराने के फैसले का छात्रों ने विरोध किया, वे ऑफलाइन परीक्षाएं जारी रखने की मांग कर रहे हैं।
- पदों में कटौती: कुछ पदों में कटौती को लेकर भी छात्रों में नाराजगी है।
- अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग: इन सभी अनियमितताओं के लिए छात्र MPSC अध्यक्ष विवेक भीमन्वार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि उनके नेतृत्व में आयोग इन समस्याओं को नियंत्रित करने में विफल रहा है।
बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख और सरकार की प्रतिक्रिया
छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शनों के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लिया। 7 अक्टूबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से राज्य में खाली पड़े 70 हजार पदों और भर्ती प्रक्रिया पर तीन हफ्तों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा। कोर्ट ने सरकार को भर्ती का एक स्पष्ट रोडमैप पेश करने का निर्देश दिया। हालांकि, कोर्ट ने छात्रों को आंदोलन के बजाय अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह भी दी।
इस बीच, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आयोग की जांच कराने की बात कही और छात्रों से भी मुलाकात की। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे, शिवसेना (UBT) के विधायक आदित्य ठाकरे, NCP विधायक रोहित पवार, सांसद सुप्रिया सुले और राज्य सरकार के मंत्री धनंजय मुंडे जैसे कई बड़े नेताओं ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया या उनसे मुलाकात की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी छात्रों के आंदोलन और उनकी मांगों का समर्थन किया।
MPSC अध्यक्ष का बचाव
आरोपों का जवाब देते हुए MPSC के चेयरमैन विवेक भीमन्वार ने कहा कि आयोग और राज्य सरकार ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कई उच्च-स्तरीय समितियां बनाई हैं। उन्होंने पेपर लीक के मामलों में पुलिस केस दर्ज करने की भी जानकारी दी। भीमन्वार ने अपनी छवि खराब करने के इरादे से लगाए जा रहे व्यक्तिगत और राजनीतिक आरोपों का खंडन किया और कहा कि उन्होंने पद संभालने के बाद से आयोग में कई सुधार किए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की घटना उनके पद संभालने से पहले की है। उन्होंने कहा कि अगर उनके खिलाफ कोई भी ठोस सबूत मिलता है, तो वह तुरंत पद छोड़ देंगे।
सरकार के आश्वासन और आंदोलन की वर्तमान स्थिति
विवाद को शांत करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण आश्वासन दिए हैं:
- MPSC के वर्तमान और पूर्व अध्यक्षों व सदस्यों के कामकाज की तीन महीने के भीतर न्यायिक जांच कराई जाएगी।
- MPSC की परीक्षाएं ऑफलाइन ही कराई जाएं या किसी भी बदलाव पर छात्रों से चर्चा जरूर की जाएगी।
- ग्रुप C की आगामी परीक्षाओं में पदों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
- अगले तीन साल की भर्तियों की योजना बनाई जाएगी और सेवानिवृत्ति से खाली होने वाले पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- एक ‘सिंगल कार्ड सिस्टम’ लाने का प्रस्ताव भी है, जिससे छात्रों को हर परीक्षा के लिए बार-बार डॉक्यूमेंट जमा नहीं करने पड़ेंगे।
इन आश्वासनों के बाद 2 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया था। हालांकि, MPSC अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग अभी भी बरकरार है, जिसके चलते कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू हो गए हैं। छात्रों की मांग है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और स्थायी समाधान चाहिए ताकि उनकी मेहनत और भविष्य सुरक्षित रह सके।