61 साल के IIT ग्रेजुएट का संघर्ष: बढ़ती उम्र में नौकरी की तलाश क्यों है मुश्किल?
आज के दौर में करियर बनाना जितना चुनौती भरा है, उसे बनाए रखना और भी कठिन होता जा रहा है। खासकर तब, जब आपकी उम्र ढल रही हो और तकनीक तेज़ी से बदल रही हो। ऐसी ही एक कहानी है IIT कानपुर के पूर्व छात्र गौतम देव की, जिन्होंने अपनी उम्र के छठे दशक में नौकरी खोने के बाद एक अभूतपूर्व संघर्ष का सामना किया। यह कहानी केवल गौतम देव की नहीं, बल्कि उन हजारों अनुभवी पेशेवरों की है जो बदलते वर्कप्लेस में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए जूझ रहे हैं।
IIT ग्रेजुएट का संघर्ष: नौकरी छूटने के बाद क्या हुआ?
अमेरिका के डलास शहर में रहने वाले 61 वर्षीय गौतम देव एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। उन्होंने IIT कानपुर से अपनी पढ़ाई पूरी की और IT सेक्टर में दो दशकों से अधिक का अनुभव हासिल किया। दो साल पहले अपनी नौकरी गंवाने के बाद, गौतम को उम्मीद थी कि इतने अनुभव के साथ उन्हें जल्द ही कोई नई नौकरी मिल जाएगी। लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली। लगातार प्रयासों के बावजूद, उन्हें अब तक कोई पूर्णकालिक नौकरी नहीं मिल पाई है।
जब पारंपरिक नौकरी नहीं मिली: गिग वर्क का सहारा
लंबे समय तक बेरोजगारी झेलने के बाद, गौतम देव ने अपनी आजीविका चलाने के लिए ‘गिग वर्क’ (Gig Work) का रास्ता अपनाया। उन्होंने उबर (Uber) टैक्सी चलाई, डोरडैश (DoorDash) और वॉलमार्ट स्पार्क (Walmart Spark) जैसे डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के लिए भी काम किया। हालांकि, शारीरिक सीमाओं और कम कमाई के चलते यह उनके लिए स्थायी समाधान नहीं बन पाया। उन्होंने ‘डे ट्रेडिंग’ (Day Trading) में भी हाथ आजमाया, जिसमें शुरुआत में मुनाफा हुआ, लेकिन बाद में नुकसान उठाना पड़ा और उनकी सारी बचत खत्म हो गई।
आर्थिक संकट और सामाजिक सुरक्षा का प्रश्न
नौकरी न मिलने का सीधा असर गौतम की आर्थिक स्थिति पर पड़ा। उन्हें किराए और दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए अपनी सारी बचतें खत्म करनी पड़ीं और क्रेडिट कार्ड का सहारा लेना पड़ा। इस मुश्किल घड़ी में, उन्होंने ‘गोफंडमी’ (GoFundMe) पर एक फंडरेजर भी शुरू किया, जिससे उन्हें कुछ आर्थिक मदद मिल पाई। गौतम का कहना है कि अब वे अमेरिका में रहने या भारत वापस लौटने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि सोशल सिक्योरिटी का समय भी नजदीक आ रहा है।
अनुभव बनाम उम्र: क्या बढ़ती उम्र IT सेक्टर में बाधा है?
गौतम देव का मानना है कि उनकी बढ़ती उम्र शायद नौकरी न मिलने का एक बड़ा कारण है। IT सेक्टर में दो दशकों से अधिक का अनुभव होने और IIT कानपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से टॉप करने के बावजूद, कई कंपनियों ने उन्हें यह कहते हुए हायरिंग से मना कर दिया कि वे अभी भर्ती नहीं कर रहे हैं। यह एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है कि क्या आज के कॉरपोरेट जगत में अनुभव को उम्र से ज़्यादा महत्व नहीं दिया जा रहा है?
यह कहानी अनुभवी पेशेवरों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है। बदलते तकनीकी परिदृश्य और लगातार विकसित होते जॉब मार्केट में, आजीवन सीखने और खुद को अपग्रेड करते रहने की ज़रूरत है। चाहे आपकी उम्र कुछ भी हो, नए कौशल सीखना और नेटवर्किंग बनाए रखना आपको भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकता है।
आगे क्या? चुनौतियों से कैसे निपटें?
गौतम देव जैसे कई लोग हैं जो इस तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यह कहानी हमें दिखाती है कि बढ़ती उम्र में भी करियर में सक्रिय रहने के लिए निरंतर प्रयास, कौशल विकास और वित्तीय नियोजन कितना महत्वपूर्ण है। यह समाज और कंपनियों के लिए भी एक संदेश है कि अनुभव और ज्ञान का सम्मान किया जाना चाहिए, न कि उम्र को योग्यता की बाधा बनने दिया जाए।
- कौशल विकास (Skill Development): नए तकनीकी कौशल सीखते रहें।
- नेटवर्किंग (Networking): अपने प्रोफेशनल नेटवर्क को सक्रिय रखें।
- वित्तीय नियोजन (Financial Planning): भविष्य के लिए बचत और निवेश पर ध्यान दें।
- लचीलापन (Flexibility): नए अवसरों और काम करने के तरीकों के लिए खुले रहें।